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उत्तराखंड: गैस संकट के बीच फिर सुलगने लगी कोयले और लकड़ी की भट्टियां, लोगों को याद दिला रही हैं पुराने दिन


एलपीजी की कमी का असर अब कोयला और लकड़ी बाजार पर भी साफ दिखने लगा है। गैस की कमी के कारण होटल, ढाबा संचालक और हलवाई फिर से पारंपरिक साधनों की ओर लौट रहे हैं। खाना पकाने के लिए कोयले और लकड़ी के स्टोव (भट्टियों) की मांग तेजी से बढ़ी है।

लकड़ी कारोबारी सरदार गोविंद सिंह ने बताया कि अब उनके स्टॉल पर छोटी-बड़ी सभी प्रकार की लकड़ी तेजी से बिक रही है. स्थिति यह है कि चीरा लगाने के बाद बचे छोटे-छोटे टुकड़े भी नष्ट हो रहे हैं। मध्यम वर्ग के लोग शाम को खाना बनाने के लिए लकड़ी खरीद रहे हैं तो होटल व ढाबा संचालक भट्ठी के लिए लकड़ी का गोला ले जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बढ़ती मांग के बावजूद ग्राहकों को राहत देने के लिए लकड़ी अभी भी पुराने दाम 15 रुपये प्रति किलो पर ही बेची जा रही है. कोयला कारोबारी गौरव अरोड़ा ने बताया कि फिलहाल पुराना स्टॉक पुराने रेट पर ही बिक रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में कीमतें बढ़ना तय है.

जो कोयला पहले 40 रुपये प्रति किलो मिलता था, वह अब 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि बाहरी राज्यों से आने वाले कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण यह बढ़ोतरी करनी पड़ी है. उन्होंने यह भी कहा कि होटलों में तंदूर के लिए उपयोग किया जाने वाला हार्ड कोक कोयला 40 रुपये प्रति किलोग्राम बेचा जा रहा है, जबकि शीघ्र जलने वाला चारकोल कोयला 50 रुपये प्रति किलोग्राम बेचा जा रहा है.




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गैस संकट, उत्तराखंड में खाना पकाने के लिए कोयले और लकड़ी की मांग बढ़ी, ऋषिकेश समाचार

लकड़ी की मांग बढ़ी – फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


रसोई गैस की कमी ने एक बार फिर लोगों को पुराने दिनों की याद दिला दी है. खासकर मध्यमवर्गीय परिवार गैस सिलेंडर की कमी के कारण अब केरोसिन स्टोव और लकड़ी के स्टोव का सहारा लेने को मजबूर हैं।


गैस संकट, उत्तराखंड में खाना पकाने के लिए कोयले और लकड़ी की मांग बढ़ी, ऋषिकेश समाचार

कोयले की मांग बढ़ी – फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


शहर के कई इलाकों में लोग अपने घरों में रखे पुराने चूल्हों को साफ कर दोबारा इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग बाजार कीमत से ज्यादा कीमत चुकाकर नए चूल्हे खरीद रहे हैं. गैस संकट का सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है. हालांकि कुछ इलाकों में गैस सिलेंडर आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन मध्यम वर्ग के लोगों को ऊंचे दामों पर छोटे सिलेंडर भरवाने से काम चलाना पड़ता है।


गैस संकट, उत्तराखंड में खाना पकाने के लिए कोयले और लकड़ी की मांग बढ़ी, ऋषिकेश समाचार

लकड़ी – फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


मजबूरी में कई परिवार केरोसिन स्टोव में डीजल डालकर खाना बनाने जैसे जोखिम भरे तरीके अपना रहे हैं। झंडा चौक मुख्य बाजार के बर्तन व्यवसायी ऋत्विक ने कहा कि पिछले दस वर्षों से गोदाम में पड़े चूल्हे अब बाहर निकाले जा रहे हैं, मरम्मत की जा रही है और बेची जा रही है। इनकी कीमत 600 से 1200 रुपये तक पहुंच गयी है. उन्होंने कहा कि स्टोव और डीजल भट्टियों की मांग बढ़ने के बावजूद आपूर्ति नहीं मिल पा रही है. बाहरी राज्यों के व्यापारियों का भी कहना है कि उनके पास पर्याप्त स्टॉक नहीं है.

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गैस संकट, उत्तराखंड में खाना पकाने के लिए कोयले और लकड़ी की मांग बढ़ी, ऋषिकेश समाचार

गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान – फोटो: iStock


पहले डीजल भट्ठी करीब 7 हजार रुपये में मिलती थी। अब यह 25 हजार रुपये तक पहुंच गया है. होटल व्यवसायी भी इन्हें तीन गुना कीमत देकर खरीदने को मजबूर हैं। एलपीजी की कमी ने लोगों की रसोई और बजट दोनों पर बुरा असर डाला है, जिससे आम लोगों की जिंदगी प्रभावित हो रही है.


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