मीटर लगा और खाता खाली…यूपी में 50 लाख बिजली उपभोक्ता मुसीबत में, कैसे होगी वसूली?

उत्तर प्रदेश समाचार: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की खराबी ने लाखों बिजली उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा दी है. राज्य के कई हिस्सों में निगेटिव बैलेंस के कारण बड़े पैमाने पर बिजली कनेक्शन काट दिये गये हैं. स्थिति यह है कि उपभोक्ताओं का बिल जमा करने के बाद भी बिजली बहाल नहीं हो पा रही है. आरएमएस यानी रेवेन्यू मैनेजमेंट सिस्टम में रिचार्ज सिंक न होने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या से पूरे प्रदेश में हाहाकार मचा हुआ है और लोग लगातार शिकायतें कर रहे हैं.
बिल जमा करने के बाद भी बिजली नहीं जोड़ी जा रही है
सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई उपभोक्ताओं ने अपना बकाया बिल जमा कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद उनके कनेक्शन समय पर नहीं जोड़े गए। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है. बताया जा रहा है कि पावर कॉरपोरेशन के अधिकारी इस गंभीर समस्या पर ध्यान देने के बजाय निष्क्रिय नजर आ रहे हैं, जिससे सरकार की छवि पर भी असर पड़ रहा है.
उपभोक्ता परिषद ने उठाई आवाज
विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए विद्युत नियामक आयोग को जनाक्रोश से अवगत कराया है. उन्होंने कहा कि बरेली में होने वाली बिजली दरों की सुनवाई में यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तत्काल हस्तक्षेप कर इस समस्या का समाधान करने की मांग भी की जाएगी.
50 लाख से ज्यादा कनेक्शन काटने का दावा
अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि 14 मार्च को 50 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं का कनेक्शन काट दिया गया. इसके बाद हजारों लोगों ने बकाया बिल जमा कर दिया, लेकिन फिर भी उनकी बिजली बहाल नहीं की गयी. इस स्थिति ने लोगों को और अधिक चिंतित कर दिया है.
मुआवजा व किश्त दिलाने की मांग
उपभोक्ता परिषद ने मांग की है कि जिन उपभोक्ताओं को इस समस्या के कारण नुकसान हुआ है, उन्हें स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस एक्ट-2019 के तहत मुआवजा दिया जाना चाहिए। साथ ही जिन उपभोक्ताओं के प्रीपेड मीटर में बैलेंस माइनस हो गया है, उन्हें पोस्टपेड उपभोक्ता माना जाए और किश्तों में भुगतान की सुविधा दी जाए। इस पूरे मामले ने एक बार फिर बिजली व्यवस्था और तकनीकी खामियों पर सवाल खड़े कर दिये हैं. फिलहाल उपभोक्ता समाधान की उम्मीद कर रहे हैं और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
