राहुल गांधी की नागरिकता पर नया विवाद…इलाहाबाद HC ने केंद्र से मांगी पूरी रिपोर्ट, सुनवाई 19 मार्च तक टली

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से जुड़ा दोहरी नागरिकता विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है. इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने केंद्र सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है. कोर्ट ने पूछा है कि राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता से जुड़ी शिकायत पर केंद्र ने अब तक क्या कार्रवाई की है. यह निर्देश सोमवार को सुनवाई के दौरान दिया गया. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च तक के लिए टाल दी है. इस मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है और अब सबकी नजरें केंद्र सरकार की रिपोर्ट पर टिकी हैं.

शिकायत की सुनवाई के दौरान कोर्ट के निर्देश
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस राजीव सिंह ने यह निर्देश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जो कर्नाटक बीजेपी कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर ने दायर की है. याचिकाकर्ता ने लखनऊ की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट के 28 जनवरी के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी. विशेष अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि उसे नागरिकता से जुड़े मामलों पर फैसला लेने का अधिकार नहीं है.

विभिन्न कानूनों के तहत लगाए गए आरोप
हाई कोर्ट में दायर याचिका में विग्नेश शिशिर ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पूरे मामले की विस्तृत जांच की मांग की है. याचिका में राहुल गांधी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के कई प्रावधानों के तहत आरोप लगाया गया है। उनका कहना है कि कथित दोहरी नागरिकता के मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए.

केंद्र सरकार से मांगा रिकार्ड
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील राज कुमार सिंह से पूछा कि राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता से जुड़ी शिकायत पर केंद्र ने क्या कार्रवाई की है. इसके साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस विवाद से जुड़े सभी रिकॉर्ड केंद्रीय गृह मंत्रालय को पेश किए जाएं. कोर्ट का कहना है कि सभी दस्तावेज सामने आने के बाद ही मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

मामला रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर कर दिया गया
यह परिवाद पहले रायबरेली की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट में दायर किया गया था। बाद में याचिकाकर्ता की मांग पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने 17 दिसंबर को मामले को रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर कर दिया. इसके बाद 28 जनवरी को लखनऊ की स्पेशल एमपी/एमएलए कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी. अब उसी फैसले को चुनौती देते हुए मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है. केंद्र सरकार की रिपोर्ट मिलने के बाद जस्टिस राजीव सिंह की एकल पीठ 19 मार्च को मामले की अगली सुनवाई करेगी.

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मुजफ्फरनगर में आबकारी लाइसेंस धारकों के लिए ई-बैंक गारंटी व्यवस्था पर महत्वपूर्ण बैठक, एडीएम (वित्त एवं राजस्व) ने दिये निर्देश

ई-बैंक गारंटी मुजफ्फरनगर आबकारी व्यवस्था को सुचारू एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गयी है. मुजफ्फरनगर में आबकारी विभाग से जुड़े खुदरा एवं थोक लाइसेंसधारियों को ई-बैंक गारंटी जारी करने की प्रक्रिया को सरल एवं समयबद्ध करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। ऑनलाइन मीटिंग आयोजित किये गये. इस बैठक की अध्यक्षता करें अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) मुजफ्फरनगर इसे करें।

यह बैठक उत्तर प्रदेश में आयोजित की गई थी अपर मुख्य सचिव एवं आबकारी आयुक्त, प्रयागराज द्वारा दिये गये निर्देशों के अनुरूप आयोजन किया गया। साथ ही जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर द्वारा जारी आदेशों के अनुपालन में इस विषय पर भी विस्तार से चर्चा की गई, ताकि आबकारी विभाग के लाइसेंसधारियों को बैंकिंग प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनावश्यक कठिनाई का सामना न करना पड़े।


ई-बैंक गारंटी व्यवस्था को लेकर प्रशासन की पहल

ई-बैंक गारंटी मुजफ्फरनगर आबकारी व्यवस्था के तहत आबकारी विभाग के खुदरा एवं थोक लाइसेंसधारियों को बैंक गारंटी जारी करने की प्रक्रिया को डिजिटल एवं पारदर्शी बनाने में प्रशासन सक्रिय है.

बैठक में ई-बैंक गारंटी की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि लाइसेंसधारियों को समय पर आवश्यक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध करायी जा सकें. प्रशासन का उद्देश्य सरकार की नीतियों के अनुरूप सभी प्रक्रियाओं का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना है।


बैठक में कई अधिकारी व बैंक प्रतिनिधि मौजूद थे

इस अहम बैठक में जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक (एससीडी), जिला आबकारी अधिकारी मुजफ्फरनगर और जिले के विभिन्न बैंक शाखा प्रबंधक एवं सहायक शाखा प्रबंधक ने भी भाग लिया।

बैठक के दौरान सभी संबंधित अधिकारियों और बैंक प्रतिनिधियों ने ई-बैंक गारंटी जारी करने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की और यह सुनिश्चित करने के उपायों पर विचार किया कि लाइसेंसधारियों को निर्धारित समय के भीतर बैंक गारंटी मिल जाए।


बैंकों को दिए गए जरूरी निर्देश

बैठक के दौरान अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) सभी बैंक प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि ई-बैंक गारंटी मुजफ्फरनगर आबकारी इससे संबंधित प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं आसान बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उत्पाद विभाग के खुदरा एवं थोक लाइसेंसधारियों को बैंक गारंटी जारी करने में अनावश्यक विलंब नहीं किया जाना चाहिए. पात्र आवेदकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर बैंक गारंटी प्रदान करना सभी बैंकों की जिम्मेदारी है।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि बैंक शाखाएं इस प्रक्रिया में आने वाली तकनीकी या प्रशासनिक बाधाओं को तुरंत दूर करें और आवश्यक सहायता प्रदान करें।


व्यावहारिक समस्याओं पर भी चर्चा की गयी

बैठक के दौरान जिला आबकारी अधिकारी ई-बैंक गारंटी जारी करने में बैंकों के प्रतिनिधियों के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर भी प्रकाश डाला गया।

उन्होंने कहा कि कई बार तकनीकी प्रक्रियाओं या दस्तावेजी औपचारिकताओं के कारण बैंक गारंटी जारी करने में देरी होती है. उन्होंने इस संबंध में कुछ समाधान एवं सुझाव भी प्रस्तुत किये।

इन सुझावों पर विचार करते हुए बैठक अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये, ताकि इस प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी एवं सुचारू बनाया जा सके.


डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी

ई-बैंक गारंटी मुजफ्फरनगर आबकारी इस प्रणाली को लागू करने का एक मुख्य उद्देश्य बैंकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है।

डिजिटल माध्यम से बैंक गारंटी जारी करने से न केवल प्रक्रिया में तेजी आएगी बल्कि इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना भी कम हो जाएगी।

इसके साथ ही लाइसेंसधारियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी और वे निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से समय पर बैंक गारंटी प्राप्त कर सकेंगे।


समन्वय और सहयोग पर दिया जोर

बैठक के अंत में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) मुजफ्फरनगर सभी बैंकों से अपेक्षा व्यक्त की कि वे आपसी समन्वय स्थापित कर उत्पाद विभाग के लाइसेंसधारियों को ई-बैंक गारंटी जारी करने में पूर्ण सहयोग प्रदान करें।

उन्होंने कहा कि प्रशासन एवं बैंकिंग संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय से सरकार के निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन संभव हो सकेगा।


सरकारी नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन की दिशा में कदम

ई-बैंक गारंटी मुजफ्फरनगर आबकारी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में आयोजित यह बैठक प्रशासन की सक्रियता और पारदर्शी व्यवस्था स्थापित करने के प्रयासों को दर्शाती है.

प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उत्पाद शुल्क विभाग से जुड़े सभी लाइसेंसधारियों को समय पर और सरल प्रक्रिया के माध्यम से बैंक गारंटी उपलब्ध हो, ताकि सरकारी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।


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पहले मनाई शादी की सालगिरह, फिर 24 घंटे बाद उठाया खौफनाक कदम… सुसाइड नोट पढ़कर रो पड़ा परिवार

उत्तर प्रदेश समाचार: उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है. यहां एक 23 वर्षीय विवाहित महिला ने अपनी पहली शादी की सालगिरह मनाने के 24 घंटे बाद ही आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया है. मृतिका ने मरने से पहले एक भावनात्मक सुसाइड नोट भी छोड़ा है, जिसमें उसने अपने पति से उसकी डेढ़ माह की मासूम बेटी का ख्याल रखने की गुहार लगाई है. इस नोट को पढ़कर हर किसी की आंखें नम हो गईं. फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है.

सालगिरह मनाने के अगले दिन उठाया आत्मघाती कदम
जानकारी के मुताबिक, हरदोई जिले के अजमतपुर गांव के रहने वाले विशाल और प्रियंका की शादी करीब एक साल पहले हुई थी. शनिवार को दोनों ने अपनी शादी की पहली सालगिरह पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाई. लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले ही दिन इतना बड़ा हादसा हो जाएगा. रविवार की दोपहर घर के पुरुष काम पर गये थे और महिलाएं बकरियां चराने के लिए बाहर गयी थीं. इसी बीच प्रियंका ने घर के कमरे में साड़ी से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

भाभी ने देखा दर्दनाक मंजर.
कुछ देर बाद जब भाभी घर से लौटी तो देखा कि डेढ़ माह की बच्ची जोर-जोर से रो रही है। उसने कमरे में झांककर देखा तो प्रियंका का शव फंदे से लटक रहा था। यह नजारा देख घर में हड़कंप मच गया और परिजन तुरंत मौके पर पहुंच गए। घटना की सूचना पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

सुसाइड नोट ने सभी को भावुक कर दिया
पुलिस को मौके से प्रियंका का एक सुसाइड नोट भी मिला। इस नोट में प्रियंका ने लिखा है, मेरी प्यारी बेटी का ख्याल रखना. तुम्हें कुछ समझ नहीं आया और तुमने कुछ किया नहीं तो बिट्टी का ख्याल कौन रखेगा। खुशी से जियो दोस्त. चलो बाय। नोट के अंत में उसने बाबूजी भी लिखा है, जिसे पुलिस जांच का हिस्सा बना रही है.

हत्या या आत्महत्या, जांच में जुटी पुलिस
इस घटना के बाद मायके और ससुराल पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है. मृतका की मां गीता का आरोप है कि विशाल दहेज में बाइक और सोने की चेन की मांग करता था, इसलिए प्रियंका को प्रताड़ित करता था। उनका कहना है कि प्रियंका की हत्या की गई है. वहीं पति विशाल का कहना है कि प्रियंका मानसिक तनाव में थी और इसी कारण उसने यह कदम उठाया। अतरौली थाना प्रभारी सतीश चंद्र ने बताया कि पुलिस ने सुसाइड नोट कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। नोट की लिखावट का मिलान किया जाएगा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि यह आत्महत्या का मामला है या इसके पीछे कोई और वजह है.

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मुजफ्फरनगर में अवैध पशु तस्करी का भंडाफोड़: पुलिस ने 14 पशुओं से लदी दो पिकअप पकड़ी, चार आरोपी गिरफ्तार

अवैध पशु तस्करी मुजफ्फरनगर नगर कोतवाली पुलिस के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। जिले में अवैध पशु तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दो पिकअप वाहनों को पकड़ा, जिनमें 14 पशु अवैध रूप से लदे हुए थे. इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जिन्हें बाद में कोर्ट में पेश किया गया.

पुलिस की इस कार्रवाई को जिले में पशु तस्करी के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान में अहम कदम माना जा रहा है. पशु तस्करी की लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने निगरानी और चेकिंग अभियान तेज कर दिया है.


चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस को बड़ी सफलता मिली

अवैध पशु तस्करी मुजफ्फरनगर नगर कोतवाली पुलिस को इस मामले में अहम सफलता तब मिली जब नियमित चेकिंग अभियान के दौरान संदिग्ध वाहनों पर नजर रखी जा रही थी.

पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ लोग अवैध रूप से वाहनों में पशुओं को लादकर दूसरे जिले में ले जा रहे हैं. सूचना मिलते ही पुलिस टीम सक्रिय हो गई और त्वरित कार्रवाई करते हुए इलाके में सघन चेकिंग शुरू कर दी.

इसी बीच पुलिस कटीण कटौती दो बोलेरो पिकअप गाड़ियों को रोककर उनकी जांच की। जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए उससे पूरा मामला साफ हो गया.


दो पिकअप वाहनों में 14 पशु मिले

पुलिस ने दोनों वाहनों को रोककर तलाशी ली 14 जानवर अवैध रूप से भरा हुआ पाया गया। इन मे एक भैंस, छह कटड़े और सात कटड़े शामिल थे.

पुलिस के मुताबिक, इन जानवरों को बेहद खराब और असुरक्षित हालात में गाड़ियों में भरा गया था, जिससे जानवरों के साथ क्रूरता होने की आशंका थी.

इस मामले में पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गाड़ियों में मौजूद सभी लोगों को हिरासत में ले लिया और जानवरों को सुरक्षित बाहर निकाला.


मौके से चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया

अवैध पशु तस्करी मुजफ्फरनगर इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई:

  • मोहम्मद असगर का पुत्र शाहिदनिवासी खादरवाला

  • मोहम्मद तौफीक का पुत्र इमराननिवासी बागोवाली

  • वसीम पुत्र शफीकबजहेड़ी निवासी

  • अज़हर हसन का पुत्र अथरहसननिवासी खालापार

पुलिस के मुताबिक आरोपी मो सहारनपुर की ओर ले जा रहे थे. हालांकि प्रारंभिक पूछताछ में यह स्पष्ट नहीं हो सका कि पशुओं को किस मकसद से ले जाया जा रहा था।


वाहन के कागजात न मिलने पर पिकअप जब्त कर ली गई

पुलिस ने जब दोनों वाहनों के चालकों से संबंधित दस्तावेज मांगे तो वे मौके पर जरूरी दस्तावेज नहीं दिखा सके।

इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की और दोनों बोलेरो पिकअप वाहन को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 207 के तहत जब्त किया गया।

जब्त किए गए वाहनों के नंबर इस प्रकार हैं:

वाहनों को जब्त कर लिया गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.


पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है

अवैध पशु तस्करी मुजफ्फरनगर मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 का धारा 11(ई)/3 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पशु क्रूरता या अवैध परिवहन के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी.

इस मामले में पुलिस द्वारा आगे की जांच भी की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस तस्करी के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है.


थाना प्रभारी के नेतृत्व में हुई कार्रवाई

यह पूरी कार्रवाई थाना प्रभारी बब्लू सिंह वर्मा के नेतृत्व में किया गया।

पुलिस टीम में शामिल अधिकारी व कर्मचारी:

  • अवर निरीक्षक मोहित कुमार

  • बच्चू सिंह

  • सहीराम नगर

  • सिपाही रहीस आजम

  • राजू सिंह

  • अशोक राणा

  • पवन सोलंकी

शामिल रहें.

पुलिस टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार करने और पशुओं को सकुशल बरामद करने में अहम भूमिका निभाई.


कोर्ट में पेशी के बाद जेल भेज दिया गया

गिरफ्तार सभी आरोपियों को पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद न्यायालय में पेश किया.

कोर्ट में पेश होने के बाद सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और ऐसे मामलों में कोई ढिलाई नहीं बरती जायेगी.


अवैध पशु तस्करी पर पुलिस की कड़ी नजर है

अवैध पशु तस्करी मुजफ्फरनगर इसे रोकने के लिए पुलिस लगातार सघन चेकिंग अभियान चला रही है.

संदिग्ध वाहनों की जांच और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस टीमों को सक्रिय कर दिया गया है।

पुलिस का कहना है कि अवैध पशु तस्करी न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि जानवरों के प्रति क्रूरता का मामला भी है, इसलिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी.


मुजफ्फरनगर पुलिस की इस कार्रवाई से अवैध पशु तस्करी से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है. पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए लगातार चेकिंग अभियान जारी रहेगा. साथ ही आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि अगर उन्हें अवैध पशु तस्करी या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो वे तुरंत पुलिस को सूचित करें, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके और जानवरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

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यूपी में संपत्ति बेचने से पहले बड़ा नियम…खतौनी में नाम नहीं तो रजिस्ट्री भी नहीं.

उत्तर प्रदेश समाचार: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मंगलवार को हुई अहम कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए. इस बैठक में कुल 31 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें से 30 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई, जबकि 3 प्रस्तावों को फिलहाल रोक दिया गया है. कैबिनेट ने प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव कर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने का फैसला किया है. इसके तहत अब किसी भी संपत्ति को बेचने से पहले खतौनी में विक्रेता के नाम का मिलान किया जाएगा। इसके अलावा ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए गांव-गांव तक छोटी बसें चलाने की योजना को भी मंजूरी दी गई है.

संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया में बड़ा बदलाव
कैबिनेट बैठक में संपत्ति संबंधी पंजीकरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए नया नियम लागू करने का फैसला लिया गया है. अब किसी भी संपत्ति की बिक्री से पहले खतौनी और अन्य दस्तावेजों में विक्रेता के नाम का मिलान किया जाएगा। यदि दोनों जगह नाम अलग-अलग मिला तो मामले की जांच कराई जाएगी। इस नई व्यवस्था का मकसद संपत्ति की खरीद-बिक्री में धोखाधड़ी पर अंकुश लगाना है.

खतौनी सत्यापन के बाद ही पंजीकरण संभव हो सकेगा
नए नियम के मुताबिक, अब खतौनी की जांच पूरी होने के बाद ही किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री हो सकेगी. पहले सिर्फ आधार कार्ड और वोटर आईडी के आधार पर ही रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी की जाती थी. लेकिन अब स्टांप एवं निबंधन विभाग सबसे पहले संपत्ति बेचने वाले व्यक्ति की पहचान खतौनी में दर्ज नाम से मिलान करेगा। इसके बाद विभाग संपत्ति के वास्तविक स्वामित्व की भी जांच करेगा. यदि स्वामित्व की पुष्टि नहीं हुई तो पंजीकरण नहीं किया जाएगा।

स्टांप ड्यूटी और विकास शुल्क में भी बदलाव
कैबिनेट बैठक में सर्किल रेट से जुड़े शुल्कों में भी बदलाव किया गया है. पहले एक प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क और दो प्रतिशत विकास शुल्क से संबंधित राशि नगर निकायों को यूसी जारी होने के बाद दी जाती थी. अब यह राशि छमाही आधार पर जारी की जाएगी। साथ ही स्टांप ड्यूटी सर्किल रेट के आधार पर ही लागू होगी और नगर निगम क्षेत्र के अंदर दो प्रतिशत विकास शुल्क अलग से लिया जाएगा.

हर गांव तक बस सेवा पहुंचेगी
कैबिनेट ने ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना के तहत राज्य के 59,163 गांवों तक बस सेवा पहुंचाने की योजना बनाई गई है. वर्तमान में 12 हजार से अधिक गांव ऐसे हैं जहां बस सेवा उपलब्ध नहीं है। नई योजना के तहत हर ग्राम सभा तक छोटी बसें चलाई जाएंगी। सरकार इस सेवा पर कोई टैक्स नहीं लेगी और निजी बस सेवाओं को भी इसमें शामिल करने का प्रयास किया जाएगा.

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मुजफ्फरनगर में भारत विकास परिषद की भव्य समीक्षा बैठक, वर्ष के कार्यों का बुलेटिन एवं ई-पत्रिका ‘ज्ञानोदय’ का विमोचन

भारत विकास परिषद मुजफ्फरनगर समीक्षा बैठक रेलवे रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में एक भव्य समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारत विकास परिषद, हस्तिनापुर (विकास रत्न) प्रान्त इसका आयोजन मुजफ्फरनगर जिला कार्यकारिणी के तत्वाधान में किया गया तथा विभिन्न शाखाओं के पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य वर्ष भर किये गये सामाजिक एवं सेवा कार्यों की समीक्षा करना, संगठन की उपलब्धियों को साझा करना एवं भविष्य के लिए नई योजनाओं एवं सेवा संकल्पों पर चर्चा करना था। बैठक में उपस्थित सदस्यों में उत्साह एवं सकारात्मक ऊर्जा का माहौल देखा गया।


समयपालन पुरस्कारों से उत्साह बढ़ा

भारत विकास परिषद मुजफ्फरनगर की समीक्षा बैठक इसकी शुरुआत गरिमामय माहौल में हुई. कार्यक्रम में समय की पाबंदी को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष पुरस्कार भी दिए गए, जिससे सदस्यों में उत्साह का माहौल बना रहा।

प्रोग्राम चला रहा हूँ जिला सहसंयोजक विशाल शर्मा इसे बहुत प्रभावी ढंग से किया. उनके आचरण ने पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित एवं आकर्षक बना दिया।


कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और वंदे मातरम से हुई.

कार्यक्रम की शुरूआत पारंपरिक तरीके से दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बा श्रीमती सुषमा खंडेलवाल, संध्या गुप्ता और रुचि अग्रवाल सुमधुर द्वारा प्रस्तुत किया गया वंदे मातरम् गीत पूरे माहौल को देशभक्ति और प्रेरणा से भर दिया।

इस प्रस्तुति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया तथा उपस्थित सभी सदस्यों ने तालियों से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।


साल भर के कार्यों का विशेष बुलेटिन जारी

भारत विकास परिषद मुजफ्फरनगर की समीक्षा बैठक इस दौरान एक अनोखी पहल देखने को मिली. मुजफ्फरनगर की जिला कार्यकारिणी ने पहली बार साल भर में किए गए सेवा कार्यों और गतिविधियों की एक विशेष सूची जारी की है। बुलेटिन प्रकाशित.

यह बुलेटिन प्रांतीय अधिकारियों के कर आयुक्तों द्वारा जारी किया गया था। इसमें संस्था द्वारा किये गये विभिन्न सामाजिक कार्यों, सेवा अभियानों एवं उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया।


ई-पत्रिका ‘ज्ञानोदय’ का विमोचन भी हुआ

बैठक के दौरान ई-पत्रिका ‘ज्ञानोदय’ रिहा भी कर दिया गया. इस मौके पर प्रांतीय नेतृत्व के साथ ही ई-पत्रिका के संपादक मो अचिन अग्रवाल भी मौजूद थे.

ई-पत्रिका का उद्देश्य संगठन की गतिविधियों, सामाजिक पहलों एवं प्रेरणादायक कार्यों को व्यापक स्तर पर साझा करना है, जिससे समाज में सेवा भावना एवं जागरूकता को बढ़ावा दिया जा सके।


जिला संयोजक प्रवीण गुप्ता ने आभार व्यक्त किया

कार्यक्रम में जिला संयोजक प्रवीण गुप्ता अपने संबोधन में उन्होंने वर्ष भर मिले सहयोग के लिए सभी शाखाओं एवं पदाधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया.

उन्होंने कहा कि संस्था की सफलता सभी सदस्यों के सामूहिक प्रयास एवं सेवा भावना का परिणाम है। उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाली शाखाओं को सम्मानित भी किया और भविष्य में भी इसी प्रकार समाज सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।


रक्तदान अभियान में उत्कृष्ट योगदान के लिए पुरस्कार

भारत विकास परिषद मुजफ्फरनगर की समीक्षा बैठक कार्यक्रम के दौरान रक्तदान अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को सम्मानित भी किया गया।

प्रान्तीय संयोजक (रक्तदान) सचिन सिंघल अधिक से अधिक संख्या में रक्त यूनिट एकत्रित करना समाधान शाखा गौरवशाली स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया।

यह सम्मान रक्तदान के क्षेत्र में संस्था के महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है तथा समाज में मानव सेवा की भावना को बढ़ावा देने का संदेश देता है।


सक्रिय सदस्यों एवं सहयोगियों को भी सम्मान मिला

बैठक में जिला कार्यकारिणी के सक्रिय एवं ऊर्जावान सदस्यों के साथ-साथ संगठन के प्रबुद्ध सहयोगियों को भी उनके विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

इस सम्मान ने न केवल उन्हें प्रोत्साहित किया बल्कि अन्य सदस्यों को भी समाज सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।


प्रांतीय पदाधिकारियों ने दी प्रेरणादायी सीख

कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रांतीय अध्यक्ष इं सरल माधवप्रांतीय महासचिव अरुण खंडेलवाल और प्रांतीय उपाध्यक्ष सुगंध जैन अपने प्रेरक उद्बोधन से उपस्थित सदस्यों का मार्गदर्शन किया।

उन्होंने जनपद मुजफ्फरनगर की कार्यप्रणाली एवं सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संगठन की यह सक्रियता समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

उन्होंने भविष्य में भी सेवा एवं सामाजिक कार्यों को और अधिक विस्तार देने का आह्वान किया।


कार्यक्रम का समापन सामुदायिक भोज के साथ हुआ।

भारत विकास परिषद मुजफ्फरनगर की समीक्षा बैठक अंत में जिला मीडिया प्रभारी अकुल अग्रवाल सभी उपस्थित अतिथियों एवं सदस्यों का आभार व्यक्त किया।

इसके बाद सभी सदस्यों ने सामूहिक रूप से स्व स्नेह भोज भाग लिया और आपसी संवाद के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।


मुजफ्फरनगर में आयोजित भारत विकास परिषद की यह समीक्षा बैठक सेवा, सहयोग और संगठनात्मक एकता का एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी। वर्ष भर किए गए कार्यों का बुलेटिन और ई-पत्रिका ‘ज्ञानोदय’ के विमोचन के साथ संगठन ने समाज सेवा के अपने संकल्प को और मजबूत किया। इस आयोजन से न केवल सदस्यों को नई ऊर्जा मिली बल्कि भविष्य में समाज हित में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा भी मिली।

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तेंदुआ अपने बेटे को जबड़े में पकड़कर ले जा रहा था…मां पिंकी ने अपनी जान जोखिम में डालकर अपने बेटे को छीन लिया.

उत्तर प्रदेश समाचार: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के ठाकुरद्वारा कोतवाली क्षेत्र से प्यार और साहस की एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है. यहां एक आदमखोर तेंदुए ने चार साल के मासूम बच्चे पर हमला कर दिया और उसे जबड़े में दबाकर जंगल की ओर ले जाने लगा. यह देख बच्चे की मां पिंकी बिना एक पल गंवाए तेंदुए से भिड़ गई। मां की हिम्मत के चलते आखिरकार तेंदुए को पीछे हटना पड़ा और बच्चे को लहूलुहान हालत में छोड़कर जंगल की ओर भाग गया. इस घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है, वहीं लोग मां की बहादुरी की तारीफ कर रहे हैं.

अंधेरे का फायदा उठाकर तेंदुआ कॉलोनी में घुस गया
यह घटना ठाकुरद्वारा क्षेत्र के दलपतपुर गांव में हुई. कल रात से ही गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है. किसान रवि सैनी का घर गांव के अंतिम छोर पर स्थित है. बताया जा रहा है कि उनका चार साल का बेटा मोक्ष घर के बाहर अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था. उसी समय झाड़ियों में छिपे तेंदुए ने अचानक हमला कर दिया। तेंदुए ने मासूम मोक्ष की गर्दन अपने जबड़ों में पकड़ ली और उसे लेकर जंगल की ओर भागने लगा।

माँ के साहस के कारण तेंदुए को शिकार छोड़ना पड़ा
बच्ची की चीख सुनते ही उसकी मां पिंकी मौके पर पहुंच गई। वह बिना डरे सीधे तेंदुए से भिड़ गई और अपने बेटे को बचाने की कोशिश की. मां की इस हिम्मत के आगे आखिरकार तेंदुए को पीछे हटना पड़ा. वह बच्चे को घायल अवस्था में छोड़कर जंगल की ओर भाग गया। इस दौरान शोर सुनकर गांव के लोग भी लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंच गए।

मासूम बच्चे को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया
घटना के बाद घायल बच्चे को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया. उसकी हालत गंभीर देख डॉक्टरों ने उसे निजी अस्पताल रेफर कर दिया। फिलहाल मासूम मोक्ष अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है. इस घटना के बाद से गांव में डर का माहौल है और लोग अपने बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं.

ग्रामीणों का वन विभाग पर गुस्सा
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. हालांकि, रात होने के कारण तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू नहीं किया जा सका. इस घटना के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति आक्रोश देखा जा रहा है. अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने और अकेले बाहर न निकलने की सलाह दी है। साथ ही तेंदुए को पकड़ने के लिए गांव के आसपास पिंजरे लगाने की भी योजना बनाई जा रही है.

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ऑपरेशन चक्रव्यूह के तहत भोपा मुजफ्फरनगर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, दो वारंटी अभियुक्तों को गिरफ्तार कर भेजा गया जेल

ऑपरेशन चक्रव्यूह थाना भोपा पुलिस द्वारा अपराधियों के विरुद्ध चलाये जा रहे अभियान के तहत। मुजफ्फरनगर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो वारंटी आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया.

जिले में अपराध नियंत्रण और फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है. इसी क्रम में न्यायालय द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के अनुपालन में यह कार्रवाई की गयी.


वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में चलाया गया अभियान

यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में की गई. भोपा थाने के प्रभारी निरीक्षक मो जसवीर सिंह एमआर के नेतृत्व में पुलिस टीम ने वारंटी अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाया.

पुलिस टीम ने आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की और उनकी गतिविधियों पर नजर रखते हुए उन्हें उनके घरों से गिरफ्तार कर लिया.


दो वारंटी अभियुक्त गिरफ्तार

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये गये आरोपियों में मो मिंटू पुत्र जगदीश निवासी ग्राम मोरना, थाना भोपा और सुमित उर्फ ​​सुनीत पुत्र वीर सिंह निवासी जीवनपुरी, थाना रामराज। शामिल हैं।

दोनों आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था. पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए दोनों को हिरासत में ले लिया.


गिरफ्तारी के बाद कोर्ट में पेश किया गया

ऑपरेशन चक्रव्यूह भोपा पुलिस पुलिस ने ऑपरेशन के तहत गिरफ्तार दोनों आरोपियों के खिलाफ आवश्यक वैधानिक कार्रवाई पूरी की.

इसके बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से आगे की प्रक्रिया के तहत दोनों को जेल भेज दिया गया.


पुलिस टीम की अहम भूमिका रही

इस गिरफ्तारी अभियान को सफल बनाने में पुलिस टीम की अहम भूमिका रही. गिरफ्तारी टीम में सब इंस्पेक्टर सपन चौधरी, सब इंस्पेक्टर साजिद खान, सब इंस्पेक्टर पिंटू चौधरी और कांस्टेबल देशराज। अन्य पुलिसकर्मी भी शामिल थे.

इन सभी ने आपसी समन्वय से कार्य करते हुए वारंटी अभियुक्त को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की।


अपराधियों के खिलाफ अभियान जारी है

ऑपरेशन चक्रव्यूह भोपा पुलिस इसके तहत जिले में फरार अपराधियों और वारंटी आरोपियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है.

पुलिस का कहना है कि इस तरह के ऑपरेशन का मकसद कानून व्यवस्था बनाए रखना और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है.


ऑपरेशन चक्रव्यूह के तहत भोपा पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई से साफ पता चलता है कि जिले में अपराधियों के खिलाफ पुलिस की कड़ी निगरानी चल रही है। वारंटी अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार अभियान चलाकर कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास कर रही है.

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अब, यूपी में कोई फर्जी संपत्ति पंजीकरण नहीं | यूपी कैबिनेट के बड़े फैसले – अब नहीं हो सकेगी किसी भी संपत्ति की फर्जी रजिस्ट्री.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ- इंडिया टीवी हिंदी
छवि स्रोत: पीटीआई
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट में आज कई बड़े फैसले लिए गए. स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग मंत्री ने कहा कि अब प्रदेश में संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को बेहद सख्त कर दिया गया है. धोखाधड़ी रोकने के लिए अब स्टांप पेपर तभी जारी किया जाएगा, जब विक्रेता यह साबित कर दे कि वह उस संपत्ति का असली मालिक है। इसके लिए पंजीकरण से पहले विक्रेता के नाम का मिलान ‘खतौनी’ (राजस्व अभिलेख) से अनिवार्य रूप से किया जाएगा। पहले सिर्फ आधार कार्ड और पहचान पत्र के आधार पर ही स्टांप मिलता था, लेकिन अब इस नए नियम से किसी दूसरे की जमीन बेचना असंभव हो जाएगा.

सीएम ग्राम परिवहन योजना को मंजूरी

वहीं, कैबिनेट बैठक में सीएम ग्राम परिवहन योजना को भी मंजूरी दे दी गई. इस संबंध में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने घोषणा की कि राज्य की 59,163 ग्राम सभाओं को सीधे बस सेवा से जोड़ा जाएगा. सरकार की योजना है कि यूपी के हर गांव में दिन में कम से कम दो बार बसें उपलब्ध हों, ताकि ग्रामीणों का आवागमन आसान हो सके। इस योजना के तहत अब गांव सीधे ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय से जुड़ जायेंगे. इससे ग्रामीणों को काफी फायदा होगा. उनके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए यात्रा करना आसान हो जाएगा। साथ ही परिवहन विभाग ने ओला और उबर जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियों पर शिकंजा कसते हुए साफ कर दिया है कि अब उन्हें उत्तर प्रदेश में अपना अनिवार्य रजिस्ट्रेशन कराना होगा. बिना राज्य पंजीकरण के ये कैब अब यूपी की सीमा में संचालित नहीं हो सकेंगी।

कर्मचारियों के लिए सख्त निवेश नियम

संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने प्रशासनिक एवं सामाजिक सुधारों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकारी कर्मचारियों के कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए अब उन्हें हर साल अपनी अचल संपत्ति की घोषणा करनी होगी. इसके अलावा अगर कोई कर्मचारी अपनी 6 महीने की बेसिक सैलरी से ज्यादा रकम शेयर बाजार या किसी अन्य माध्यम में निवेश करता है तो उसे इसकी जानकारी सरकार को देना अनिवार्य होगा।

कांशीराम आवास योजना के भवनों की पुताई

आवास के क्षेत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि कांशीराम आवास योजना की इमारतों को रंगा जाएगा और ये घर दलितों के लिए सुरक्षित होंगे; इन मकानों में अवैध रूप से रह रहे लोगों को वहां से हटाया जाएगा। इसके साथ ही अयोध्या में स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए 2500 वर्ग मीटर जमीन दी जाएगी.

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कागजों पर बनाई कंपनी, सरकार से ले लिए 59 लाख रुपये…बरेली के फरजान का बड़ा जीएसटी खेल उजागर

उत्तर प्रदेश समाचार: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में फर्जी कंपनियों के जरिए लाखों रुपये के जीएसटी घोटाले का मामला सामने आया है. इस मामले में क्राइम ब्रांच और किला थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में पता चला है कि इस गिरोह ने कागजों पर फर्जी कंपनियां बनाकर 59 लाख रुपये से ज्यादा का इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड हासिल किया था. पुलिस के मुताबिक इस पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपी फरजान हाशमी है, जो फिलहाल फरार है. पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है और उम्मीद है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.

कागजों पर फर्जी फर्म बनाई गई
पुलिस जांच में पता चला कि किला थाना क्षेत्र के बड़ा बाजार निवासी फरजान हाशमी ने कागजों पर ‘एफएस ट्रेडर्स’ नाम से फर्म तैयार की थी। दरअसल इस फर्म का धरातल पर कोई अस्तित्व ही नहीं था। वहां न तो कोई दुकान थी और न ही कोई गोदाम. जब राज्य कर विभाग को इस फर्म के लेनदेन पर संदेह हुआ, तो उन्होंने इसकी जांच शुरू कर दी। जांच में पता चला कि फरजान ने अपने साथियों के साथ मिलकर कई अन्य फर्जी कंपनियों से कागजी लेन-देन दिखाया था.

जीएसटी रिटर्न के जरिए किया गया फर्जीवाड़ा
आरोपियों ने जीएसटी पोर्टल पर फर्जी तरीके से जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-2 रिटर्न दाखिल किया। इन कागजी लेन-देन के आधार पर उन्होंने विभाग से 59,17,093 रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया। यह रकम सीधे सरकारी खजाने से निकाली गई थी। मामला सामने आने के बाद राज्य कर विभाग के अधिकारी अनूप कुमार की शिकायत पर सितंबर 2025 में किला थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था. इसके बाद पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया.

व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग से खुला राज!
एसआईटी के मुख्य जांचकर्ता इंस्पेक्टर संजय कुमार धीर और उनकी टीम ने डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया. मोबाइल नंबरों और ऑनलाइन गतिविधियों की जांच के बाद पुलिस को इस गिरोह के बारे में अहम जानकारी मिली. देर रात पुलिस ने किला इलाके से सद्दाम हुसैन और मोहम्मद समद उर्फ ​​शाहरुख को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में सद्दाम ने बताया कि वह फर्जी पहचान से लिए गए सिम कार्ड के जरिए जीएसटी रिटर्न दाखिल करता था.

मोबाइल डेटा से और भी राज खुल सकते हैं
पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से कई डिलीट की गई व्हाट्सएप चैट और वॉयस रिकॉर्डिंग भी मिलीं। इन रिकॉर्डिंग्स में फर्म की लॉगइन आईडी और पासवर्ड को लेकर बातचीत हो रही थी. दूसरे आरोपी शाहरुख ने भी पूछताछ में बताया कि वह फरजान के कहने पर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था और बदले में नकद लेता था. पुलिस ने दोनों आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा ताकि डिलीट किए गए डेटा को भी रिकवर किया जा सके.

फरार मुख्य आरोपी की तलाश जारी है
इस पूरी कार्रवाई को एसएसपी बरेली के निर्देशन और एसपी क्राइम के नेतृत्व में गठित टीम ने अंजाम दिया. टीम में इंस्पेक्टर संजय कुमार धीर, सब इंस्पेक्टर वीरभद्र सिंह, सर्विलांस सेल के सतेंद्र कुमार, हेड कांस्टेबल सतेंद्र और विकास कुमार शामिल थे। पुलिस का कहना है कि मुख्य आरोपी फरजान हाशमी अभी भी फरार है और उसकी तलाश जारी है. उनकी गिरफ्तारी के बाद इस पूरे जीएसटी घोटाले से जुड़े और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है.

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