बिजनोर की सोन पापड़ी को मिली नई पहचान, मशहूर मिठाई ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन डिश’ योजना में शामिल

उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जिला-एक व्यंजन’ योजना के तहत बिजनौर जिले की मशहूर सोन पापड़ी को अब एक नई पहचान मिल गई है. योगी सरकार पारंपरिक व्यंजनों को देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है. इसी कड़ी में नजीबाबाद की प्रसिद्ध सोन पापड़ी को जिले के विशेष व्यंजन के रूप में चुना गया है। करीब 75 साल पुराना इतिहास रखने वाली यह मिठाई अपने खास स्वाद और बारीक परतों के लिए जानी जाती है। इस फैसले से स्थानीय व्यापारियों और मिठाई कारोबार से जुड़े लोगों में खुशी का माहौल है. इससे रोजगार और बिजनेस को भी काफी फायदा मिलने की उम्मीद है.

नजीबाबाद की सोन पापड़ी का इतिहास 75 वर्ष पुराना है।
नजीबाबाद की सोन पापड़ी का स्वाद दशकों से लोगों की पसंद बना हुआ है। कहा जाता है कि इसकी शुरुआत करीब 75 साल पहले चतुर्वेदी मिष्ठान भंडार से हुई थी. बेसन से बनी यह मिठाई अपनी बारीक परतों और मुंह में घुलते ही स्वाद के कारण खास पहचान रखती है. चतुर्वेदी परिवार ने इस मिठाई की परंपरा को आज भी बरकरार रखा है। सोन पापड़ी में सूखे मेवे और इलायची का संतुलित इस्तेमाल इसे अन्य मिठाइयों से अलग बनाता है.

अब सोन पापड़ी 15 किस्मों में उपलब्ध है
पहले सोन पापड़ी मुख्य रूप से गोल आकार में बनाई जाती थी, लेकिन समय के साथ बाजार में कई नए डिजाइन आए। अब यह मिठाई काजू कतली स्टाइल, चौकोर डिजाइन और कई आकर्षक कटिंग में उपलब्ध है। बाजार में इसकी लगभग 15 किस्में उपलब्ध हैं। इनमें चॉकलेट फ्लेवर, ड्राई फ्रूट्स और कई अन्य फ्लेवर शामिल हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह करीब चार महीने तक खराब नहीं होता है, जिससे इसे दूर-दराज के बाजारों में आसानी से भेजा जा सकता है.

निर्यात और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा
अब आधुनिक पैकेजिंग तकनीक के जरिए इसकी ताजगी को लंबे समय तक बरकरार रखा जा रहा है, ताकि इसे वैश्विक निर्यात के लिए तैयार किया जा सके। जिलाधिकारी जसजीत कौर के मुताबिक सोन पापड़ी हर वर्ग के लोगों की पसंदीदा मिठाई है. इसे बच्चे, बूढ़े, अमीर और गरीब सभी पसंद करते हैं। उन्होंने बताया कि इस मिठाई को बिजनौर के विशेष उत्पाद के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इस पहल से लगभग 500 परिवारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है। स्थानीय व्यापारियों को उम्मीद है कि इससे नजीबाबाद की सोन पापड़ी को देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी नई पहचान मिलेगी.

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