विकास या चुनावी गणित? गंगा एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन में छिपी पीएम मोदी की पॉलिटिकल इंजीनियरिंग… समझिए 2027 का रोडमैप

गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के मल्लानवा से गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने जा रहे हैं। यह सिर्फ एक बुनियादी ढांचा परियोजना का उद्घाटन नहीं है, बल्कि इसे एक बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि उद्घाटन के लिए हरदोई को ही क्यों चुना गया? जानकारों का मानना है कि इसके पीछे की वजह 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव और विभिन्न सामाजिक वर्गों को साधने की योजना है. इस कदम से पश्चिम, मध्य और पूर्वी यूपी को बड़ा संदेश देने की तैयारी है.
हरदोई को चुनने के पीछे की रणनीति
गंगा एक्सप्रेसवे का रास्ता पश्चिमी यूपी से शुरू होकर सेंट्रल यूपी से होते हुए पूर्वी यूपी तक जाता है. पश्चिमी यूपी में जाट और गुर्जर समुदाय का प्रभाव है, जबकि पूर्वी यूपी में पिछड़ा वर्ग और दलित राजनीति मजबूत मानी जाती है. जबकि सेंट्रल यूपी में आने वाले हरदोई में ब्राह्मण, ठाकुर और पिछड़ी जातियों का प्रभाव है. ऐसे में बीजेपी हरदोई से उद्घाटन कर सभी वर्गों को एक साथ लुभाने की कोशिश कर रही है.
2027 के चुनाव पर नजर
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में यह प्रोजेक्ट चुनावी लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने 2021 में शाहजहाँपुर से इस एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया था। अब हरदोई से उद्घाटन करके यह संदेश दिया जा रहा है कि विकास केवल बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि छोटे और ग्रामीण क्षेत्रों तक भी पहुँच रहा है।
भौगोलिक एवं राजनीतिक महत्व
भौगोलिक दृष्टि से हरदोई पश्चिम में मेरठ और पूर्वी यूपी में प्रयागराज के बीच स्थित है। यह लखनऊ से भी काफी नजदीक है. यहां कार्यक्रम आयोजित होने से आसपास के जिलों जैसे उन्नाव, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहाँपुर और कन्नौज के मतदाताओं पर असर पड़ सकता है।
औद्योगिक हब के रूप में नई पहचान
सरकार इस एक्सप्रेसवे को सिर्फ सड़क नहीं बल्कि बड़े औद्योगिक केंद्र के तौर पर पेश कर रही है. हरदोई जैसे जिलों में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। पीएम मोदी के यहां दौरे को युवाओं को रोजगार और उद्योग के नए अवसरों का भरोसा दिलाने की कोशिश माना जा रहा है.
