उत्तराखंड: मदन कौशिक बने पंचायती राज मंत्री, छोटी सरकार को बड़ी शक्तियां देने के सामने हैं पांच बड़ी चुनौतियां
पंचायती राज मंत्री बने मदन कौशिक के सामने छोटी सरकार (पंचायतों) को बड़ी शक्तियां देने की चुनौती है. ताकि पंचायतों में विकास की गति और तेज हो सके.
त्रिवेन्द्र सरकार में शहरी विकास मंत्री रहे मदन कौशिक को धामी सरकार में शहरों की जगह पंचायतों की जिम्मेदारी मिली है। हालांकि उम्मीद जताई जा रही थी कि उन्हें फिर से शहरी विकास की जिम्मेदारी मिल सकती है. उन्हें ऐसे समय में पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी मिली है जब विभाग में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. पंचायतों के विकास के लिए उन्हें कम समय में इन चुनौतियों से पार पाना होगा।
मदन कौशिक के सामने पांच बड़ी चुनौतियां
1- 29 विषयों को पंचायतों को सौंपने की चुनौती
देहरादून। राज्य गठन के 25 साल बाद भी 73वें संविधान संशोधन में मिले 29 विषयों (विभागों) को पंचायतों को नहीं सौंपा गया है. यही कारण है कि पंचायतें आज भी वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वायत्तता के लिए संघर्ष कर रही हैं। इससे पहले सरकार की ओर से इन विभागों को पंचायतों को सौंपने के लिए एक हाई पावर कमेटी का गठन किया गया था. राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान के तहत गठित समिति ने अपनी सिफारिश सरकार को सौंप दी है.
2- 850 ग्राम पंचायतों के पास अपना पंचायत भवन नहीं है.
राज्य में 850 से अधिक पंचायतें ऐसी हैं जिनके पास अपना पंचायत भवन नहीं है. पंचायती राज मंत्री मदन कौशिक के सामने सभी पंचायतों में पंचायत भवन निर्माण की चुनौती होगी।
