वाराणसी एमपी-एमएलए कोर्ट का बड़ा फैसला, 24 साल पुराने टकसाल सिनेमा शूटआउट मामले में सभी आरोपी बरी

वाराणसी: पूर्वांचल की राजनीति से जुड़े एक चर्चित और हाईप्रोफाइल मामले में आखिरकार बड़ा फैसला सामने आ गया है. वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 24 साल पुराने टकसाल सिनेमा शूटआउट मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. इस मामले में विधायक अभय सिंह, एमएलसी विनीत सिंह समेत कुल 7 आरोपियों को बरी करार दिया गया. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे आरोपों को साबित नहीं कर सका, इसलिए आरोपियों को ‘संदेह का लाभ’ दिया गया। इस फैसले के साथ ही लंबे समय से चल रहे इस चर्चित मामले का अंत हो गया.
सबूतों के अभाव में कोर्ट का फैसला
इस मामले में कई गवाह कोर्ट में पेश किए गए, लेकिन उनके बयान इतने मजबूत नहीं थे कि आरोप साबित हो सकें. कोर्ट ने साफ कहा कि पेश किए गए सबूत पर्याप्त नहीं थे और आरोप पुख्ता तौर पर साबित नहीं हो सके. इस आधार पर सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया.
फैसले के दिन कोर्ट में कड़ी सुरक्षा
फैसले के दिन कोर्ट परिसर में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया और प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट पर नजर आया. वहीं, कोर्ट परिसर के बाहर आरोपियों के समर्थकों की भारी भीड़ भी जमा हो गई.
समर्थकों में खुशी की लहर
कोर्ट के फैसले के बाद विधायक अभय सिंह के समर्थकों में खुशी का माहौल है. फैसले के बाद समर्थकों ने इसे न्याय की जीत बताया और एक दूसरे को बधाई दी.
2002 में एक सनसनीखेज हमला हुआ था
यह मामला 4 अक्टूबर 2002 का है, जब टकसाल सिनेमा के पास सनसनीखेज हमला हुआ था. बताया गया कि बोलेरो सवार हमलावरों ने धनंजय सिंह पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी. इस हमले में धनंजय सिंह, उनके गनर और ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गए. हमलावरों पर अत्याधुनिक हथियारों से फायरिंग करने का आरोप है.
मामला राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से जुड़ा था
इस घटना का कारण अभय सिंह और धनंजय सिंह के बीच लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी को माना जा रहा है. इस मामले को पूर्वांचल की राजनीति में वर्चस्व की लड़ाई के तौर पर भी देखा गया था. अब कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इसके असर को लेकर चर्चा तेज हो गई है और सभी की नजरें भविष्य की परिस्थितियों पर टिकी हैं.
(रिपोर्ट: संदीप शुक्ला, लखनऊ)
