गाजियाबाद रजिस्ट्री घोटाला: 3700 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा, आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रजिस्ट्री सिस्टम से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है. आयकर विभाग की टीमों ने सब-रजिस्ट्रार प्रथम (एसआरओ-1) कार्यालय में सर्वे किया, जिसमें प्रारंभिक जांच में करीब 3700 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ. इससे पहले कानपुर और नोएडा में भी इसी तरह की अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं. अधिकारियों को संदेह है कि इस मामले में काले धन और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया है.

फर्जी और डुप्लीकेट पैन नंबर का खेल
जांच में पता चला कि उपपंजीयक कार्यालय में कई वर्षों से नियमों की अनदेखी की जा रही थी। प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त के दौरान बड़ी संख्या में डुप्लीकेट और फर्जी पैन नंबर का इस्तेमाल किया जाता था। कई मामलों में पैन नंबर गलत दर्ज किए गए तो कुछ जगहों पर एक ही पैन कार्ड का इस्तेमाल कई अलग-अलग लोगों की रजिस्ट्री में किया गया. यह सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता और हेराफेरी की ओर इशारा करता है.

आयकर विभाग की गोपनीय जांच
यह कार्रवाई गुपचुप तरीके से कानपुर निदेशालय की निगरानी में की गई। टीम का नेतृत्व संयुक्त निदेशक विजय सिंह ने किया. वहीं, गाजियाबाद आयकर अधिकारी सुधीर कुमार और उनकी टीम मौके पर पहुंची और अभिलेखों की गहनता से जांच की। जांच के दौरान डिजिटल डेटा, रजिस्ट्री के मूल दस्तावेज और एसएफटी (स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन) रिपोर्ट कब्जे में ली गई है, ताकि पूरे नेटवर्क की सच्चाई सामने आ सके।

बिल्डर और भू-माफिया जांच के घेरे में
आयकर विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि किन बिल्डरों और भू-माफियाओं ने फर्जी पैन नंबर का इस्तेमाल कर संपत्तियां खरीदीं। साथ ही इस बात की भी जांच की जा रही है कि इस पूरे खेल में और कौन लोग शामिल हैं. सूत्रों के मुताबिक, गाजियाबाद सब-रजिस्ट्रार कार्यालय को पहले ही डेटा सही करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन लापरवाही जारी रही। अब राज्य के अन्य जिलों के रजिस्ट्री कार्यालय भी जांच के दायरे में आ सकते हैं.

स्टांप विभाग ने इनकार कर दिया
इस मामले पर स्टांप विभाग के एआईजी पुष्पेंद्र कुमार ने घोटाले की खबरों को खारिज किया है. उन्होंने कहा कि यदि पंजीकरण राशि 30 लाख रुपये से अधिक है, तो जानकारी एनएसडीएल पोर्टल पर साझा की जाती है। जिनके पास पैन कार्ड नहीं है उनसे फॉर्म-60 भरवाया जाता है और पूरे सिस्टम को ओटीपी आधारित वेरिफिकेशन से जोड़ा जाता है.

आगे भी सख्त कार्रवाई की तैयारी
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ आयकर अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस मामले ने रजिस्ट्री व्यवस्था की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.

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