उत्तरकाशी: नेलांग-कैलाश मानसरोवर कॉरिडोर की मांग, देशभर से संतों ने भारत-चीन सीमा पर पहुंचकर लिया संकल्प

नेलांग घाटी से कैलाश मानसरोवर तक के पौराणिक मार्ग को खोलने के लिए देश के विभिन्न राज्यों और गंगोत्री धाम से आए संतों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों ने कैलाश मुक्त यात्रा के तहत संकल्प लिया। समुद्र तल से करीब साढ़े ग्यारह हजार फीट की ऊंचाई पर शिव-पार्वती शिखर की तलहटी में स्थित नेलांग में गंगा पूजन के संकल्प के साथ नेलांग-कैलाश मानसरोवर मार्ग खोलने का प्रस्ताव पारित किया गया। यह प्रस्ताव राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को सौंपा जाएगा और नेलांगाग-जादुंग-कैलाश मानसरोवर कॉरिडोर बनाने की मांग की जाएगी.

शनिवार को पहली बार शुरू हुई कैलाश मुक्ति यात्रा के तहत साधु समाज और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोग काशी विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक और गंगोत्री दर्शन के बाद भारत-चीन सीमा पर स्थित नेलांग पहुंचे। यहां शिव-पार्वती शिखर की तलहटी में स्थित लाल देवता परिसर में विशेष पूजा-अर्चना कर कैलाश को मुक्त कराने का संकल्प लिया गया। यात्रा का नेतृत्व कर रही साध्वी रेणुका गुरु मां ने कहा कि प्राचीन काल में कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए संत गंगोत्री से नेलांग होते हुए अंतिम सीमा पर स्थित जादुंग और झेलुखागा मार्ग से तिब्बत जाते थे।

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गंगोत्री से पशुपतिनाथ मंदिर तक जाने वाला जल इसी मार्ग से जाता था। लेकिन तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद ये रास्ता बंद कर दिया गया. कैलाश मानसरोवर तक पहुंचने के लिए यह मार्ग अन्य मार्गों की तुलना में आसान है। क्योंकि इस रास्ते का इस्तेमाल भारत-तिब्बत व्यापार के लिए किया जाएगा. उन्होंने बताया कि यह अभियान मां गंगा के सानिध्य में शुरू किया गया है। नेलांग-कैलाश मानसरोवर कॉरिडोर की मांग पूरी होने तक इसे जारी रखा जाएगा। कहा कि गंगा पूजन के साथ लिये गये संकल्प के साथ ही आज लगभग 100 संतों एवं आरएसएस के लोगों द्वारा इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया गया है. इस विषय पर गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत चल रही है. इसके साथ ही राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रस्ताव सौंपकर चीन सरकार से बातचीत के साथ ही नेलांग-कैलाश मानसरोवर कॉरिडोर की स्थापना की मांग की जाएगी.

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