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7 महीने में हटाई गईं महिला आईएएस किंजल सिंह…क्या मंत्री से अनबन बनी ट्रांसफर की वजह? जानिए पूरी कहानी

उत्तर प्रदेश समाचार: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने रविवार देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 40 आईएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया. इस बदलाव में 2008 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी किंजल सिंह को परिवहन आयुक्त के पद से हटाकर माध्यमिक शिक्षा विभाग का सचिव बनाया गया है. उनकी जगह हाल ही में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे 2010 बैच के आईएएस अधिकारी आशुतोष निरंजन को परिवहन आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है. इस बदलाव के बाद प्रशासनिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं.

मंत्री और कमिश्नर के बीच तालमेल की कमी की चर्चा
सूत्रों के मुताबिक किंजल सिंह के तबादले के पीछे परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से तालमेल की कमी को बड़ी वजह माना जा रहा है. विभागीय कामकाज को लेकर कई मुद्दों पर दोनों के बीच मतभेद थे. खासकर ओवरलोडिंग मामलों में सख्ती और बिना समन्वय के लिए गए फैसलों को लेकर विवाद बढ़ा.

ओवरलोडिंग पर सख्ती बनी विवाद का कारण!
किंजल सिंह ने 16 सितंबर 2025 को परिवहन आयुक्त का पद संभाला था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ओवरलोडिंग के खिलाफ सख्त कदम उठाए। ओवरलोडिंग रैकेट में शामिल होने के आरोप में कई परिवहन अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया था। हालांकि, कुछ फैसलों में यह बात सामने आई कि मंत्री के निर्देश से इतर कार्रवाई की वजह से टकराव बढ़ा है.

नई ट्रांसफर नीति से पहले बदलाव
प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि नई तबादला नीति लागू होने से पहले किसी बड़े विवाद से बचने के लिए यह फेरबदल किया गया है. हालांकि कुछ अधिकारी इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं, लेकिन कम समय में हुए इस बदलाव ने सवाल खड़े कर दिए हैं.

किंजल सिंह का प्रशासनिक अनुभव
बलिया जिले की रहने वाली किंजल सिंह यूपी कैडर की जानी-मानी आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने बहराईच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर और अयोध्या जैसे जिलों में जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य किया है। इसके अलावा वह चिकित्सा शिक्षा विभाग की महानिदेशक भी रह चुकी हैं। उनके अनुभव और सख्त प्रशासनिक शैली की अक्सर चर्चा होती रही है.

15 जिलों के डीएम बदले, प्रशासन में हड़कंप
इस बड़े फेरबदल में 15 जिलों के जिलाधिकारियों को भी बदल दिया गया है. इसके अलावा कई महत्वपूर्ण विभागों में नए अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है. इस बदलाव को सरकार की प्रशासनिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके जरिए आने वाले समय में कामकाज को और बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है.

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