मुजफ्फरनगर: तैनात होंगे 98 आपदा मित्र, नालों की सफाई के सख्त निर्देश – डीएम ने विभागों को सौंपी जिम्मेदारियां
मुजफ्फरनगर संभावित बाढ़ की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है. कलक्ट्रेट परिसर स्थित जिला पंचायत सभागार में बाढ़ स्टीयरिंग ग्रुप की बैठक में विभिन्न विभागों को जिम्मेदारी सौंपकर राहत एवं बचाव कार्यों की रूपरेखा तय की गई। बैठक में जिलाधिकारी उमेश मिश्र एवं अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व गजेन्द्र कुमार ने संवेदनशील क्षेत्रों में तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की।
बैठक के दौरान स्पष्ट निर्देश दिये गये कि किसी भी परिस्थिति में जन एवं पशु हानि रोकना प्रशासन की प्राथमिकता होगी और इसके लिए सभी विभागों को समन्वय बनाकर काम करना होगा.
संवेदनशील इलाकों में बाढ़ चौकियां और आश्रय स्थल तैयार करने पर जोर
समीक्षा बैठक में बाढ़ संभावित क्षेत्रों में स्थापित किये जाने वाले बाढ़ चौकियों, राहत शिविरों एवं अस्थायी आश्रय स्थलों की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया. साथ ही स्वास्थ्य विभाग को बाढ़ के दौरान फैलने वाली संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए पहले से तैयारी सुनिश्चित करने को कहा गया.
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ आने से पहले ही सभी आवश्यक व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण ससमय पूरा कर लिया जाये, ताकि आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव हो सके.
नाले-नालियों की सफाई समय से पूरी करने के निर्देश
नगर निगम, नगर पंचायत एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जलनिकासी व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु नालों एवं नालियों की सफाई को प्राथमिकता देने के निर्देश दिये गये। प्रशासन का मानना है कि समय रहते सफाई कार्य पूरा कर लेने से काफी हद तक जलजमाव की स्थिति को रोका जा सकता है.
अधिकारियों को संभावित बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने से पहले सभी संवेदनशील क्षेत्रों में जल निकासी प्रणाली को सक्रिय और कार्यशील रखने के लिए कहा गया।
तहसील स्तर पर एसडीएम को सौंपी गई निगरानी की जिम्मेदारी
जिलाधिकारी उमेश मिश्र ने सभी उप जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में बाढ़ संबंधी तैयारियों का नियमित स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिये। यह भी सुनिश्चित करें कि राहत सामग्री समय से वितरित हो और किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही न हो।
प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्ट किया गया कि बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर राहत कार्यों में तेजी व पारदर्शिता बनाये रखना जरूरी होगा.
संभावित बाढ़ प्रभावित सड़कों का सर्वे कराया जायेगा
लोक निर्माण विभाग को प्राथमिकता के आधार पर संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया। इससे आपदा की स्थिति में यातायात व्यवस्था बनाए रखने की योजना पहले से तैयार की जा सकेगी।
प्रशासन का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि राहत और बचाव कार्य के दौरान परिवहन व्यवस्था बाधित न हो.
98 प्रशिक्षित आपदा मित्र तैनात किये जायेंगे
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व गजेंद्र कुमार ने बताया कि जिले में 98 आपदा मित्रों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है और आवश्यकता के अनुसार उनकी तैनाती की जायेगी. ये प्रशिक्षित स्वयंसेवक आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
सभी एसडीएम को अपने क्षेत्रों में गोताखोरों की सूची तैयार करने और अस्थायी पंपिंग सेट की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया।
पशुओं की सुरक्षा एवं टीकाकरण व्यवस्था पर विशेष ध्यान
बाढ़ संभावित क्षेत्रों में पशुओं के टीकाकरण, चारे की उपलब्धता एवं चिकित्सा सुविधाओं की अग्रिम व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को दिये गये। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि राहत योजनाओं में पशुधन की सुरक्षा को भी समान प्राथमिकता दी जाएगी.
स्कूलों में बच्चों को आपदा से बचाव का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
शिक्षा विभाग को स्कूलों में छात्र-छात्राओं को बाढ़, भूकंप और आग जैसी आपदाओं से बचाव के उपायों की जानकारी देने का निर्देश दिया गया. इसका उद्देश्य बच्चों में जागरूकता बढ़ाना और आपातकालीन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना है।
इस पहल से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे आपदा के समय घबराने के बजाय सुरक्षित व्यवहार अपना सकेंगे।
बैठक में कई विभागों के अधिकारी मौजूद थे
समीक्षा बैठक में एसडीएम सदर प्रवीण कुमार द्विवेदी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप कुमार, मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनुराग कुमार, डीआरडीए परियोजना निदेशक दिग्विजय नाथ, सीडीपीओ संतोष कुमार शर्मा, बीडीओ अक्सीर खान, सिंचाई विभाग के अभियंता अनस अली खान, पीडब्ल्यूडी के अधिशाषी अभियंता एसके तेवतिया, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जितेंद्र गुप्ता व राहत सहायक नासिर हुसैन समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
संभावित बाढ़ को लेकर प्रशासन की सक्रिय तैयारी से संकेत मिलता है कि जिले में पहले से ही राहत एवं बचाव कार्य आयोजित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. 98 प्रशिक्षित आपदा मित्रों की तैनाती, नालों की सफाई और विभागवार जिम्मेदारियों के आवंटन जैसे कदमों के माध्यम से आपात स्थिति में प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
