उत्तराखंड: केदारनाथ में बर्बाद हुई Aiims की हेली एम्बुलेंस, कभी बचाती थी लोगों की जान, आज अपनी दुर्दशा पर रो रही
उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली एम्स की हेली एंबुलेंस खुद लचर व्यवस्था का प्रतीक बन गई है. कभी जान बचाने के लिए आसमान फाड़ने वाली यह सेवा पिछले एक साल से केदारनाथ में कबाड़ खा रही है, लेकिन जिम्मेदार एजेंसियां आंखें मूंदे बैठी हैं।
मई 2025 की दुर्घटना के बाद क्षतिग्रस्त हेली एम्बुलेंस अभी भी हेलीपैड के पास पड़ी हुई है और इसे हटाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। यह स्थिति न सिर्फ सिस्टम की सुस्ती की पोल खोलती है बल्कि सुदूर इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और आपदा प्रबंधन के दावों की भी पोल खोलती है.
17 मई को केदारनाथ में एम्स की हेली एंबुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी. यहां एंबुलेंस एक महिला मरीज को लेने गई थी. यह हादसा हार्ड लैंडिंग के दौरान हुआ. इसके बाद से एम्स की महत्वपूर्ण एयरो मेडिकल सेवा ठप हो गई.
अनुबंध के मुताबिक हेली एंबुलेंस खराब होने या दुर्घटनाग्रस्त होने पर संबंधित कंपनी को तीन दिन के अंदर नई एंबुलेंस उपलब्ध करानी थी, लेकिन स्थिति यह है कि नई हेली एंबुलेंस उपलब्ध कराना तो दूर संबंधित एजेंसी ने एक साल से क्षतिग्रस्त एंबुलेंस को भी दुर्घटनास्थल से नहीं हटाया है। यह एम्बुलेंस अभी भी केदारनाथ में क्षतिग्रस्त हालत में पड़ी हुई है।
