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कागजों पर बनाई कंपनी, सरकार से ले लिए 59 लाख रुपये…बरेली के फरजान का बड़ा जीएसटी खेल उजागर

उत्तर प्रदेश समाचार: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में फर्जी कंपनियों के जरिए लाखों रुपये के जीएसटी घोटाले का मामला सामने आया है. इस मामले में क्राइम ब्रांच और किला थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में पता चला है कि इस गिरोह ने कागजों पर फर्जी कंपनियां बनाकर 59 लाख रुपये से ज्यादा का इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड हासिल किया था. पुलिस के मुताबिक इस पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपी फरजान हाशमी है, जो फिलहाल फरार है. पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है और उम्मीद है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.

कागजों पर फर्जी फर्म बनाई गई
पुलिस जांच में पता चला कि किला थाना क्षेत्र के बड़ा बाजार निवासी फरजान हाशमी ने कागजों पर ‘एफएस ट्रेडर्स’ नाम से फर्म तैयार की थी। दरअसल इस फर्म का धरातल पर कोई अस्तित्व ही नहीं था। वहां न तो कोई दुकान थी और न ही कोई गोदाम. जब राज्य कर विभाग को इस फर्म के लेनदेन पर संदेह हुआ, तो उन्होंने इसकी जांच शुरू कर दी। जांच में पता चला कि फरजान ने अपने साथियों के साथ मिलकर कई अन्य फर्जी कंपनियों से कागजी लेन-देन दिखाया था.

जीएसटी रिटर्न के जरिए किया गया फर्जीवाड़ा
आरोपियों ने जीएसटी पोर्टल पर फर्जी तरीके से जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-2 रिटर्न दाखिल किया। इन कागजी लेन-देन के आधार पर उन्होंने विभाग से 59,17,093 रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया। यह रकम सीधे सरकारी खजाने से निकाली गई थी। मामला सामने आने के बाद राज्य कर विभाग के अधिकारी अनूप कुमार की शिकायत पर सितंबर 2025 में किला थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था. इसके बाद पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया.

व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग से खुला राज!
एसआईटी के मुख्य जांचकर्ता इंस्पेक्टर संजय कुमार धीर और उनकी टीम ने डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया. मोबाइल नंबरों और ऑनलाइन गतिविधियों की जांच के बाद पुलिस को इस गिरोह के बारे में अहम जानकारी मिली. देर रात पुलिस ने किला इलाके से सद्दाम हुसैन और मोहम्मद समद उर्फ ​​शाहरुख को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में सद्दाम ने बताया कि वह फर्जी पहचान से लिए गए सिम कार्ड के जरिए जीएसटी रिटर्न दाखिल करता था.

मोबाइल डेटा से और भी राज खुल सकते हैं
पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से कई डिलीट की गई व्हाट्सएप चैट और वॉयस रिकॉर्डिंग भी मिलीं। इन रिकॉर्डिंग्स में फर्म की लॉगइन आईडी और पासवर्ड को लेकर बातचीत हो रही थी. दूसरे आरोपी शाहरुख ने भी पूछताछ में बताया कि वह फरजान के कहने पर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था और बदले में नकद लेता था. पुलिस ने दोनों आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा ताकि डिलीट किए गए डेटा को भी रिकवर किया जा सके.

फरार मुख्य आरोपी की तलाश जारी है
इस पूरी कार्रवाई को एसएसपी बरेली के निर्देशन और एसपी क्राइम के नेतृत्व में गठित टीम ने अंजाम दिया. टीम में इंस्पेक्टर संजय कुमार धीर, सब इंस्पेक्टर वीरभद्र सिंह, सर्विलांस सेल के सतेंद्र कुमार, हेड कांस्टेबल सतेंद्र और विकास कुमार शामिल थे। पुलिस का कहना है कि मुख्य आरोपी फरजान हाशमी अभी भी फरार है और उसकी तलाश जारी है. उनकी गिरफ्तारी के बाद इस पूरे जीएसटी घोटाले से जुड़े और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है.

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