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33 करोड़ रुपए की किताबें, लेकिन फायदा कितना? पूर्वांचल विश्वविद्यालय पर उठे बड़े सवाल, कुलपति का चौंकाने वाला जवाब

जौनपुर समाचार: उत्तर प्रदेश के जौनपुर स्थित वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की विवेकानन्द सेंट्रल लाइब्रेरी को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। 2017 से 2022 के बीच 33 करोड़ रुपये से ज्यादा की वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं. इस मामले से शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है. शिकायत मिलने के बाद राजभवन ने यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा है. आरोप है कि ई-संसाधनों पर करोड़ों रुपये खर्च किये गये, लेकिन इसका लाभ छात्रों को नहीं मिला. वहीं, यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि बिना जांच के कुछ भी कहना ठीक नहीं होगा और मामले की जांच चल रही है.

33 करोड़ रुपये से अधिक के खर्च पर उठे सवाल
पूरा मामला पूर्वांचल विश्वविद्यालय के विवेकानन्द सेंट्रल लाइब्रेरी से जुड़ा है. आरोप है कि पांच साल में पाठ्य पुस्तकों, संदर्भ पुस्तकों, ऑफलाइन जर्नल और ई-संसाधनों पर 33 करोड़ 29 लाख 27 हजार 437 रुपये खर्च किये गये. इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद भी इसका सही इस्तेमाल हुआ या नहीं, इस पर कई सवाल उठ रहे हैं.

ई-संसाधन का उपयोग नहीं करने का आरोप
शिकायतकर्ता अजय सिंह का कहना है कि ई-संसाधनों पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये का आज तक उपयोग नहीं किया गया। उनका आरोप है कि छात्रों को इन डिजिटल सुविधाओं तक पहुंच नहीं दी गई। इसे लेकर उन्होंने राजभवन में शिकायत दर्ज करायी, जिसके बाद विश्वविद्यालय से नौ बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है.

2022 से चल रही जांच पर भी सवाल उठ रहे हैं
शिकायतकर्ता का कहना है कि इस मामले की 2022 से जांच चल रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. उन्होंने आरोप लगाया कि राजभवन और विश्वविद्यालय मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं और लीपापोती की जा रही है.

कुलपति ने दी सफाई
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.वंदना सिंह ने कहा कि पुस्तकालय में पुस्तकें उपलब्ध हैं और छात्र उनका उपयोग भी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यह खरीदारी प्रो. मानस पांडे के कार्यकाल में हुई थी, इसलिए उनसे भी रिपोर्ट मांगी गयी है. कुलपति के मुताबिक अब एक कमेटी बनाई जाएगी जो पूरे मामले की जांच करेगी. जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी नतीजे पर पहुंचना ठीक नहीं होगा.

आगे क्या होगा?
अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं. अगर आरोप सही साबित हुए तो यह मामला शिक्षा क्षेत्र में बड़ा घोटाला बन सकता है. फिलहाल यूनिवर्सिटी प्रशासन और राजभवन इस मामले की जांच में जुटा है और उम्मीद है कि जल्द ही सच्चाई सामने आ जाएगी.

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