राजस्व वसूली में फिसड्डी 10 जिलों के आबकारी अधिकारियों पर होगी कार्रवाई, मंत्री नितिन अग्रवाल के सख्त निर्देश

लखनऊ में आबकारी विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान प्रदेश के आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने बड़ी कार्रवाई के संकेत दिये हैं. राजस्व वसूली में पीछे चल रहे 10 जिलों के आबकारी अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. यह बैठक गन्ना संस्थान डालीबाग, लखनऊ में आयोजित की गई। बैठक में विभाग के कामकाज एवं राजस्व स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गयी. मंत्री ने साफ कहा कि जिन जिलों में लक्ष्य के अनुरूप राजस्व नहीं आ रहा है, वहां के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जायेगी. उन्होंने इस संबंध में आबकारी आयुक्त को सख्त कार्रवाई करने के भी निर्देश दिये।
63 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य, अब तक इतनी हुई वसूली
सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के लिए उत्पाद विभाग को 63 हजार करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य दिया है. विभागीय आंकड़ों के मुताबिक फरवरी माह तक कुल 50,585 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है. बैठक में मंत्री ने सभी जिला उत्पाद अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में राजस्व वसूली में तेजी लाने और निर्धारित लक्ष्य को हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया. उन्होंने यह भी कहा कि कम वसूली वाले जिलों के अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी, ताकि विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार हो सके.
मंत्री के निशाने पर इन जिलों के अधिकारी हैं
बैठक में जिन जिलों में वसूली कम पाई गई, वहां के अधिकारियों को विशेष तौर पर चेतावनी दी गई। इनमें कानपुर नगर, आगरा और मेरठ जैसे बड़े जिले शामिल हैं. इसके अलावा बिजनौर, लखनऊ और बुलंदशहर के अधिकारियों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. इस सूची में हाथरस, मुरादाबाद, अलीगढ और बरेली जिले भी शामिल हैं. मंत्री ने साफ कहा कि इन जिलों के अधिकारी जल्द से जल्द राजस्व बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठायें, अन्यथा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी.
अवैध शराब पर सख्ती और लाइसेंस नवीनीकरण में राहत
समीक्षा बैठक के दौरान अवैध शराब के मुद्दे पर भी विशेष जोर दिया गया. मंत्री ने अधिकारियों को कच्ची, मिलावटी और चुलाई शराब के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया. इसके अलावा पड़ोसी राज्यों से आने वाली अवैध शराब पर भी पूरी तरह से रोक लगाने के लिए कदम उठाए गए हैं. इसके अलावा शराब और भांग की दुकानों के लाइसेंस नवीनीकरण के लिए एक सप्ताह की अतिरिक्त राहत देने का भी निर्णय लिया गया है, ताकि व्यापारी अपनी प्रक्रिया समय पर पूरी कर सकें.
