Breaking News
साइबर ठगों की अब खैर नहीं…लखनऊ के प्रोफेसर ने बनाया खास डिटेक्शन डिवाइस, भारत सरकार ने दिया पेटेंट

लखनऊ समाचार: डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के कानूनी अध्ययन विभाग की टीम ने साइबर क्राइम डिटेक्शन डिवाइस नामक एक विशेष उपकरण तैयार किया है, जिसे भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा आधिकारिक तौर पर पंजीकृत किया गया है। यह उपलब्धि न सिर्फ यूनिवर्सिटी बल्कि पूरे देश के लिए अहम मानी जा रही है। इस डिवाइस के जरिए अब साइबर अपराधों की पहचान और रोकथाम आसान हो सकेगी, जिससे आम लोगों की ऑनलाइन सुरक्षा और मजबूत होगी।

कैसे बनाया गया ये खास उपकरण?
इस डिवाइस को विभागाध्यक्ष एवं शिक्षाविद् डॉ. पीयूष कुमार त्रिवेदी के नेतृत्व में विकसित किया गया है। इस शोध में उनके साथ प्रो. (डॉ.) केबी अस्थाना, स्नेहल अस्थाना और डॉ. शिवली श्रीवास्तव ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस आविष्कार के मुख्य आविष्कारक डॉ. त्रिवेदी हैं। भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा जारी डिज़ाइन पंजीकरण प्रमाणपत्र के अनुसार, इस डिवाइस के डिज़ाइन को आधिकारिक तौर पर मान्यता दी गई है।

इसकी खासियत क्या है?
यह साइबर क्राइम डिटेक्शन डिवाइस आधुनिक तकनीक पर आधारित है। इसकी सबसे बड़ी खासियत रियल टाइम डिटेक्शन है यानी यह साइबर क्राइम की तुरंत पहचान कर सकता है। इसके साथ ही इसमें रोकथाम व्यवस्था और कानूनी नियमों का पालन भी शामिल है. इससे जांच एजेंसियों को तुरंत कार्रवाई करने में मदद मिलेगी और अपराधियों तक जल्द पहुंच बनेगी.

यह समाज और सुरक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह डिवाइस आम लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, डेटा चोरी और डिजिटल धोखाधड़ी जैसे अपराधों को रोकने में मदद मिलेगी। इससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सबूत इकट्ठा करने और जांच को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी। इससे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित माहौल बनेगा और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में नई दिशा मिलेगी।

क्या कहा कुलपति ने
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह नवाचार विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमता को दर्शाता है और समाज में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *