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भगवान, मुझे मेरी पत्नी से मुक्ति दिला दो…मन्नत पूरी होते ही पति ने की 9KM की प्रार्थना यात्रा, बोला- मुझे नर्क से मुक्ति मिल गई

उत्तर प्रदेश समाचार: बस्ती जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है, जिसने शादी और रिश्तों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है. आमतौर पर शादी को सात जन्मों का बंधन माना जाता है, लेकिन यहां एक पति ने अपनी पत्नी से छुटकारा पाने के लिए भगवान से प्रार्थना की। जब उनकी इच्छा पूरी हुई तो उन्होंने 9 किलोमीटर लंबी साष्टांग यात्रा कर इसे पूरा किया। इस घटना से पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है और लोग तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं.

शादी के दो साल में रिश्ते खराब हो गए
यह मामला सोनहा थाना क्षेत्र के एक गांव का है, जहां सुरेश नाम के युवक का रिश्ता शादी के दो साल बाद ही खराब हो गया. लगातार विवादों और मानसिक तनाव से तंग आकर उसने मंदिर में जाकर मन्नत मांगी। युवक ने कहा था कि अगर उसे पत्नी से छुटकारा मिल गया तो वह मंदिर में साष्टांग प्रणाम करने जाएगा।

मन्नत पूरी होने के बाद किया गया वादा
कुछ समय बाद कानूनी प्रक्रिया के जरिए युवक को अपनी पत्नी से तलाक मिल गया। इसके बाद उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने का फैसला किया. सुबह वह बिना कुछ खाए-पिए अपने गांव से भानपुर स्थित मां बैदवा समय माता मंदिर की यात्रा पर निकल पड़े। ये यात्रा करीब 9 किलोमीटर लंबी थी और उन्होंने हर कदम पर माथा टेकते हुए मंदिर तक का सफर तय किया.

ग्रामीणों में भक्ति का माहौल बन गया।
इस सफर में युवक अकेला नहीं था. उनके पीछे उनके माता-पिता और गांव के कई लोग गाजे-बाजे के साथ चल रहे थे. माता के जयकारों के बीच यह यात्रा किसी धार्मिक आयोजन जैसी लग रही थी। जहां आमतौर पर रिश्ता टूटने पर दुख होता है, वहीं यहां इस घटना को अलग तरह से देखा गया और लोग इसमें शामिल हो गए।

मंदिर पहुंचकर आभार व्यक्त किया
शाम करीब छह बजे युवक मंदिर पहुंचा। उनके घुटनों में चोट लगी हुई थी और वह बहुत थके हुए थे, लेकिन उनके चेहरे पर राहत साफ़ दिखाई दे रही थी। उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना कर मां को धन्यवाद दिया. युवक ने बताया कि वह काफी समय से मानसिक परेशानी में था और अब उसे राहत मिल गई है.

समाज के लिए सोचने योग्य विषय
यह घटना आज रिश्तों में बढ़ते तनाव को दर्शाती है. जहां लोग अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र के लिए व्रत रखते हैं, वहीं इस मामले ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अब सिर्फ आस्था के सहारे ही रिश्तों के बोझ को कम किया जा सकता है.

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