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देहरादून: गैस संकट की मार झेल रही जरूरतमंद बुजुर्गों की रसोई, संचालिका रमनप्रीत कौर के सामने बड़ी चुनौती

शहर में जरूरतमंद बुजुर्गों के लिए संचालित बुजुर्गों की रसोई इन दिनों गैस संकट से जूझ रही है। गैस सिलेंडर की कमी के कारण इस सामाजिक पहल का दायरा अब सीमित हो गया है, जिससे कई बुजुर्गों की दैनिक भोजन व्यवस्था प्रभावित हो गई है.

किचन संचालिका रमनप्रीत कौर ने बताया कि वह उन बुजुर्गों के लिए खाना बनाती हैं जो अकेले रहते हैं, खुद खाना बनाने में सक्षम नहीं हैं या आर्थिक रूप से कमजोर हैं. इन दिनों गैस सिलेंडर न मिलने से रसोई चलाने में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं।

उन्होंने बताया कि पहले हर दिन करीब 30 बुजुर्गों के लिए खाना बनता था लेकिन गैस की कमी के कारण अब यह संख्या घटकर सिर्फ 10 रह गयी है. हालांकि स्थानीय लोगों के सहयोग से रसोई को पूरी तरह से बंद नहीं किया गया है, लेकिन सेवाओं को सीमित करना पड़ा है.

रमनप्रीत कौर ने बताया कि फिलहाल उन्हें इंडक्शन पर खाना बनाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे बड़ी मात्रा में खाना बनाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में उन्होंने उन बुजुर्गों को प्राथमिकता दी है जो पूरी तरह से इसी रसोई पर निर्भर हैं, जबकि जो लोग खुद खाना बना सकते हैं या दूसरे विकल्प अपना सकते हैं उनकी सेवा फिलहाल बंद कर दी गई है.

उन्होंने बताया कि इस पहल की शुरुआत उन्होंने कोविड काल के दौरान की, जब उन्होंने अकेले और असहाय बुजुर्गों की स्थिति को करीब से देखा. तब से वह लगातार उनके लिए खाना बनाकर पहुंचा रही हैं।



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सिर्फ 20 रुपये में खाना

रमनप्रीत कौर बुजुर्गों को सिर्फ 20 रुपये में पौष्टिक और सात्विक भोजन उपलब्ध कराती हैं, जबकि जो लोग पैसे देने में असमर्थ हैं उनसे कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। हालांकि, गैस की कमी और बढ़ती लागत के कारण अब इस सेवा को जारी रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।


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