सुबह 5 बजे सीएम आवास पहुंचे छात्र नेता, निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ उठाई आवाज

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार सुबह एक अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. ‘राष्ट्रीय छात्र पंचायत’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवम पांडे सुबह करीब 5 बजे मुख्यमंत्री आवास 5, कालिदास मार्ग पहुंचे. वह गोंडा से करीब 125 किलोमीटर पैदल चलकर यहां पहुंचे और निजी स्कूलों की बढ़ती फीस और मनमानी के खिलाफ मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा. इस घटना से प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया है और शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है.
सुरक्षाकर्मियों को सौंपा ज्ञापन
मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर शिवम पांडे ने वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों को अपनी मांगों से अवगत कराया और मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा. सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें जनता दरबार में आने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने वहां ज्ञापन सौंपकर लौटना ही उचित समझा. उन्होंने कहा कि सरकार को सीधा संदेश देने के लिए यह कदम उठाया गया है.
दिल्ली के फैसले का दिया उदाहरण
शिवम पांडे ने कहा कि दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने निजी स्कूलों के खिलाफ कड़ा फैसला लेते हुए हर साल यूनिफॉर्म और किताबें बदलने पर रोक लगा दी है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब दिल्ली में छात्रों और अभिभावकों के हित में नियम लागू हो सकते हैं तो उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं.
सरकार के सामने रखीं तीन बड़ी मांगें
उन्होंने सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखीं. पहला, प्राइवेट स्कूलों में कम से कम 5 साल तक यूनिफॉर्म नहीं बदली जानी चाहिए. दूसरा, कक्षा 1 से 12 तक के सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य की जाएं ताकि कमीशनखोरी खत्म हो सके। तीसरा, राज्य में फीस विनियमन अधिनियम को सख्ती से लागू किया जाए और मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
चेतावनी: ‘शिक्षा सत्याग्रह’ शुरू होगा
शिवम पांडे ने कहा कि ”जब सरकार सो रही होती है तो छात्र जाग रहे होते हैं.” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जल्द ही इस दिशा में कदम नहीं उठाया तो संगठन पूरे प्रदेश में ‘शिक्षा सत्याग्रह’ शुरू करेगा और जरूरत पड़ी तो चक्का जाम भी किया जाएगा.
आंदोलन को जन आंदोलन बनाने की तैयारी
इस घटना के बाद संगठन ने साफ कर दिया है कि वह सिर्फ ज्ञापन देने तक सीमित नहीं रहेगा. इसे एक बड़े जन आंदोलन का रूप दिया जायेगा. इस कदम से एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था और निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गये हैं.
(रिपोर्ट: संदीप शुक्ला, लखनऊ)
