प्रतापगढ़ में डीएम ने खुद खेत में काटा गेहूं, उत्पादकता जांचने का अनोखा तरीका

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने किसानों के बीच पहुंचकर एक अनोखी पहल की. उन्होंने खुद खेत में जाकर गेहूं की फसल की कटाई कराई और उसकी उत्पादकता का आकलन किया. यह कार्य तहसील सदर के ब्लॉक संडवा चंद्रिका की ग्राम पंचायत भदौसी में किसान हौसला प्रसाद के खेत में किया गया। इस दौरान भारत सरकार द्वारा विकसित सीसीई एग्री ऐप के माध्यम से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की गई। इस पहल का उद्देश्य सटीक डेटा एकत्र करना और किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना था।
डीएम ने खेत में पहुंचकर फसल कटाई प्रयोग किया
जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी खुद खेतों में पहुंचे और गेहूं की फसल की कटाई कराई. यह फसल कटाई प्रयोग पूर्णतः वैज्ञानिक तरीके से किया गया। इसमें 10 मीटर भुजा वाले समबाहु त्रिभुज के क्षेत्र में यादृच्छिक संख्या के आधार पर फसल की कटाई की जाती थी, ताकि सटीक डेटा प्राप्त हो सके।
उत्पादकता का सटीक माप
इस प्रयोग में कुल 20.550 किलोग्राम गेहूं की उपज प्राप्त हुई। इसके आधार पर जिले में गेहूं की औसत उत्पादकता 47.47 क्विंटल प्रति हेक्टेयर आंकी गई। यह आंकड़ा किसानों और प्रशासन दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
फसल बीमा योजना में अहम भूमिका
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत यह क्रॉप कटिंग बहुत महत्वपूर्ण है। इसके जरिए किसानों को फसल क्षति के आधार पर मुआवजा तय किया जाता है. इसलिए यह प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की गई, ताकि किसानों को सही लाभ मिल सके।
किसानों से संवाद एवं जागरूकता
इस दौरान डीएम ने किसानों से सीधा संवाद किया और उन्हें कृषि से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी गेहूं की फसल केवल सरकारी क्रय केन्द्रों पर ही बेचें ताकि उन्हें उचित मूल्य मिल सके।
पराली न जलाने और सहयोग की अपील
जिलाधिकारी ने किसानों से पराली न जलाने की भी अपील की. उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को नजदीकी गौशालाओं में पशुओं के लिए चारा दान करना चाहिए, जिससे पर्यावरण और पशु दोनों को फायदा होगा.
अधिकारियों की उपस्थिति
इस मौके पर उपजिलाधिकारी सदर नैंसी सिंह, अपर सांख्यिकी अधिकारी मयंक बाजपेई, तहसीलदार अनिल कुमार, फसल बीमा कंपनी के जिला समन्वयक अभिज्ञान सिंह, योगेश सिंह सहित लेखपाल व कानूनगो भी मौजूद रहे।
