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CM योगी की चेतावनी के बावजूद नोएडा में भड़की हिंसा, क्या अफसरों पर गिरेगी गाज?

सीएम योगी आदित्यनाथ: उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी नोएडा सोमवार को हिंसा की चपेट में आ गई. वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर चल रहे श्रमिक आंदोलन ने अचानक हिंसक रूप ले लिया, जिसमें कई जगहों पर आगजनी, तोड़फोड़ और पथराव की घटनाएं सामने आईं. इस हिंसा में सैकड़ों गाड़ियां जला दी गईं और कई पुलिसकर्मी घायल हो गए. सबसे बड़ी बात यह है कि इससे ठीक एक दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्च स्तरीय बैठक कर सभी जिलों को अलर्ट कर दिया था और श्रमिकों और कंपनियों के बीच बातचीत कराने के स्पष्ट निर्देश दिए थे, फिर भी स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई.

सीएम योगी की हाई लेवल मीटिंग, दिए गए सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार रात लखनऊ में एक अहम बैठक बुलाई थी. इस बैठक में श्रम मंत्री, औद्योगिक विकास मंत्री, गृह विभाग के प्रधान सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. बैठक में पिछले चार दिनों से नोएडा में चल रहे श्रमिक आंदोलन पर गंभीर चिंता व्यक्त की गयी. सीएम ने आठ जिलों के जिलाधिकारियों को हर हाल में अलर्ट रहने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए थे. उन्होंने यह भी कहा कि श्रमिकों और उद्योगपतियों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाना चाहिए ताकि किसी भी तरह का कोई टकराव न हो.

सोमवार को हिंसा भड़क गई, गाड़ियां जल गईं और पुलिसकर्मी घायल हो गए
सीएम की चेतावनी के बावजूद सोमवार सुबह हालात बिगड़ गए. वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर नोएडा के सेक्टर-62, सेक्टर-63 और आसपास के इलाकों में कर्मचारियों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया. देखते ही देखते प्रदर्शन हिंसक हो गया. प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर आग लगा दी और 150 से ज्यादा गाड़ियां फूंक दीं. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

सरकार का राहत पैकेज और मजदूरों की बड़ी मांग
हिंसा के बीच सरकार ने देर रात मजदूरों के लिए राहत पैकेज का ऐलान किया. विभिन्न श्रेणियों में अधिकतम 3000 रुपये तक वेतन वृद्धि का प्रस्ताव किया गया है. लेकिन कर्मचारियों की मुख्य मांग अब भी साफ है कि उन्हें कम से कम 20,000 रुपये मासिक वेतन दिया जाए. उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और लंबे कामकाजी घंटों को देखते हुए यह न्यूनतम आवश्यकता है.

प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल, जांच के आदेश
नोएडा देश के प्रमुख औद्योगिक और आईटी केंद्रों में से एक है, जहां बड़ी-बड़ी कंपनियां और विनिर्माण इकाइयां स्थित हैं। ऐसे में इस तरह की हिंसा ने पूरे देश में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन ने समय रहते कदम उठाया? क्या ख़ुफ़िया जानकारी विफल रही या निर्देशों का ठीक से पालन नहीं किया गया? सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के संकेत दिए हैं और हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है. फिलहाल नोएडा में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है और वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं.

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