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13 साल बाद मासूम को मिला न्याय…डेढ़ साल की बच्ची की हत्या करने वाले दरिंदे को उम्रकैद, प्रेम प्रसंग का बदला लेने के लिए वर्षा की दी गई बलि

मोरादाबाद समाचार: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के एक दिल दहला देने वाले मामले में 13 साल बाद न्याय मिला है। डेढ़ साल की मासूम बच्ची की हत्या के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी को दोषी करार दिया है. एडीजे-4 कोर्ट ने आरोपी मुकेश को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है और उस पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है. यह मामला साल 2013 का है, जिसने उस समय पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था और आज भी इसकी यादें लोगों के दिलों में ताजा हैं.

13 साल पुराना मामला
यह घटना मझोला थाना क्षेत्र के मानपुर नारायणपुर गांव में हुई. साल 2013 में डेढ़ साल की बच्ची वर्षा घर के बाहर खेल रही थी, तभी अचानक उसका अपहरण कर लिया गया. कुछ देर बाद उसका शव गांव के पास एक तालाब में मिला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि बच्ची की गला घोंटकर हत्या की गई है. इस घटना के बाद पूरे इलाके में डर और गुस्से का माहौल बन गया.

तीन थे आरोपी, अब एक को मिली सजा
पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को आरोपी बनाया था. इनमें से एक आरोपी की पहले ही मौत हो चुकी है, जबकि दूसरे को सबूतों के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया था. अब तीसरे आरोपी मुकेश को दोषी मानते हुए कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. साथ ही 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त सजा भी तय की गयी है.

प्रेम प्रसंग और बदले की कहानी
पुलिस जांच में पता चला कि हत्या प्रेम प्रसंग और पुरानी दुश्मनी का नतीजा है. राजू नाम के शख्स ने केस दर्ज कराया था. उनके मुताबिक, उनके भाई धर्मेंद्र और विजेंद्र की बेटी ज्योति के बीच प्रेम संबंध था। ये दोनों पहले विजेंद्र के मकान में किराएदार के तौर पर रहते थे. ज्योति की शादी हो जाने के बाद भी धर्मेंद्र उनके संपर्क में रहे। इससे विजेंद्र का परिवार नाराज था. हालात तब और बिगड़ गए जब धर्मेंद्र ज्योति को लेकर चला गया. इसी का बदला लेने के लिए आरोपी ने मासूम बच्ची को निशाना बनाया.

मासूम बच्चे को बनाया प्रतिशोध का शिकार!
24 अप्रैल 2013 को लड़की वर्षा का उसके घर के बाहर से अपहरण कर लिया गया और बाद में उसकी हत्या कर शव तालाब में फेंक दिया गया. जांच के बाद पुलिस ने विजेंद्र, मुकेश व एक अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले से पीड़ित परिवार को थोड़ी राहत मिली है. कोर्ट के इस फैसले को न्याय की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

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