अयोध्या को विश्व धरोहर शहर बनाने की मांग तेज, यूनेस्को सूची में शामिल कराने के लिए सौंपा ज्ञापन

अयोध्या को “भारत की धार्मिक राजधानी” के रूप में स्थापित करने और इसे विश्व धरोहर शहरों की सूची में शामिल करने की मांग तेज हो गई है। रेनेसां इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष आलोक सिंह राणा ने इस संबंध में मंडलायुक्त राजेश कुमार से मुलाकात की और एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा. इस ज्ञापन में कहा गया है कि योजनाबद्ध और सांस्कृतिक दृष्टिकोण के साथ अयोध्या के तेजी से विकास को आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि शहर को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सके.
तेजी से विकास हो रहा है, लेकिन योजना की जरूरत है
आलोक सिंह राणा ने कहा कि अयोध्या पहले से ही वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में जाना जाता है. यहां राम पथ, भक्ति पथ, धर्म पथ, श्री राम जन्मभूमि पथ, आस्था पथ और भारत पथ जैसे कई बड़े गलियारे विकसित किए जा रहे हैं। उनका मानना है कि इन सभी परियोजनाओं को सिर्फ बुनियादी ढांचे के रूप में नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभवों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
‘लिविंग रामायण एक्सपीरियंस सिटी’ का प्रस्ताव
राणा ने सुझाव दिया कि अयोध्या को “लिविंग रामायण एक्सपीरियंस सिटी” के रूप में विकसित किया जाए। इसके तहत घाटों का पुनरोद्धार, आधुनिक सुविधाएं, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और शहर के विस्तार को एक साथ जोड़कर काम किया जाना चाहिए. इससे विकास और परंपरा के बीच संतुलन बना रहेगा।
विरासत और आधुनिकता का संतुलन जरूरी है
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि शहर में होने वाले नये निर्माण कार्यों में एक समान फसाड डिजाइन लागू किया जाये. साथ ही लाइटिंग, साइनेज, मूर्तिकला और सार्वजनिक स्थानों को रामायण थीम से जोड़ा जाना चाहिए। इससे शहर की पहचान और मजबूत होगी तथा प्राचीन विरासत को भी सम्मान मिलेगा।
यूनेस्को सूची में शामिल करने की मांग
आलोक सिंह राणा ने प्रशासन से अयोध्या को यूनेस्को की विश्व धरोहर शहर की सूची में शामिल करने के लिए औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक तौर पर अस्थायी सूची में अयोध्या का नाम शामिल किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण और पहचान मिल सके.
(रिपोर्ट:अनूप कुमार अयोध्या)
