ऋषिकेश: अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के समापन पर पहुंचे राज्यपाल, कहा- योग एक साथ बांधने का मंत्र है – राज्यपाल गुरुमीत सिंह ऋषिकेश में सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव राज्यों के समापन में शामिल हुए
गढ़वाल मंडल विकास निगम द्वारा जीएमवीएन गंगा रिजॉर्ट, मुनि की रेती में आयोजित सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के अंतिम दिन राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) शामिल हुए। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड न केवल गंगा बल्कि योग और अध्यात्म की भी उद्गम स्थली है।
हिमालय की जड़ी-बूटियाँ, शुद्ध हवा और शांति इसे दुनिया का वेलनेस हब बनाती है। मेरा मानना है कि योग उत्तराखंड को वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन के शिखर पर ले जायेगा।
राज्यपाल ने कहा कि योग प्रेम, शांति, भक्ति और वीरता का संदेश है। इस अमृत का सेवन हर व्यक्ति को करना चाहिए। योग का प्रचार-प्रसार देश-विदेश में होना चाहिए। जो भी व्यक्ति शांति और आध्यात्मिकता का अनुभव करना चाहता है उसे उत्तराखंड आना चाहिए। यदि आप योग की दिशा में चलेंगे तो एक समय ऐसा आएगा जब आपका मिलन ईश्वर से होगा। योग एक सूत्र में बांधने का मंत्र है। हमें योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का संकल्प लेना चाहिए। मुझे विश्वास है कि हमारी आने वाली पीढ़ी पूरे विश्व को योग का पाठ सिखाएगी।
विश्व जल दिवस पर राज्यपाल ने कहा कि जल हमारे विचारों, सोच और हमारी धारणा का भी वाहक है। मनुष्य का संकल्प भी मां गंगा जैसा होना चाहिए, जो आपको, आपके परिवार, समाज और देश को सफलता की ओर ले जा सके। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को विश्व गुरु, विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत बनाने का संकल्प लिया है। योग आज एक वैश्विक जन आंदोलन बन गया है। आज पूरा विश्व अपनी सांस्कृतिक सीमाओं से परे योग को अपना रहा है।
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से आज योग विश्व के लगभग 144 देशों तक पहुंच चुका है। उस योग की जननी मुनि की रेती, तपोवन और स्वर्गाश्रम (ऋषिकेश) है। इस मौके पर नगर पालिका परिषद मुनि की रेती ढालवाला अध्यक्ष नीलम बिजल्वाण, स्वामी अवधेशानंद गिरि, प्रेम बाबा, उषा माता, नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा आदि मौजूद रहे।
योगाचार्यों का सम्मान किया गया
अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के अंतिम दिन विभिन्न संस्थानों के योग छात्रों ने विभिन्न योग मुद्राओं का प्रदर्शन किया। योग प्रेमियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये। कार्यक्रम में महोत्सव में योग सिखाने वाले योगाचार्यों को राज्यपाल द्वारा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने विजय छावरिया और डॉ. दीपक पटवर्धन द्वारा लिखित पुस्तक दिव्य अनुभूति बाबा नीम करोली महाराज का विमोचन किया।
