परंपरा से कोई समझौता नहीं होगा…संभल मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त रुख, जानिए पूरा मामला

इलाहाबाद उच्च न्यायालय: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि किसी भी व्यक्ति के निजी परिसर में प्रार्थना या धार्मिक आयोजन पर रोक नहीं लगाई जा सकती, चाहे वह किसी भी धर्म को मानने वाला हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिस जगह को मस्जिद बताया जा रहा है वह फिलहाल मस्जिद नहीं है. इस मामले में कोर्ट ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर सख्त टिप्पणी की. यह फैसला धार्मिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक जिम्मेदारी दोनों के लिए अहम माना जा रहा है.

निजी परिसर में प्रार्थना करने का अधिकार
उच्च न्यायालय की दो न्यायाधीशों की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन शामिल थे, ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को अपने निजी परिसर में पूजा या नमाज अदा करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि इस अधिकार पर कोई रोक नहीं लगाई जा सकती.

मस्जिद होने पर उठे सवाल!
कोर्ट ने मामले में पेश की गई तस्वीरों को देखने के बाद कहा कि जिस ढांचे को मस्जिद बताया जा रहा है वह असल में दो मंजिला मकान है और उसे मस्जिद नहीं कहा जा सकता. हालांकि, यह भी माना गया कि वहां पहले भी नमाज पढ़ी जा चुकी है, इसलिए नमाज पढ़ने पर कोई रोक नहीं होगी।

प्रशासन पर सख्त टिप्पणी
इस मामले में संभल के पुलिस अधीक्षक (एसपी) और जिलाधिकारी (डीएम) ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए नमाजियों की संख्या 20 तक सीमित कर दी थी. इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर अधिकारी कानून का राज स्थापित नहीं कर सकते तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए या ट्रांसफर करा लेना चाहिए.

याचिकाकर्ता और सरकार का पक्ष
संभल निवासी मुनाजिर खान ने याचिका दायर कर कहा था कि रमजान के दौरान बड़ी संख्या में नमाजियों को आने से रोका गया था. उन्होंने यह भी बताया कि 1995 में उनके बाबा ने इस जगह को मस्जिद के तौर पर बनवाया था. वहीं, राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि वह किसी की निजी संपत्ति पर धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप नहीं करती है और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा प्रदान करती है.

विविधता पर कोर्ट की टिप्पणी
हाई कोर्ट ने भारत की विविधता की सराहना करते हुए अपने आदेश में कहा कि 1.4 अरब की आबादी वाले इस देश की सुंदरता इसकी धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई विविधता में निहित है, जहां विभिन्न धर्म और संस्कृतियां सदियों से एक साथ रह रही हैं।

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