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मुजफ्फरनगर काउ सेंचुरी के लिए पूर्व मंत्री संजीव बालियान की बड़ी अपील, ग्राम प्रधानों से मांगी भूसे की सेवा

मुजफ्फरनगर जिले के मोरना क्षेत्र स्थित ब्लॉक सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रो. संजीव बालियान गोरक्षा को लेकर ग्राम प्रधानों से भावनात्मक अपील की। उन्होंने पुरकाजी क्षेत्र के तुगलकपुर कम्हेड़ा में स्थापित उत्तर प्रदेश के पहले गौ अभयारण्य के संचालन को सफल बनाने के लिए भूसे और चारे की व्यवस्था में सहयोग का आह्वान किया।

बैठक के दौरान पशु संरक्षण, चारे की उपलब्धता और सामाजिक भागीदारी जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बड़ी संख्या में ग्राम प्रधानों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस अभियान को व्यापक समर्थन का संकेत दिया।


गौ अभ्यारण्य में हजारों पशुओं के लिए चारे की चुनौती

बैठक को संबोधित करते हुए संजीव बालियान ने कहा कि तुगलकपुर कम्हेड़ा स्थित गौ अभयारण्य में बड़ी संख्या में गायों की देखभाल की जा रही है और लगातार उनके लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती बन रही है।

उन्होंने कहा कि गायों की सेवा न केवल प्रशासनिक बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। बलियान ने ग्राम प्रधानों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने गांव में किसानों और ग्रामीणों को भूसा दान करने के लिए प्रेरित करें ताकि सेंचुरी में किसी भी जानवर को चारे की कमी न हो।

उन्होंने कहा, “यह सुनिश्चित करना हमारा मानवीय कर्तव्य है कि कोई भी जानवर भूख के कारण पीड़ित न हो।”


ग्राम प्रधानों से जनभागीदारी बढ़ाने की अपील

पूर्व मंत्री ने कहा कि अगर हर गांव से थोड़ा-थोड़ा सहयोग मिले तो हजारों पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था आसानी से की जा सकती है. उन्होंने ग्राम प्रधानों को ग्राम स्तर पर अभियान चलाने और किसानों को इस नेक कार्य में शामिल करने की सलाह दी।

बैठक में मौजूद कई प्रधानों ने भी इस पहल का समर्थन किया और आश्वासन दिया कि वे अपने क्षेत्रों में भूसा एकत्र करने की व्यवस्था करेंगे.


ब्लॉक प्रमुख और भाजपा नेताओं ने भी समर्थन किया

कार्यक्रम में उपस्थित प्रखंड प्रमुख मो अनिल राठी कहा कि गोरक्षा भारतीय संस्कृति एवं सामाजिक मूल्यों से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि सभी ग्राम प्रधान एवं क्षेत्रवासी एकजुट होकर इस अभियान को सफल बनायें।

भाजपा क्षेत्रीय मंत्री मो अमित राठी साथ ही समाज के सक्षम एवं संपन्न लोगों से इस कार्य में आगे आने की अपील की. उन्होंने कहा कि गौ सेवा न केवल धार्मिक आस्था है बल्कि सामाजिक दायित्व भी है।


प्रशासनिक व्यवस्था पर भी चर्चा की गयी

बैठक के दौरान गौ अभ्यारण्य के संचालन, चारे के भंडारण और ग्राम स्तर पर समन्वय से संबंधित व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई.

इस अवसर पर खंड विकास अधिकारी विशाखा, एडीओ पंचायत योगेश्वर दत्त त्यागी, वरिष्ठ सहायक योगेन्द्र सिंह व सामाजिक कार्यकर्ता विनोद शर्मा सहित कई अधिकारी व गणमान्य लोग मौजूद रहे।

अधिकारियों ने कहा कि यदि सामाजिक सहयोग मिलता रहेगा तो सेंचुरी का संचालन बेहतर तरीके से किया जा सकता है।


दर्जनों ग्राम प्रधानों ने सहयोग का आश्वासन दिया

बैठक में क्षेत्र के कई ग्राम प्रधान मौजूद रहे। इनमें सर्वेंद्र राठी, दिनेश राठी, नरेंद्र प्रधान, राजकुमार, आबिद, शाहनवाज, संजय, शौकीन, मोनू और तरूण प्रधान प्रमुख रूप से शामिल रहे।

सभी ग्राम प्रधानों ने एक स्वर में कहा कि वे अपने-अपने गांव से गौ अभयारण्य के लिए पर्याप्त भूसे की व्यवस्था करने का प्रयास करेंगे। कई प्रधानों ने किसानों के साथ बैठक कर इस अभियान को गांव स्तर तक ले जाने की बात कही.


गौ संरक्षण को लेकर बढ़ रही सामाजिक भागीदारी

हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश में गोरक्षा को लेकर कई स्तरों पर अभियान चलाए जा रहे हैं. गौ अभयारण्यों और गौशालाओं के संचालन में सामाजिक भागीदारी बढ़ाने पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि सिर्फ सरकारी संसाधनों के भरोसे इतनी बड़ी संख्या में मवेशियों की देखभाल करना चुनौतीपूर्ण है. ऐसे में स्थानीय समाज और ग्रामीणों का सहयोग अहम भूमिका निभा सकता है.


ग्रामीण इलाकों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर

बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कई बार किसानों के पास अतिरिक्त भूसा होने के बावजूद उचित समन्वय के अभाव में उसका उपयोग नहीं हो पाता है. इसलिए ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को गौ सेवा से जोड़ने की जरूरत है.

वक्ताओं ने कहा कि यदि हर गांव से नियमित सहयोग मिले तो गौ अभयारण्य में पशुओं के भोजन व देखभाल की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है.


काऊ सेंचुरी को लेकर क्षेत्र में सकारात्मक माहौल

तुगलकपुर कम्हेड़ा स्थित गौ अभ्यारण्य को लेकर क्षेत्र में सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों का मानना ​​है कि अगर प्रशासन और समाज मिलकर काम करें तो गौ संरक्षण की दिशा में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं.

बैठक के दौरान कई लोगों ने भविष्य में भी ऐसे सामाजिक अभियान बड़े पैमाने पर चलाने की जरूरत जतायी.


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