उत्तराखंड: नाबालिगों के बीच सहमति से बने संबंधों के मामले में क्या हो नीति, कोर्ट करेगा विचार – उत्तराखंड हाई कोर्ट ने कहा, नाबालिगों की सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी
किशोर को घर लाया, अलमारी में छिपाया, संबंध बनाए, दोनों की उम्र 15 साल थी। उत्तराखंड हाईकोर्ट के सामने एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला विचारार्थ आया। मामले में कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि ऐसे दुर्लभ मामलों में न्यायिक व्यवस्था की क्या भूमिका होनी चाहिए. फिलहाल कोर्ट ने किशोर प्रेम प्रसंग से जुड़े इस अहम मामले में राहत देते हुए निचली अदालत की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है. इस मामले में कोर्ट ने 15 साल के दो नाबालिगों के बीच सहमति से बने रिश्ते को संवेदनशील मानते हुए उनकी सुरक्षा और उनकी स्वायत्तता को मान्यता देने के बीच संतुलन बनाने पर विचार करने की जरूरत जताई.
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक मेहरा के समक्ष हुई। मामले के मुताबिक, पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उनकी नाबालिग बेटी का अपहरण कर लिया है, जिसके बाद पुलिस ने जांच की और आरोप पत्र दायर किया. हालांकि, आरोपी पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि दोनों किशोरों की उम्र करीब 15 साल है और वे पिछले चार साल से दोस्त हैं.
आरोपी की ओर से कहा गया कि पीड़िता ने पहले अपने बयान में शारीरिक संबंधों से इनकार किया था, लेकिन मजिस्ट्रेट के सामने दिए बयान में उसने माना कि वह खुद आरोपी के संपर्क में रही और दोनों के बीच सहमति से संबंध बने थे. मेडिकल रिपोर्ट में भी जबरदस्ती का कोई सबूत नहीं मिला. याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि किशोर को संप्रेक्षण गृह में रखने से उसके भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए मामले में नरमी बरती जानी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि सहमति से बने किशोर संबंधों में पीड़ित के बयान को महत्व दिया जाना चाहिए और ऐसे मामलों में न्यायिक प्रणाली का लक्ष्य नाबालिगों की सुरक्षा और कुछ संदर्भों में उनकी स्वायत्तता को मान्यता देने के बीच संतुलन बनाना होना चाहिए। यहां उम्र एक महत्वपूर्ण कारक है. कोर्ट ने मामले में प्रतिवादी को नोटिस जारी करते हुए किशोर न्याय बोर्ड देहरादून में लंबित कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है.
किशोर को घर लाया, अलमारी में छिपाया और संबंध बनाए
मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए गए अपने बयान में पीड़िता ने स्वीकार किया कि वे पिछले चार साल से दोस्त थे। उसने स्वीकार किया कि वह आवेदक के घर गई, उसे अपने घर बुलाया और उसे अपनी अलमारी में छिपा दिया। उसने उसे खाना दिया था और यह भी स्वीकार किया था कि उनके बीच शारीरिक संबंध बने थे, जो सहमति से बने थे।
