आवासीय परियोजनाओं के शुरू होने से पहले प्रमोटरों को फर्म के बैंक खाता नंबर समाचार पत्रों में प्रकाशित करने होंगे। इतना ही नहीं, उन्हें यह अकाउंट नंबर प्रोजेक्ट परिसर में लगे बोर्ड, होर्डिंग और ब्रोशर आदि में भी दर्ज कराना होगा. ताकि बिल्डर के फरार होने या अन्य मामलों में बैंक खातों का पता लगाने में मदद मिल सके। गुरुवार को नए चेयरमैन नरेश सी मठपाल की अध्यक्षता में हुई रेरा की 36वीं बैठक में यह फैसला लिया गया.
गुरुवार को ही नरेश मठपाल को अध्यक्ष बनाया गया है. इस बैठक में खरीदारों के पक्ष में कई अन्य अहम फैसले भी लिए गए हैं. दरअसल, पिछले कुछ सालों में शहर और राज्य के अन्य हिस्सों में बड़े बिल्डरों ने खरीदारों को धोखा दिया है. इस दौरान कई बिल्डर तो फरार भी हो गये. ताजा मामला पुष्पांजलि बिल्डर और शाश्वत गर्ग के प्रोजेक्ट से जुड़ा है. उनके भागने के बाद सबसे बड़ी समस्या उनके खातों का पता लगाने में थी। रेरा की जांच में पता चला था कि इन बिल्डरों की फर्म के अलावा कई अन्य खातों में भी लेनदेन हुआ है। ऐसे में जिस काम में कुछ दिन या महीने लग जाते, उसमें अनावश्यक देरी का सामना करना पड़ता था। ऐसे में रेरा के नए चेयरमैन नरेश मठपाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस संबंध में सख्त फैसला लिया गया है.
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अध्यक्ष मठपाल ने बताया कि रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का पंजीकरण कराने के बाद प्रत्येक प्रमोटर को अपने प्रोजेक्ट से संबंधित बैंक खातों की सार्वजनिक सूचना राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय समाचार पत्र में प्रकाशित कराना अनिवार्य होगा। इसके अलावा इन अकाउंट नंबरों को ब्रोशर और सभी विज्ञापनों में भी लिखना होगा. ताकि, उनकी जानकारी आम लोगों तक पहुंच सके. इससे प्रमोटर द्वारा अन्य खातों में धनराशि प्राप्त करने की संभावना भी समाप्त हो जाएगी। लोग उन्हीं खातों में पैसा जमा करेंगे जिनकी जानकारी सार्वजनिक कर दी गई है.