लखनऊ में 24 घंटे में चार हत्याएं, हाईटेक पुलिसिंग के दावों की उड़ी धज्जियां!

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 24 घंटे के अंदर चार हत्याओं की वारदात ने पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. लगातार हो रही इन घटनाओं से साफ हो गया है कि बदमाशों के मन से पुलिस का खौफ कम होता नजर आ रहा है. पहले निगोहां और मोहनलालगंज इलाके में दो अलग-अलग हत्याएं हुईं और उसके बाद मां-बेटे की हत्या की वारदात सामने आई। इन सनसनीखेज मामलों ने हाईटेक पुलिसिंग और सीसीटीवी निगरानी के दावों की भी पोल खोल दी है. शहर और ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोग अब चिंता जताने लगे हैं.
निगोहां में पति ने पत्नी की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी
पहली घटना लखनऊ के निगोहां थाना क्षेत्र के शेखन खेड़ा गांव में हुई. यहां 44 वर्षीय राजेश्वरी की उसके पति राजेश रावत ने कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी। इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. पुलिस इस मामले की जांच में जुटी ही थी कि एक और बड़ी घटना सामने आ गई.
मोहनलालगंज में बेटे ने पिता की पीट-पीटकर हत्या कर दी
निगोहां की घटना के बाद एक और दिल दहला देने वाली घटना मोहनलालगंज क्षेत्र के खुजेहटा गांव में हुई। यहां 45 वर्षीय रामकरन की उसके ही 17 वर्षीय बेटे लव कुश ने लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी. पिता की मौत के बाद पूरे गांव में माहौल तनावपूर्ण हो गया. पुलिस अभी इन दोनों मामलों में आरोपियों को पकड़ भी नहीं पाई थी कि एक और बड़ी घटना सामने आ गई.
बदमाशों ने मां-बेटे की गला रेतकर हत्या कर दी
तीसरी और चौथी हत्या मोहनलालगंज इलाके में ही हुई. यहां बदमाशों ने 50 साल की रेशमा बानो और उसके 18 साल के बेटे शादाब की गला दबाकर हत्या कर दी। यह घटना सिसेंडी गांव की बताई जा रही है. मां-बेटे की हत्या के बाद इलाके में दहशत फैल गई और लोगों में सुरक्षा को लेकर डर का माहौल बन गया.
सीसीटीवी और हाईटेक पुलिसिंग के दावे सवालों के घेरे में हैं
लगातार हुई इन चार हत्याओं के बाद पुलिस की हाईटेक व्यवस्था और सुरक्षा के दावों पर सवाल उठ रहे हैं. राजधानी में अपराध रोकने के लिए हर इलाके को सीसीटीवी कैमरे से लैस करने की बात कही गयी थी. अधिकारियों ने सभी थानेदारों को भी अपने-अपने क्षेत्र में कैमरे लगवाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद कई जगहों पर कैमरे लगाए गए, लेकिन इन घटनाओं के बाद ऐसा लग रहा है कि ज्यादातर कैमरे ठीक से काम नहीं कर रहे हैं. लोग यह भी कह रहे हैं कि कैमरे होने के बावजूद अपराधी वारदातों को अंजाम देकर आसानी से भाग जाते हैं और पुलिस को कोई सुराग नहीं मिल पाता है.
