उत्तराखंड: चुनावी मोर्चे पर अकेले पड़े कांग्रेस के सेनापति, नेताओं में खींचतान, बनानी पड़ रही ढाल – कांग्रेस पार्टी में गुटबाजी, गणेश गोदियाल हैं असहज, कार्यकारिणी को लेकर अभी कोई फैसला नहीं
कांग्रेस के सेनापति चुनावी मोर्चे पर अकेले पड़ गये हैं. प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को बीजेपी के हमले का जवाब देने के बजाय अपने ही नेताओं की आपसी खींचतान से उपजे घमासान को रोकने के लिए ढाल बनना पड़ रहा है. प्रदेश कार्यकारिणी पर दो महीने से चर्चा चल रही है लेकिन अब तक हाईकमान कोई फैसला नहीं ले पाया है.
सत्ता का सूखा खत्म करने के लिए कांग्रेस ने 2027 के चुनाव में बड़ी उम्मीदें लगाई हैं, लेकिन इस उम्मीद को हकीकत में बदलने के लिए पार्टी नेताओं में एकजुटता की जगह गुटबाजी सामने आ रही है. पार्टी के कुछ नेता हरीश रावत के समर्थन में नजर आ रहे हैं तो कुछ नेता पुराने मतभेदों को लेकर एक-दूसरे के खिलाफ खुलकर बयानबाजी कर रहे हैं.
ऐसे में पार्टी में गुटबाजी से प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल असहज महसूस कर रहे हैं. नवंबर 2025 में कांग्रेस आलाकमान ने गोदियाल को कमान सौंपी. इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश देखने को मिला. लेकिन अभी तक गोदियाल अपनी टीम तैयार नहीं कर पाए हैं. पार्टी नेताओं के बीच आपसी खींचतान और गुटबाजी भी इसकी वजह मानी जा रही है. सभी वरिष्ठ नेता अपने समर्थकों को कार्यकारिणी में जगह दिलाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन आलाकमान नहीं चाहता कि जंबो कार्यकारिणी बने. इसी दुविधा में कार्यपालिका फंसी हुई है.
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प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि सभी पार्टी नेताओं को एक-दूसरे के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी न करने की हिदायत दी गई है. यदि कोई मुद्दा है तो उसे पार्टी फोरम में रखना चाहिए। बयानबाजी से पार्टी की छवि खराब होती है. इस समय सभी नेताओं को अपने मतभेद भुलाकर कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिए एकजुट होकर काम करने की जरूरत है. उन्होंने कहा, जल्द ही प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा की जाएगी.
