राहुल गांधी की नागरिकता पर नया विवाद…इलाहाबाद HC ने केंद्र से मांगी पूरी रिपोर्ट, सुनवाई 19 मार्च तक टली

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से जुड़ा दोहरी नागरिकता विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है. इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने केंद्र सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है. कोर्ट ने पूछा है कि राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता से जुड़ी शिकायत पर केंद्र ने अब तक क्या कार्रवाई की है. यह निर्देश सोमवार को सुनवाई के दौरान दिया गया. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च तक के लिए टाल दी है. इस मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है और अब सबकी नजरें केंद्र सरकार की रिपोर्ट पर टिकी हैं.
शिकायत की सुनवाई के दौरान कोर्ट के निर्देश
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस राजीव सिंह ने यह निर्देश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जो कर्नाटक बीजेपी कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर ने दायर की है. याचिकाकर्ता ने लखनऊ की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट के 28 जनवरी के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी. विशेष अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि उसे नागरिकता से जुड़े मामलों पर फैसला लेने का अधिकार नहीं है.
विभिन्न कानूनों के तहत लगाए गए आरोप
हाई कोर्ट में दायर याचिका में विग्नेश शिशिर ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पूरे मामले की विस्तृत जांच की मांग की है. याचिका में राहुल गांधी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के कई प्रावधानों के तहत आरोप लगाया गया है। उनका कहना है कि कथित दोहरी नागरिकता के मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए.
केंद्र सरकार से मांगा रिकार्ड
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील राज कुमार सिंह से पूछा कि राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता से जुड़ी शिकायत पर केंद्र ने क्या कार्रवाई की है. इसके साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस विवाद से जुड़े सभी रिकॉर्ड केंद्रीय गृह मंत्रालय को पेश किए जाएं. कोर्ट का कहना है कि सभी दस्तावेज सामने आने के बाद ही मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
मामला रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर कर दिया गया
यह परिवाद पहले रायबरेली की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट में दायर किया गया था। बाद में याचिकाकर्ता की मांग पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने 17 दिसंबर को मामले को रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर कर दिया. इसके बाद 28 जनवरी को लखनऊ की स्पेशल एमपी/एमएलए कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी. अब उसी फैसले को चुनौती देते हुए मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है. केंद्र सरकार की रिपोर्ट मिलने के बाद जस्टिस राजीव सिंह की एकल पीठ 19 मार्च को मामले की अगली सुनवाई करेगी.
