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चारधाम यात्रा: 22 अप्रैल को खुलेंगे तुंगनाथ के कपाट और 21 मई को खुलेंगे मध्यमहेश्वर के कपाट, वैशाखी के पर्व पर तारीख की घोषणा – 22 अप्रैल को खुलेंगे तुंगनाथ के कपाट रुद्रप्रयाग चारधाम यात्रा 2026 उत्तराखंड समाचार

भगवान तुंगनाथ के कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे। आज मंगलवार को वैसाखी के पावन पर्व पर भगवान तुंगनाथ के पुजारी विजय भारत मैठाणी एवं मंदिर समिति के ग्रामीणों की उपस्थिति में कपाट खुलने की तिथि की घोषणा की गई।

20 अप्रैल को भगवान की चल प्रतिमा शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कू से प्रस्थान करेगी और पुंदखी नामक स्थान पर पूजा-अर्चना के बाद रात्रि विश्राम भूतनाथ मंदिर में करेगी। 21 अप्रैल को सुबह करीब 11 बजे चल विग्रह डोली भूतनाथ मंदिर से प्रस्थान करेगी और पाब गांव, चालियाखोड़, बनियाकुंड होते हुए रात्रि विश्राम के लिए अपने दूसरे पड़ाव चोपता पहुंचेगी।

22 अप्रैल को प्रातः 08 बजे चोपता से अपने ग्रीष्मकालीन गद्दीस्थल तुंगनाथ धाम के लिए प्रस्थान करेगी तथा प्रातः 11 बजे भगवान तुंगनाथ जी की चल विग्रह डोली के पहुंचने एवं पूजा-अर्चना के पश्चात प्रातः 11 बजे इसे आम श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोल दिया जायेगा।

21 मई को खुलेंगे मध्यमहेश्वर के कपाट

बैसाखी के पर्व पर पंचकेदार गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में द्वितीय केदार भगवान मध्यमहेश्वर के कपाट खोलने की तिथि घोषित कर दी गई। इस यात्रा अवधि के लिए द्वितीय केदार भगवान मध्यमहेश्वर धाम के कपाट 21 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिये जायेंगे। वहीं, मां यमुना के शीतकालीन प्रवास खरसाली गांव स्थित गीठ पट्टी के 12 गांवों के आराध्य देव सोमेश्वर महाराज के कपाट विधि-विधान और विशेष पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं.

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गौरीकुंड में मां गौरी माई मंदिर के कपाट खुले.

केदारनाथ यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव गौरीकुंड में मां गौरी माई मंदिर के कपाट सुबह आठ बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं. इस दौरान भक्तों ने मां गौरी का आशीर्वाद लिया। वैसाखी के पावन पर्व की सुबह गौरी गांव के पुजारी ने पूजा-अर्चना के बाद माता की चढ़ाई गई मूर्तियों को एक बर्तन में रखा और गांव से गौरीकुंड स्थित गौरीमाई मंदिर में ले आए। आठ बजे मंदिर पहुंचकर कुल पुरोहित, मंदिर समिति व हक हकूकधारियों की उपस्थिति में मंदिर के दरवाजे छह माह के लिए श्रद्धालुओं के लिए खोल दिये गये. मंदिर के मुखिया संपूर्णानंद गोस्वामी ने बताया कि सुबह पूजा के बाद माता की अर्पित प्रतिमाओं को गौरी गांव के मंदिर से गौरीकुंड गौरीमाई मंदिर लाया गया।

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