मुज़फ्फरनगर न्यूज़: सब-इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर बने नरेश कुमार, एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने कंधे पर लगाए स्टार.

मुजफ्फरनगर पुलिस विभाग में सेवा, समर्पण और निष्ठा का एक और प्रेरक उदाहरण सामने आया है। खतौली थाने में नियुक्त उपनिरीक्षक नरेश कुमार को निरीक्षक पद पर पदोन्नत किया गया। इस अवसर पर पुलिस कार्यालय में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा एवं पुलिस अधीक्षक यातायात अतुल कुमार चैबे ने उनके कंधों पर रैंक उन्नयन प्रतीक चिन्ह (स्टार) लगाकर उन्हें सम्मानित किया।

इस पदोन्नति समारोह से न केवल विभागीय परंपरा को बल मिला बल्कि पुलिस बल में कार्यरत अन्य कर्मियों के लिए भी प्रेरणा का माहौल बना।


पुलिस कार्यालय में गरिमामय माहौल में हुआ प्रमोशन समारोह

पुलिस कार्यालय में आयोजित इस सम्मान समारोह के दौरान इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नति पाने वाले नरेश कुमार को अधिकारियों व कर्मचारियों की उपस्थिति में औपचारिक रूप से नई जिम्मेदारी सौंपी गयी. वरीय पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने स्वयं उनके कंधे पर स्टार लगाकर विभाग की ओर से विश्वास एवं सम्मान व्यक्त किया.

इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक यातायात अतुल कुमार चैबे भी मौजूद रहे और उन्होंने इस पदोन्नति को पुलिस सेवा के प्रति समर्पण का परिणाम बताया।


एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने उज्जवल भविष्य की कामना की

समारोह के दौरान वरीय पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने इंस्पेक्टर नरेश कुमार के अब तक के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी ईमानदार कार्यशैली एवं अनुशासित सेवा भावना विभाग के लिए प्रेरणास्रोत है.

उन्होंने आशा व्यक्त की कि नई जिम्मेदारियों के साथ नरेश कुमार भविष्य में भी अपनी कार्यकुशलता और प्रतिबद्धता से पुलिस विभाग की प्रतिष्ठा को और मजबूत करेंगे।


कर्तव्यनिष्ठा सेवा के आधार पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली

पुलिस सेवा में पदोन्नति न केवल वरिष्ठता का परिणाम है, बल्कि यह जिम्मेदारी, अनुशासन और जनसेवा के प्रति सतत समर्पण का प्रमाण भी है। इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोशन पाना किसी भी पुलिस अधिकारी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है.

अपने कार्यकाल के दौरान नरेश कुमार ने खतौली थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण और जनसंपर्क को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाई।


पुलिस अधीक्षक यातायात अतुल कुमार चैबे ने भी शुभकामनाएं दीं

इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक यातायात अतुल कुमार चैबे ने निरीक्षक नरेश कुमार को उनकी पदोन्नति पर बधाई देते हुए कहा कि पुलिस विभाग में कार्यरत प्रत्येक अधिकारी का उद्देश्य समाज में सुरक्षा एवं विश्वास की भावना स्थापित करना होना चाहिए।

उन्होंने उम्मीद जताई कि नरेश कुमार इंस्पेक्टर पद की नई जिम्मेदारी को पूरी लगन और कुशलता से निभाएंगे।


मुज़फ़्फ़रनगर न्यूज़ नरेश कुमार पदोन्नत इंस्पेक्टर: विभागीय परंपरा और मनोबल हुआ मजबूत

इस तरह के सम्मान समारोह पुलिस विभाग में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करते हैं। जब किसी अधिकारी की मेहनत की सार्वजनिक रूप से सराहना की जाती है तो इससे अन्य कर्मचारियों का भी मनोबल बढ़ता है।

मुजफ्फरनगर पुलिस प्रशासन लगातार अपने कर्मियों के उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित करने की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है, जिससे विभागीय कार्य संस्कृति मजबूत हो रही है।


नये पद के साथ जिम्मेदारियाँ और अपेक्षाएँ बढ़ीं

इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन के साथ ही नरेश कुमार की जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं. अब उनसे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने, अपराध नियंत्रण रणनीतियों को मजबूत करने और जनता के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की उम्मीद है।

वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें अपने कर्तव्यों के प्रति सदैव सतर्क एवं प्रतिबद्ध रहने के लिए प्रेरित किया।


पुलिस विभाग में पदोन्नति समारोह बना प्रेरणा का स्त्रोत

पुलिस विभाग में इस तरह के पदोन्नति समारोह महज औपचारिक आयोजन नहीं होते, बल्कि ये संगठनात्मक संस्कृति को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी होते हैं. इससे पुलिसकर्मियों में बेहतर प्रदर्शन की भावना विकसित होती है।

इंस्पेक्टर नरेश कुमार की पदोन्नति को विभाग में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है.


मुजफ्फरनगर पुलिस कार्यालय में आयोजित इस गरिमामय समारोह ने एक बार फिर विभागीय परंपरा, अनुशासन और सम्मान की भावना को मजबूत किया। निरीक्षक पद पर पदोन्नत हुए नरेश कुमार को वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दिया गया मार्गदर्शन एवं शुभकामनाएँ उनके आगामी सेवा काल में नई ऊर्जा प्रदान करेंगी तथा उनसे क्षेत्र में प्रभावी कानून व्यवस्था एवं जनता के विश्वास को और अधिक मजबूत करने की उम्मीद है।

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देहरादून: पीएम मोदी 14 अप्रैल को करेंगे दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, शंखनाद से होगा स्वागत, रोड शो भी करेंगे – पीएम मोदी 14 अप्रैल को करेंगे देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, करेंगे रोड शो

अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

द्वारा प्रकाशित: अलका त्यागी

अद्यतन मंगलवार, 07 अप्रैल 2026 11:17 अपराह्न IST

प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री ने सीएम आवास में उच्चस्तरीय बैठक की. उन्होंने कहा, इस भव्य आयोजन में समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाये, ताकि कार्यक्रम एक जन उत्सव का रूप ले सके.


14 अप्रैल को देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे पीएम मोदी, करेंगे रोड शो

पीएम मोदी
– फोटोः अमर उजाला फाइल फोटो



विस्तार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि 14 अप्रैल को देहरादून-दिल्ली इकोनॉमिक कॉरिडोर (देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे) कॉरिडोर का उद्घाटन करने के लिए उत्तराखंड आ रहे पीएम का स्वागत शंख और घंटियों से किया जाएगा. वह डाट काली मंदिर में पूजा करेंगे और सभा स्थल गढ़ीकैंट जाते समय रोड शो में भी हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम को उत्सव की तरह मनाने की तैयारी की जा रही है.


ट्रेंडिंग वीडियो

प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री ने मंगलवार को सीएम आवास पर उच्चस्तरीय बैठक की. उन्होंने कहा, इस भव्य आयोजन में समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाये, ताकि कार्यक्रम एक जन उत्सव का रूप ले सके. उन्होंने निर्देश दिये कि कार्यक्रम की रूपरेखा अत्यन्त आकर्षक एवं सुव्यवस्थित बनायी जाय। आयोजन में उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी लोक नृत्य और संगीत की झलक भव्य तरीके से मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के रोड शो के दौरान लोग अपने घरों से निकलें और राष्ट्रीय ध्वज के साथ कार्यक्रम में शामिल हों और पूरे प्रदेश में उत्सव का माहौल बनायें.

देहरादून: मुख्यमंत्री धामी ने की पांच विधानसभाओं की सीएम घोषणाओं की समीक्षा, सुविधाओं पर ध्यान देने के निर्देश

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दोषसिद्धि संभावना या अनुमान पर आधारित नहीं हो सकती… बलात्कार के मामले में 11 साल जेल में बिताने के बाद हाई कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक अहम फैसला सुनाते हुए 11 साल से जेल में बंद निर्मल कुमार को बरी कर दिया है. यह मामला एक नाबालिग लड़की से रेप और मौत से जुड़ा था. आरोपी 2010 से जेल में था. कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया कि सिर्फ संदेह या अनुमान के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता.

फैजाबाद सेशन कोर्ट का फैसला रद्द
20 सितंबर 2010 को फैजाबाद जिले में पड़ोसी निर्मल कुमार पर नाबालिग लड़की से दुष्कर्म का आरोप लगा था. तीन दिन बाद पीड़िता की मौत हो गई. पीड़िता के पिता ने निर्मल कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी है. सेशन कोर्ट ने आरोपी को दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई. इसके खिलाफ निर्मल कुमार ने हाई कोर्ट में अपील दायर की, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है.

कोर्ट ने जांच एजेंसी की गलतियों पर टिप्पणी की
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट में पीड़िता के वेजाइनल स्वैब पर मानव वीर्य जरूर मिला, लेकिन यह साबित नहीं हुआ कि वह निर्मल कुमार का था. कोर्ट ने डीएनए टेस्ट या साइंटिफिक मैच न होने को जांच एजेंसी की गंभीर चूक बताया.

संदेह के आधार पर जेल में रखना गलत है
हाई कोर्ट ने कहा कि बिना ठोस और वैज्ञानिक सबूत के किसी व्यक्ति को 11 साल तक जेल में रखना उचित नहीं है. महज अनुमान और संदेह के आधार पर किसी को दोषी ठहराना कानूनन गलत है। इसके आधार पर खंडपीठ ने निर्मल कुमार को रिहा करने का आदेश दिया.

न्यायिक निर्णय का महत्व
यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया में ठोस साक्ष्य के महत्व को दर्शाता है। अदालत ने संदेश दिया कि कानून महज संदेह के आधार पर लोगों की जीवन भर की आजादी नहीं छीनेगा और जांच एजेंसियों की गलतियों को गंभीरता से लिया जाएगा।

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मुज़फ्फरनगर न्यूज़: सिसौली में बलियान प्रो कबड्डी प्रतियोगिता शुरू, नरेश टिकैत ने किया उद्घाटन, युवाओं को नशे से दूर रखने का दिया संदेश

मुजफ्फरनगर जिले के सिसौली कस्बे में शुरू हुई बलियान प्रो कबड्डी प्रतियोगिता ने एक बार फिर क्षेत्र को पारंपरिक खेल संस्कृति की नई ऊर्जा से भर दिया है। तीन दिवसीय इस भव्य प्रतियोगिता का उद्देश्य ग्रामीण खेलों को प्रोत्साहित करना, युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान करना और उन्हें नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखना है।

देशभर से प्रतिष्ठित टीमों की भागीदारी ने इस प्रतियोगिता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। खेल प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों की भारी उपस्थिति ने कार्यक्रम को उत्सव जैसा माहौल प्रदान किया।


हवन-पूजन एवं रिबन काटकर प्रतियोगिता का भव्य शुभारम्भ

भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष ने प्रतियोगिता का उद्घाटन किया नरेश टिकैत और उम्रदराज़ विधायक राजपाल बालियान विधि-विधान से हवन-पूजन और रिबन काटा गया। इस अवसर पर मंच पर उपस्थित विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।

उद्घाटन समारोह के दौरान क्षेत्रीय परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों की झलक भी देखने को मिली, जिसने प्रतियोगिता को सामाजिक सरोकारों से जोड़ा.


मंत्री अनिल कुमार और पूर्व मंत्री योगराज सिंह समेत कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं.

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल कुमारपूर्व मंत्री योगराज सिंह और जाट महासभा के अध्यक्ष धर्मवीर बालियान सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। सभी अतिथियों ने प्रतियोगिता के आयोजन की सराहना की और इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक पहल बताया.

इन नेताओं ने कहा कि खेल गतिविधियां न केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम हैं बल्कि सामाजिक समरसता एवं अनुशासन का मजबूत आधार भी बनती हैं।


नरेश टिकैत ने कहा-कबड्डी जैसे खेल युवाओं को गलत रास्ते से बचाते हैं

मुख्य अतिथि नरेश टिकैत ने अपने संबोधन में कहा कि कबड्डी जैसे पारंपरिक ग्रामीण खेलों से युवाओं में अनुशासन, साहस और भाईचारे की भावना विकसित होती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को नशे और सामाजिक विकारों से दूर रखने के लिए खेलों को बढ़ावा देना बहुत जरूरी है।

उन्होंने आयोजकों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि ऐसे आयोजन गांवों की खेल परंपरा को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को देश की ताकत बताया.

कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन प्रतिभाओं को आगे लाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कबड्डी को जमीनी स्तर का खेल बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र ने देश को कई बेहतरीन खिलाड़ी दिये हैं जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनायी है.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेल ढांचे को मजबूत करने और ग्रामीण खिलाड़ियों को अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है.


जयंत चौधरी के प्रयासों का भी जिक्र किया गया

कार्यक्रम के दौरान मंत्री अनिल कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयन्त चौधरी खिलाड़ियों और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल की जा रही है। उन्होंने कहा कि खेलों के विकास से युवाओं के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और समाज में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल बनता है।


इस प्रतियोगिता को देश की प्रमुख कबड्डी प्रतियोगिताओं में शामिल किया गया है।

आयोजकों के मुताबिक बलियान प्रो कबड्डी प्रतियोगिता अब देश की प्रमुख ग्रामीण खेल प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बना चुकी है. हर साल भाग लेने वाली टीमों और दर्शकों की भागीदारी की संख्या लगातार बढ़ रही है।

प्रतियोगिता के बढ़ते प्रभाव ने इसे राष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजनों की श्रेणी में स्थापित कर दिया है।


पुरस्कार राशि से खिलाड़ियों में उत्साह बढ़ा

प्रतियोगिता में खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के लिए आकर्षक पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है। पहले स्थान पर रहने वाली टीम को 5 लाख रुपये, दूसरे स्थान पर रहने वाली टीम को 2.5 लाख रुपये और तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीम को 25-25 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा.

इस प्रकार की पुरस्कार संरचना प्रतियोगिता को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाती है।


अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत मैट पर मैच खेले जा रहे हैं

इस प्रतियोगिता की खास बात यह है कि सभी मैच अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मैट पर आयोजित किये जा रहे हैं। इससे खिलाड़ियों को प्रोफेशनल स्तर की प्रतिस्पर्धा का अनुभव मिल रहा है.

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि ऐसे आयोजनों से ग्रामीण खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का महत्वपूर्ण अवसर मिलता है.


प्रतियोगिता का आयोजन दिवंगत खिलाड़ियों की याद में किया जा रहा है

यह प्रतियोगिता दो दिवंगत कबड्डी खिलाड़ियों की याद में आयोजित की जा रही है जिनकी एक दुर्घटना में असामयिक मृत्यु हो गई थी। आयोजकों ने बताया कि यह आयोजन पिछले छह वर्षों से लगातार किया जा रहा है और हर साल इसका स्वरूप और भव्य होता जा रहा है.

इस पहल के जरिए खिलाड़ियों की यादों को ताजा रखने की कोशिश की जा रही है.


बाहरी जिलों से आने वाले खिलाड़ियों के लिए विशेष व्यवस्था

प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए विभिन्न जिलों एवं राज्यों से आए खिलाड़ियों के लिए आवास एवं भोजन की विशेष व्यवस्था की गई है। इससे खिलाड़ियों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होती है और वे पूरी एकाग्रता के साथ प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं।

आयोजकों की इस व्यवस्था की प्रतिभागियों द्वारा भी सराहना की जा रही है.


पहले दिन के मैच में सोरम ने बरेली को हराया

प्रतियोगिता के पहले दिन खेले गए रोमांचक मुकाबले में सोरम और बरेली की टीमों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। दर्शकों की भारी मौजूदगी के बीच खेले गये इस मैच में सोरम की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की.

इस जीत के साथ सोरम की टीम ने प्रतियोगिता में जोरदार शुरुआत की है.


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देहरादून: एक माह में जिले में मिले 10 डेंगू पॉजिटिव केस, स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात बरतते हुए जारी की एडवाइजरी

मार्च से अब तक देहरादून जिले के सरकारी अस्पतालों में लगभग 10 मरीज डेंगू पॉजिटिव पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात बरतते हुए डेंगू और मलेरिया को लेकर अस्पतालों को एडवाइजरी जारी की है.

इसके तहत अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही पॉजिटिव केस को अविलंब आईडीएसपी पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है. आमतौर पर डेंगू के मामले जुलाई के बाद ही सामने आते हैं, लेकिन मार्च-अप्रैल में डेंगू के मामले सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है।

विभाग ने इस क्रम को तोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। हाल ही में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जिले के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को एडवाइजरी जारी कर डेंगू और मलेरिया से लड़ने की तैयारी पूरी करने को कहा है. इसमें सभी अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड रखना अनिवार्य होगा. इन वार्डों के सभी बेडों पर मच्छरदानी लगानी होगी। इसके अलावा सभी जरूरी दवाएं भी रखने को कहा गया है.

एलाइजा टेस्ट में पॉजिटिव मरीजों को ही डेंगू पीड़ित माना जाए।

विभाग ने सभी अस्पतालों को सख्त निर्देश दिए हैं कि केवल एलाइजा पॉजिटिव मरीजों को ही डेंगू का मरीज माना जाए। कई बार अगर अस्पताल का कार्ड जांच में डेंगू पॉजिटिव पाया जाता है तो उसे डेंगू पॉजिटिव माना जाता है, लेकिन बाद में जब एलिसा से जांच की जाती है तो वह नेगेटिव आता है। डेंगू के लिए एलिसा सबसे विश्वसनीय परीक्षण है।

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भूमिपूजन कार्यक्रम बना विवाद का कारण, मंच पर ही बीजेपी और एसपी विधायकों के बीच नोकझोंक

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में एक सड़क निर्माण के भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान उस वक्त माहौल गरमा गया जब मंच पर बीजेपी और एसपी की दो महिला विधायकों के बीच तीखी बहस हो गई. इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है. बताया जा रहा है कि कार्यक्रम का आयोजन खागा और हुसैनगंज क्षेत्र को जोड़ने वाली सड़क के निर्माण को लेकर किया गया था, लेकिन पूजा को लेकर हुए विवाद ने पूरे आयोजन को राजनीतिक रंग दे दिया.

भूमि पूजन के दौरान शुरू हुआ विवाद
जानकारी के मुताबिक, कार्यक्रम में खागा विधायक कृष्णा पासवान और हुसैनगंज विधायक उषा मौर्य दोनों मौजूद थीं. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक विवाद पूजा शुरू करने को लेकर शुरू हुआ. बीजेपी विधायक कृष्णा पासवान ने कहा, ”यह मेरा क्षेत्र है, मैं पूजा करूंगा.” इस पर नाराजगी जताते हुए सपा विधायक ऊषा मौर्य ने इसे अपमानजनक बताया.

मंच पर ही तीखी बहस हो गई
इस बात पर मंच पर ही दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई. उषा मौर्य ने सवाल उठाया कि क्या उन्हें अपमानित करने के लिए कार्यक्रम में बुलाया गया था. इसके बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया और दोनों पार्टियों के समर्थकों के बीच हलचल भी बढ़ गई.

अन्य लोगों से भी बहस की
मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक जेई द्वारा दोनों विधायकों को बुलाने को लेकर भी सवाल उठाए गए। इसी दौरान रत्नेश रत्न से बहस हो गई, जिससे विवाद और बढ़ गया. कार्यक्रम में सपा विधायक रत्नेश रत्न के साथ खागा के पूर्व प्रत्याशी रामतीरथ परमहंस भी मौजूद रहे।

स्थिति को संभालने का प्रयास करें
हालांकि, कार्यक्रम में मौजूद अन्य लोगों ने किसी तरह स्थिति को शांत करने की कोशिश की. कुछ देर बाद माहौल सामान्य हो गया, लेकिन इस घटना से कार्यक्रम की गरिमा पर असर पड़ा.

वायरल वीडियो से बढ़ी सियासी हलचल
इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना ​​है कि आगामी चुनाव को देखते हुए क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई तेज हो रही है, जिसका असर ऐसी घटनाओं में दिख रहा है.

अभी आधिकारिक बयान नहीं आया है
फिलहाल इस मामले में किसी भी तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. लेकिन इस घटना ने जिले की राजनीति में एक नई बहस जरूर छेड़ दी है और इसका असर आने वाले समय में देखने को मिल सकता है.

(रिपोर्ट:देवेंद्र सिंह,फतेहपुर)

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मुज़फ्फरनगर न्यूज़: महंगी किताबों से अभिभावकों में गुस्सा, निजी स्कूलों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन और कार्रवाई की मांग

मुजफ्फरनगर निजी स्कूलों द्वारा महंगी किताबें बेचे जाने के विरोध में अभिभावकों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया. शुक्रवार को भारतीय किसान मजदूर (संयुक्त मोर्चा) के बैनर तले बड़ी संख्या में अभिभावक बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा।

अभिभावकों का आरोप है कि निजी स्कूल बच्चों की किताबों को लेकर मनमानी कर रहे हैं, जिससे मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ रहा है. प्रदर्शन के दौरान प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की गई.


नए सत्र से बढ़ता वित्तीय बोझ विरोध का कारण बन रहा है

हर साल नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों को बच्चों के लिए नई किताबें खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस बार भी स्थिति कुछ अलग नहीं थी, लेकिन इस बार किताबों की कीमतों में असामान्य वृद्धि ने विरोध को जन्म दिया।

अभिभावकों का कहना है कि कई निजी स्कूलों ने यह अनिवार्य कर दिया है कि वे अपनी निर्धारित दुकान से ही किताबें खरीदें. इसके चलते अभिभावकों के पास कोई विकल्प नहीं बचता और वे महंगी किताबें खरीदने को मजबूर हो जाते हैं।

इस स्थिति ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समानता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं.


केवल निर्धारित पुस्तक दुकानों से ही खरीदारी करने की बाध्यता पर उठे सवाल

प्रदर्शन में शामिल अभिभावकों ने कहा कि स्कूल प्रबंधन की ओर से कुछ विशेष दुकानों को अधिकृत किया गया है, जहां से किताबें खरीदने का दबाव बनाया जाता है. अगर कोई अभिभावक दूसरी दुकानों से किताबें खरीदने की कोशिश करता है तो कई बार उसे परोक्ष रूप से मना कर दिया जाता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि खुले बाजार में उपलब्ध वही किताबें निर्धारित दुकानों पर कई गुना अधिक कीमत पर बेची जा रही हैं। इससे यह संदेह गहरा गया है कि किताबों की बिक्री के लिए सुनियोजित व्यवस्था की गयी है.


बाजार और स्कूलों द्वारा तय दुकानों की कीमतों में बड़ा अंतर

प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों का कहना था कि बाजार में उपलब्ध किताबों की कीमत और स्कूल द्वारा तय कीमत में काफी अंतर देखा गया है. कई मामलों में तो एक ही किताब की कीमत दोगुनी या उससे भी ज्यादा बताई जा रही है.

अभिभावकों का कहना है कि ऐसी व्यवस्था शिक्षा को सेवा के बजाय व्यवसाय बनाने का संकेत देती है. उनका आरोप है कि किताबों के नाम पर अभिभावकों से अनावश्यक राशि वसूली जा रही है.


महंगाई के दौर में शिक्षा का खर्च एक बड़ी चुनौती बन गया है

प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने यह भी कहा कि बढ़ती महंगाई के कारण पहले से ही परिवारों का बजट प्रभावित हो रहा है. ऐसे समय में बच्चों की पढ़ाई के खर्च में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय बन गई है.

उन्होंने कहा कि फीस, वर्दी, परिवहन और अन्य शैक्षणिक खर्चों के साथ-साथ किताबों की बढ़ती कीमतों ने परिवारों की वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव डाला है। इसके कारण कई परिवारों को अपने बच्चों की शिक्षा जारी रखना मुश्किल हो रहा है।


गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हैं

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस तरह की मनमानी का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है. ऐसे परिवार पहले से ही अपनी सीमित आय से अपने बच्चों की शिक्षा का खर्च पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।

अभिभावकों का कहना है कि अगर किताबों की कीमतें नियंत्रित नहीं की गईं तो कई परिवारों को अपने बच्चों की पढ़ाई बीच में ही रोकने जैसे कठिन फैसले लेने पड़ सकते हैं.


प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, जांच की मांग तेज

मुज़फ़्फ़रनगर न्यूज़ निजी स्कूलों की किताबों का विरोध इस दौरान अभिभावकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि स्कूल किसी भी अभिभावक पर निर्धारित दुकानों से किताबें खरीदने का दबाव न डालें.

ज्ञापन में दोषी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो।


भारतीय किसान मजदूर (संयुक्त मोर्चा) का मिला समर्थन

इस विरोध प्रदर्शन में भारतीय किसान मजदूर (संयुक्त मोर्चा) ने सक्रिय भूमिका निभाई. संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अभिभावकों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जायेगा.


अभिभावकों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी

प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों ने साफ कहा कि अगर जल्द ही इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन तेज करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि मजबूरी में बच्चों को निजी स्कूलों से निकालने का फैसला लेना पड़ सकता है.

अभिभावकों ने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि शिक्षा व्यवस्था को संतुलित एवं न्यायसंगत बनाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं.


शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग तेज

इस विरोध के बाद शहर में निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गयी है. कई सामाजिक संगठनों ने भी किताबों की कीमतों पर नजर रखने की जरूरत पर बल दिया है.

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि अगर किताबों की बिक्री को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश बना दिए जाएं तो अभिभावकों को राहत मिल सकती है और शिक्षा व्यवस्था और अधिक पारदर्शी हो सकती है.


मुजफ्फरनगर में निजी स्कूलों की महंगी किताबों के खिलाफ उठी ये आवाज अब व्यापक जनचर्चा का विषय बन रही है. अभिभावकों की मांग है कि शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और जिम्मेदार बनाया जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई आर्थिक बोझ न बने और हर परिवार बिना किसी दबाव के अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दे सके।

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Gas crisis: Angry councilors reached the agency after not getting cylinders, expressed anger on not getting the manager – Angry Councillors Reached The Agency In Haldwani After Not Getting Cylinders

Angered by non-availability of cylinders in Haldwani, councilors surrounded Indane Gas Agency located in Saras Market. Expressed anger over not finding the manager here. He scolded the employees a lot.

The angry councilors said that despite booking a month in advance, the cylinder was not available. The employees reaching the wards with gas are shrugging off the issue saying that the cylinders have run out. During this time, the people present in the agency said that the message of cylinder delivery has come but they have not received the gas yet.

Many people, including councilors Neema Bhatt and Shailendra Danu, went straight to the Kumaon Commissioner’s residence after the agency to meet him, but the meeting could not take place as he was present in some meeting.

Giving wrong information proved costly


The agency manager had talked about gas delivery in Hiranagar on Monday. On this the councilor informed the people but people expressed their displeasure when the gas was not delivered.

Order related to five kg cylinder not received


The local administration did not receive any order on Monday after the decision of the Petroleum Ministry to include five kg cylinders in the identity card. There is a stock of more than 1500 such cylinders in the district. The agency located at Saras Market does not have their stock. The agency manager said that a demand has been made for 60 cylinders.



Gas cylinders are being distributed across the district as per booking. No new order has been received for distribution of five kg FTL commercial and domestic cylinders. These cylinders are being given only to those with connections. – Manoj Burman, District Supply Officer



Mayor had warned of lockdown


In the Municipal Corporation board meeting on March 31, Mayor Gajraj Bisht expressed his displeasure over the gas shortage. He had warned of a lockout of the agency if the distribution system was not improved. People are angry as the situation remains the same even after six days. Here the Mayor has said that information has been taken from the councillors. Indane has made some improvement in delivery in three days. Gas distribution will be inspected again in two days. Action will be taken if flaws are found.

When the cylinder was not given on DAC number, the villagers stopped the vehicle filled with gas.



Villagers created ruckus in Ramni Gram Sabha of Lamachaud, Haldwani over non availability of gas cylinder. On Monday, the vehicle of Indane Agency had reached the village with the cylinder and the villagers were also standing in a queue. As soon as the turn of cylinder distribution came, a dispute arose over the DAC number.

DAC numbers were issued to the villagers after booking in March, but the agency personnel objected to giving cylinders to those with such numbers. There was a lot of argument between both the parties on this matter. The villagers parked the vehicle at the spot. He said that despite having DAC number, he was not being given gas.

On information, District Panchayat member Dr. Chhavi Kandpal reached the spot. He talked to the SDM and GM of KMVN over phone. He said that many people who had booked from March 13 to March 25 have not received the cylinder. Chhavi reported that GM has assured to release the new DAC numbers within three days. People calmed down on this.

Booking our cylinder given to someone else


During the uproar in Ramani, villagers alleged that the gas cylinder had been given to someone else on their booking. This was also confirmed after going to the agency. The villagers also accused the agency personnel of arbitrariness.

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गोंडा में विवादित पोस्टर से गरमाई सियासत, अखिलेश पर निशाना और योगी सरकार से तुलना

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एक बार फिर सियासी माहौल गर्म हो गया है. शहर के अलग-अलग इलाकों में लगे विवादित पोस्टर और होर्डिंग्स ने एक नई बहस छेड़ दी है. इन पोस्टरों में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला गया है, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली को बेहतर बताया गया है. ‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ नाम के संगठन की ओर से लगाए गए इन पोस्टरों ने जिले की राजनीति में हलचल मचा दी है और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए हैं.

जगह-जगह लगाए गए पोस्टर
जानकारी के मुताबिक ये पोस्टर गोंडा के अंबेडकर चौराहे और कमिश्नर आवास जैसे महत्वपूर्ण स्थानों के सामने लगाए गए हैं. इन होर्डिंग्स में बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है- ‘अखिलेश के ल्यारी राज, क्या चाहिए धुरंधर सीएम?’ पोस्टर में अखिलेश यादव को ‘रहमान डाकू’ के रूप में दिखाया गया है, जिससे विवाद और बढ़ गया है. ये पोस्टर सीधे तौर पर राजनीतिक संदेश देने के मकसद से लगाए गए हैं.

होर्डिंग्स में दंगों का जिक्र और एसपी पर हमला
इन होर्डिंग्स में मुजफ्फरनगर, मेरठ और शामली में हुए दंगों की खबरों की कटिंग भी लगाई गई है. इसके जरिए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा गया है. संगठन ने यह दिखाने की कोशिश की है कि उस समय कानून-व्यवस्था कमजोर थी, जबकि मौजूदा सरकार में स्थिति बेहतर है.

योगी सरकार के एक्शन पर प्रकाश डाला
पोस्टरों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘धुरंधर सीएम’ बताया गया है. साथ ही उनकी सरकार द्वारा माफियाओं के खिलाफ की गई कार्रवाई को भी प्रमुखता से दिखाया गया है. इस तुलना के जरिए जनता से पूछा गया है कि उन्हें कैसी सरकार चाहिए. ये मैसेज लोगों का ध्यान खींचने में कामयाब रहा है.

राजनीतिक माहौल गरमा गया
‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ संगठन की ओर से लगाए गए इन विवादित होर्डिंग्स के बाद जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.
हालांकि इस मुद्दे पर अभी तक कोई बड़ी राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह साफ है कि इस तरह के पोस्टर भविष्य में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं.

(रिपोर्ट: संदीप शुक्ला, लखनऊ)

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उत्तराखंड मौसम: बदला मौसम का मिजाज, अगले तीन दिनों तक बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी – उत्तराखंड में अगले तीन दिनों तक बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी

मौसम का मिजाज फिर बदल गया है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने पिथौरागढ़, बागेश्वर समेत सभी जिलों में बिजली गिरने, ओलावृष्टि और तेज आंधी चलने की चेतावनी जारी की है। इस दौरान पर्वतीय जिलों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी की संभावना है।


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शहर में सोमवार सुबह और शाम को ठंड के साथ दिनभर धूप खिली रही। दिन का अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस, देहरादून के 29.8 डिग्री सेल्सियस से चार डिग्री अधिक और न्यूनतम 13.6 डिग्री सेल्सियस रहा। मुक्तेश्वर का अधिकतम तापमान आठ डिग्री गिरकर 14.1 और न्यूनतम तीन डिग्री गिरकर 5.7 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। इन दिनों खेतों में गेहूं की बालियों की कटाई चल रही है। अगर बारिश और ओलावृष्टि हुई तो गेहूं की फसल को नुकसान हो सकता है। ओलावृष्टि से सब्जियों को भी नुकसान हो सकता है.

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