तीन साल बाद खुला निर्यात बाजार, पश्चिम एशिया युद्ध से 1600 करोड़ का कारोबार खतरे में

तीन साल बाद उत्तर प्रदेश में गेहूं और गेहूं उत्पादों के निर्यात का रास्ता खुला था, लेकिन अब पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के कारण इस पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. भारत सरकार ने वर्ष 2026 में सीमित मात्रा में गेहूं और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी। राज्य के व्यापारियों और आटा उद्योग को इससे काफी उम्मीदें थीं। लेकिन समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरों, महंगे बीमा और शिपिंग संकट के कारण खाड़ी देशों को निर्यात अब अनिश्चित हो गया है। इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश के गेहूं व्यापार और मिलिंग उद्योग पर पड़ रहा है.
युद्ध के कारण निर्यात सौदे स्थगित होने लगे
निर्यातक संगठनों के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ रहा है. इसके साथ ही युद्ध जोखिम बीमा की लागत भी काफी बढ़ गई है. इसी वजह से कई नए निर्यात सौदे फिलहाल टाल दिए गए हैं. भारत सरकार ने फरवरी 2026 में 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को मंजूरी दी थी। यह कदम 2022 में लगाए गए प्रतिबंध के बाद निर्यात की आंशिक बहाली जैसा था। सरकार का मानना था कि अच्छे उत्पादन और पर्याप्त भंडार के कारण किसानों को निर्यात के माध्यम से बेहतर कीमत मिलेगी।
यूपी में आटा मिलों का बड़ा नेटवर्क
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के महासचिव और यूपी रोलर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक बजाज के मुताबिक, उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्यों में से एक है। यहां आटा और मैदा बनाने वाली मिलों का एक बड़ा नेटवर्क है। गेहूं उत्पादों के निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 25 से 35 फीसदी मानी जाती है. उन्होंने कहा कि राज्य से लगभग 1500 से 1700 करोड़ रुपये के निर्यात की संभावना है.
कई जिलों के उद्योगों को फायदा होना था
अगर निर्यात सामान्य रूप से शुरू होता तो इसका सबसे ज्यादा फायदा कानपुर, आगरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, मेरठ और बरेली समेत करीब 20 जिलों को मिलता। इन क्षेत्रों में गेहूं आधारित प्रसंस्करण और निर्यात का एक बड़ा नेटवर्क है। यहां की मिलें लंबे समय से खाड़ी देशों को आटा, मैदा और सूजी की आपूर्ति करती रही हैं।
शिपिंग और बीमा लागत बढ़ने की उम्मीद है
इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति जारी रही तो शिपिंग लागत 40 से 50 फीसदी तक बढ़ सकती है. साथ ही बीमा प्रीमियम भी दोगुना हो सकता है. ऐसे में तीन साल बाद खुलने जा रहा निर्यात बाजार एक बार फिर प्रभावित हो सकता है और उत्तर प्रदेश के आटा-मैदा उद्योग को बड़ा झटका लग सकता है.
