‘अफसोस के आंसू या प्रायश्चित के?’ संजय निषाद के रोने पर अखिलेश यादव का तीखा तंज

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में निषाद पार्टी की मेगा रैली के दौरान एक भावनात्मक दृश्य देखने को मिला, जब राज्य सरकार के मंत्री संजय निषाद भाषण देते समय रोने लगे. उन्होंने अपने समाज के साथ हो रहे अन्याय और राजनीतिक उपेक्षा का मुद्दा उठाया. इस घटना का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिस पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी और चुटकी ली. इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है और एक बार फिर से निषाद समुदाय के मुद्दे चर्चा में आ गए हैं.
भाषण के दौरान छलके आंसू, उठाए सामाजिक मुद्दे
महारैली में संजय निषाद ने कहा कि उनके समाज के लोगों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि समाज के वोट छीने जा रहे हैं और उन्हें उनका हक नहीं मिल रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि उनके समाज ने देश की आजादी में योगदान दिया, लेकिन आज उनके वंशज संघर्ष कर रहे हैं. अपने संबोधन के दौरान जब उन्होंने बहन-बेटियों की सुरक्षा और सम्मान का मुद्दा उठाया तो वह भावुक हो गये और रोने लगे.
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर कसा तंज
इस घटना के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए तंज कसा. उन्होंने लिखा कि ये आंसू बीजेपी के साथ जाने के अफसोस के हैं या प्रायश्चित के. उन्होंने यह भी कहा कि जनता इस वीडियो को अलग नजरिए से देख रही है और इसके पीछे एक गाने का भी जिक्र किया.
सपा और निषाद पार्टी का पुराना गठबंधन
गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले निषाद पार्टी समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में थी. 2018 के गोरखपुर उपचुनाव में सपा ने संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद को अपना उम्मीदवार बनाया था और उन्होंने जीत हासिल की. यह जीत इसलिए खास थी क्योंकि करीब 40 साल बाद यह सीट सपा के खाते में गई थी. लेकिन 2019 चुनाव के दौरान सीट बंटवारे को लेकर विवाद हो गया और गठबंधन टूट गया. इसके बाद निषाद पार्टी एनडीए में शामिल हो गई.
आरक्षण की मांग और आगे की रणनीति
महारैली में संजय निषाद ने अपने समाज को एससी वर्ग में शामिल करने और आरक्षण देने की मांग दोहरायी. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की करीब 160 सीटों पर निषाद मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इन इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पार्टी आगे भी रैलियां करेगी. गोरखपुर के बाद प्रदेश में तीन और बड़ी रैलियां आयोजित की जाएंगी, जिनके जरिए समाज को एकजुट करने का प्रयास किया जाएगा.
