नल से निकल रहा काला पानी…नोएडा के इन सेक्टरों में 6 दिनों से परेशानी, प्रशासन क्या कर रहा है?

नोएडा समाचार: नोएडा के सेक्टर 19 और सेक्टर 40 में पिछले 6 दिनों से हो रही गंदे पानी की सप्लाई ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. टंकियों में पीला, मटमैला और काले रंग का पानी आने से इलाके में हड़कंप मच गया है. निवासियों का कहना है कि यह पानी न तो पीने योग्य है और न ही उपयोग के लायक है। बदबूदार पानी के कारण कई परिवार बाजार से पानी खरीदने को मजबूर हैं. गर्मी के बीच इस संकट ने स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों वाले परिवारों में डर का माहौल है.

लगातार 6 दिनों से गंदे पानी की समस्या
स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले छह दिनों से पानी की स्थिति काफी खराब है. कभी हल्का पीला पानी आता है तो कभी काला व कीचड़ जैसा। कुछ देर के लिए पानी साफ हो जाता है, लेकिन फिर वही समस्या लौट आती है। लोगों का कहना है कि यह एक दिन की तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी लापरवाही है.

पाइपलाइन लीकेज और रखरखाव पर सवाल
सेक्टर 19 और 40 के रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने पाइपलाइन लीकेज और खराब रखरखाव को मुख्य कारण बताया है। आरडब्ल्यूए अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने बताया कि कई बार लिखित शिकायत देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि पुरानी और जर्जर पाइप लाइन सीवर के संपर्क में आकर पानी को दूषित कर रही है।

सप्लाई के समय भी गंदा पानी
रहवासियों के मुताबिक सुबह 6 से 9 और शाम 6 से 8 बजे तक पानी की सप्लाई की जाती है। सप्लाई शुरू होते ही पानी सबसे गंदा हो जाता है और बाद में थोड़ा साफ हो जाता है। लोगों का सवाल है कि अगर पाइप लाइन खराब है तो उसे अब तक बदला क्यों नहीं गया.

स्वास्थ्य के लिए बढ़ा जोखिम
गंदे पानी से लोगों को बीमारियों का डर सता रहा है। दूषित पानी से पेट में संक्रमण, त्वचा रोग और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। कई परिवार अब पीने और खाना पकाने के लिए पैकेज्ड पानी या फिल्टर का उपयोग कर रहे हैं।

प्राधिकरण की सफ़ाई और कार्रवाई
नोएडा अथॉरिटी के अधिकारी आरपी सिंह के मुताबिक, गर्मी के कारण पाइपों में जमा मिनरल्स और गंदगी पानी में मिल गई, जिससे उसका रंग बदल गया. उन्होंने कहा कि पाइपलाइन की फ्लशिंग करायी गयी है और कई स्थानों पर मरम्मत भी करायी गयी है. फिलहाल दावा किया गया है कि साफ पानी की सप्लाई बहाल कर दी गई है. अथॉरिटी ने कहा है कि अगर कोई शिकायत मिलेगी तो तुरंत टीम भेजकर समस्या का समाधान किया जाएगा.

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विशेष सत्र: सीएम धामी बोले- हम नारी शक्ति के हित में फैसले लेते रहेंगे, जब तक हमें अपना अधिकार नहीं मिल जाता, चैन से नहीं बैठेंगे – उत्तराखंड विधानसभा महिला आरक्षण पर विशेष सत्र सीएम धामी बोले- हम नारी शक्ति के हित में फैसले लेते रहेंगे

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, हमारी सरकार नारी शक्ति के हित में फैसले लेती रहेगी. जब तक महिलाओं को अधिकार नहीं मिल जाता, हम चैन से नहीं बैठेंगे। महिला सशक्तिकरण के प्रयासों में किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए।

विधानसभा के विशेष सत्र में महिला सम्मान-लोकतंत्र अधिकार विषय पर चर्चा के दौरान सीएम ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से लाये गये नारी शक्ति वंदन विधेयक को यथाशीघ्र लागू करने के केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हुए सर्वसम्मति से संकल्प व्यक्त करने का प्रस्ताव रखा. सीएम ने राज्य आंदोलनकारियों के साथ ही उत्तराखंड में नारी शक्ति की प्रतीक गौरा देवी, टिंचरी माई, बिश्नी देवी शाह, जशुली शौक्याण, कुंती वर्मा, भागीरथी देवी, मंगला देवी, हंसा धनाई, सरला बहन, बेलमती चौहान, सुशीला बहन, कमला पंत जैसी महिलाओं को भी श्रद्धांजलि दी।

नारी शक्ति अब केवल भागीदारी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही है। चंद्रयान मिशन से लेकर सेना और वायुसेना तक महिलाएं अग्रिम मोर्चे पर काम कर रही हैं। इसके साथ ही खेलों में भी उनकी अग्रणी भूमिका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल 2023 में नारी शक्ति वंदन कानून लेकर आए थे. इस ऐतिहासिक कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया था. यह प्रयास सिर्फ मातृशक्ति की संख्या बढ़ाने का प्रयास नहीं था, बल्कि नीति-निर्माण प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया एक युगांतरकारी कदम था। 2029 के लोकसभा चुनाव तक देश की आधी आबादी को पूर्ण अधिकार दिलाने के उद्देश्य से 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस ऐतिहासिक संकल्प को साकार करने का निर्णायक प्रयास किया गया। लेकिन विपक्षी दलों ने मिलकर इस ऐतिहासिक और युग परिवर्तनकारी पहल को संसद में पारित नहीं होने दिया. विपक्षी दल के नेता तालियां बजा रहे थे, इस दृश्य ने महाभारत की याद दिला दी, जिसमें द्रौपदी का अपमान किया गया था.

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विपक्ष भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है

सीएम ने कहा, विपक्ष अब महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है. जबकि लोकसभा में ही गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया था कि परिसीमन के जरिए किसी भी राज्य की सीटों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा, इसीलिए बिल में सीटें बढ़ाने का प्रावधान रखा गया है. दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद विपक्ष ने महिलाओं को उनके वास्तविक अधिकार दिलाने के लिए कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। प्रधानमंत्री ने लोकसभा में साफ कहा था कि अगर यह बिल पास होता है तो वह इसका पूरा श्रेय विपक्ष को देने को तैयार हैं.

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33 करोड़ रुपए की किताबें, लेकिन फायदा कितना? पूर्वांचल विश्वविद्यालय पर उठे बड़े सवाल, कुलपति का चौंकाने वाला जवाब

जौनपुर समाचार: उत्तर प्रदेश के जौनपुर स्थित वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की विवेकानन्द सेंट्रल लाइब्रेरी को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। 2017 से 2022 के बीच 33 करोड़ रुपये से ज्यादा की वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं. इस मामले से शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है. शिकायत मिलने के बाद राजभवन ने यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा है. आरोप है कि ई-संसाधनों पर करोड़ों रुपये खर्च किये गये, लेकिन इसका लाभ छात्रों को नहीं मिला. वहीं, यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि बिना जांच के कुछ भी कहना ठीक नहीं होगा और मामले की जांच चल रही है.

33 करोड़ रुपये से अधिक के खर्च पर उठे सवाल
पूरा मामला पूर्वांचल विश्वविद्यालय के विवेकानन्द सेंट्रल लाइब्रेरी से जुड़ा है. आरोप है कि पांच साल में पाठ्य पुस्तकों, संदर्भ पुस्तकों, ऑफलाइन जर्नल और ई-संसाधनों पर 33 करोड़ 29 लाख 27 हजार 437 रुपये खर्च किये गये. इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद भी इसका सही इस्तेमाल हुआ या नहीं, इस पर कई सवाल उठ रहे हैं.

ई-संसाधन का उपयोग नहीं करने का आरोप
शिकायतकर्ता अजय सिंह का कहना है कि ई-संसाधनों पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये का आज तक उपयोग नहीं किया गया। उनका आरोप है कि छात्रों को इन डिजिटल सुविधाओं तक पहुंच नहीं दी गई। इसे लेकर उन्होंने राजभवन में शिकायत दर्ज करायी, जिसके बाद विश्वविद्यालय से नौ बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है.

2022 से चल रही जांच पर भी सवाल उठ रहे हैं
शिकायतकर्ता का कहना है कि इस मामले की 2022 से जांच चल रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. उन्होंने आरोप लगाया कि राजभवन और विश्वविद्यालय मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं और लीपापोती की जा रही है.

कुलपति ने दी सफाई
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.वंदना सिंह ने कहा कि पुस्तकालय में पुस्तकें उपलब्ध हैं और छात्र उनका उपयोग भी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यह खरीदारी प्रो. मानस पांडे के कार्यकाल में हुई थी, इसलिए उनसे भी रिपोर्ट मांगी गयी है. कुलपति के मुताबिक अब एक कमेटी बनाई जाएगी जो पूरे मामले की जांच करेगी. जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी नतीजे पर पहुंचना ठीक नहीं होगा.

आगे क्या होगा?
अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं. अगर आरोप सही साबित हुए तो यह मामला शिक्षा क्षेत्र में बड़ा घोटाला बन सकता है. फिलहाल यूनिवर्सिटी प्रशासन और राजभवन इस मामले की जांच में जुटा है और उम्मीद है कि जल्द ही सच्चाई सामने आ जाएगी.

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कोटद्वार: लैंसडाउन का नाम बदलने के विरोध में बाजार बंद, लोगों ने किया प्रदर्शन, रक्षा मंत्री को भेजा ज्ञापन – कोटद्वार समाचार लैंसडाउन का नाम बदलने के विरोध में बाजार बंद, लोग सड़कों पर उतरे प्रदर्शन

लैंसडाउन का नाम बदलने के प्रस्ताव के विरोध में मंगलवार सुबह से ही सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। व्यापार मंडल, होटल एसोसिएशन, नागरिक मंच ने गांधी चौक से कैंट बोर्ड कार्यालय तक जुलूस निकाला और प्रदर्शन किया। संगठनों की ओर से गांधी चौक पर एक जनसभा का आयोजन भी किया गया, जिसके बाद एसडीएम शालिनी मौर्य के माध्यम से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को ज्ञापन भेजकर लैंसडाउन का नाम यथावत रखने की मांग की गई.


10 अप्रैल को हुई कैंट बोर्ड की बैठक में लैंसडाउन का नाम जसवन्तगढ़ छावनी करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। लैंसडाउन में इस प्रस्ताव के विरोध में उबाल आ गया है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मंगलवार की सुबह व्यवसायी, होटल व्यवसायी व नागरिक मंच से जुड़े लोग सड़क पर उतर आये. स्थानीय नागरिकों एवं जन प्रतिनिधियों ने गांधी चौक पर एक आमसभा का आयोजन किया. उन्होंने लैंसडाउन का नाम बदलने का कड़ा विरोध किया। लैंसडाउन का नाम देश-दुनिया में मशहूर है।

लैंसडाउन का नाम सामने आते ही एक हिल स्टेशन और पर्यटन नगरी का नजारा सामने आता है। कहा कि नाम बदलने की बजाय विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की जरूरत है. प्रदर्शनकारियों ने गांधी चौक से छावनी परिषद कार्यालय तक जुलूस निकालकर अपना विरोध जताया। सभा स्थल पर आकर एसडीएम शालिनी मौर्य ने प्रदर्शनकारियों का ज्ञापन लिया।

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आईपीएस अजय पाल के वीडियो पर भड़के अखिलेश यादव, सीएम योगी को घेरा, बोले- अब दिखाओ अपना जीरो टॉलरेंस.

पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान एक वायरल वीडियो ने राजनीति गरमा दी है. यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा पर टीएमसी उम्मीदवार को धमकी देने का आरोप लगा है. इस मामले ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है और अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि यह मामला सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि से जुड़ा है. वीडियो वायरल होने के बाद पूरे मामले पर बहस तेज हो गई है.

अखिलेश यादव ने उठाए बड़े सवाल
इस मुद्दे पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो से यूपी सरकार की छवि खराब हुई है. उन्होंने अधिकारी को सीएम योगी आदित्यनाथ से जोड़ते हुए कहा कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई से मुख्यमंत्री का रुख स्पष्ट हो जाएगा.

सोशल मीडिया पर पोस्ट कर साधा निशाना
अखिलेश यादव ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि बंगाल चुनाव के दौरान एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का अश्लील वीडियो सामने आया है. उन्होंने कहा कि इससे यूपी के शासन-प्रशासन की छवि खराब हुई है और बीजेपी के महिलाओं के सम्मान के दावों की पोल खुल गई है. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे अधिकारी अपवाद नहीं हैं और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.

कार्रवाई और कड़े बयान की मांग
सपा प्रमुख ने कहा कि अब देखना होगा कि इस अधिकारी के खिलाफ कितनी जल्दी निलंबन या बर्खास्तगी होती है. उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री को इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी होगी और इसे एआई वीडियो कहकर बचाव नहीं करना चाहिए. उनका कहना है कि जीरो टॉलरेंस सिर्फ अपराधियों पर ही नहीं बल्कि ऐसे अधिकारियों पर भी लागू होना चाहिए.

क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, आईपीएस अजय पाल शर्मा को बंगाल के दक्षिण परगना में चुनाव पर्यवेक्षक बनाया गया है. दूसरे चरण के मतदान से पहले उनका एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर के परिवार को कड़ी चेतावनी देते नजर आ रहे हैं. यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है और इसे लेकर विवाद बढ़ गया है.

राजनीतिक माहौल गरमा गया
इस पूरे मामले के बाद राजनीति तेज हो गई है. सपा ने जहां बीजेपी पर निशाना साधा है, वहीं बीजेपी की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. अब सबकी नजर इस पर है कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है.

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मुजफ्फरनगर: श्री वैश्य कुटुंब सेवा समिति ने तीन जरूरतमंद बच्चों को लिया गोद, पूरे साल की फीस, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी की ली जिम्मेदारी

श्री वैश्य कुटुम्ब सेवा समिति द्वारा मुजफ्फरनगर शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरक कदम उठाते हुए तीन जरूरतमंद बच्चों को गोद लिया गया है और उनकी पूरी शैक्षणिक जिम्मेदारी ली गई है। इस पहल के तहत बच्चों की पूरे साल की फीस स्कूल प्रबंधन को सौंपी गई, जबकि उनकी माताओं को स्कूल परिसर में ही यूनिफॉर्म और स्टेशनरी की व्यवस्था की गई. यह सहयोग न सिर्फ आर्थिक मदद है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदना की मिसाल भी बनकर उभरा है। 🌹


सत्र 2026-27 के लिए पूरे वर्ष की फीस स्कूल को सौंप दी गई

समिति द्वारा प्रदेश संयोजक पवन सिंघल के मार्गदर्शन में अंतिम दिन हुआ कुँवर जगदीश प्रसाद सनातन धर्म जूनियर हाई स्कूल में अध्ययनरत तीन बच्चों को शिक्षा सहयोग योजना के तहत गोद लिया गया। इससे पहले भी पिछले सत्र की छह माह की फीस समिति द्वारा वहन की जा चुकी है.

वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बच्चों की पूरे वर्ष की फीस, विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य साधुराम गर्ग विद्यालय परिसर में ही औपचारिक रूप से सौंपा गया। इस मौके पर मौजूद लोगों ने इसे समाज के लिए अनुकरणीय पहल बताया.


स्टेशनरी और वर्दी का खर्च भी परिवार को सौंप दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों की आवश्यक स्टेशनरी एवं यूनिफार्म के लिए निर्धारित राशि सीधे उनकी माताओं को प्रदान की गई। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि किसी भी वित्तीय बाधा के कारण बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो।

समिति के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल फीस भरने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे संबंधित सभी आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।


पिता की मृत्यु के बाद परिवार कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था।

समिति द्वारा गोद लिए गए तीन बच्चे कक्षा 4, 6 और 8 में पढ़ते हैं और मित्तल परिवार से हैं। पिछले साल पिता की मौत के बाद परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा था और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने का डर बढ़ गया था.

ऐसे समय में समिति का सहयोग परिवार के लिए बड़ी राहत बनकर आया। स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना की और इसे सामाजिक संवेदनशीलता का उदाहरण बताया.


समिति पदाधिकारियों ने स्वयं आर्थिक सहयोग कर अपनी जिम्मेदारी निभाई।

कार्यक्रम में मौजूद संस्था के पदाधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से आर्थिक सहयोग किया और रसीदें बच्चों की माताओं को सौंपी गईं। यह सहयोग न केवल औपचारिक था बल्कि व्यक्तिगत भागीदारी का भी प्रतीक था।

यह पहल मुख्य रूप से प्रवीण गुप्ता, रोहिताश कर्णवाल, विनीत गर्ग, पवन सिंघल, शैलेन्द्र कर्णवाल, पीयूष गोयल, इंदु अग्रवाल, निधि अग्रवाल, -विपिन गुप्ता और श्रेय मित्तल सहित अन्य साथियों ने योगदान दिया।

इस अवसर पर सभी सहयोगी उपस्थित रहे और इस सामाजिक पहल के प्रत्यक्ष साक्षी बने।


कार्यक्रम जिले के पदाधिकारियों के नेतृत्व में संपन्न हुआ

कार्यक्रम का नेतृत्व जिला कार्यकारी अध्यक्ष ने किया अजय गर्ग वहीं कार्यक्रम के समापन समारोह में जिला महासचिव मो शैलेन्द्र कर्णवाल उपस्थित सभी सहयोगियों एवं सदस्यों का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में विद्यालय प्रभारी सहित वरिष्ठ पत्रकारों ने भाग लिया। संजय अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति भी रही, जिससे आयोजन को विशेष महत्व मिला।


शिक्षा सहयोग की यह पहल समाज के लिए प्रेरणा बनी।

समिति की इस पहल ने यह संदेश दिया कि सामूहिक प्रयासों से जरूरतमंद परिवारों के बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। सामाजिक संगठनों की ऐसी सक्रिय भागीदारी शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

स्थानीय नागरिकों और समाज के विभिन्न वर्गों ने इस कदम की सराहना की और आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी इसी तरह के सहयोगात्मक कार्यक्रम जारी रहेंगे।


जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेने की श्री वैश्य कुटुंब सेवा समिति की यह पहल सामाजिक एकता, संवेदनशीलता और सहयोग की भावना को मजबूत करने के लिए एक मिसाल बनकर उभरी है। ऐसे प्रयास न केवल बच्चों का भविष्य सुरक्षित करते हैं, बल्कि समाज में शिक्षा के महत्व को एक नई दिशा भी प्रदान करते हैं। 🌹

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बागेश्वर: 10 मिनट तक आए तूफान से जनजीवन अस्त-व्यस्त, एक बच्ची समेत दो घायल; ट्रैफिक रुकने से लगा जाम -बागेश्वर में दस मिनट के तूफान से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया

बागेश्वर जिले में मंगलवार को महज 10 मिनट तक चले भीषण तूफान से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। तूफान से शहर समेत ग्रामीण इलाकों में भारी नुकसान की खबर है. इस प्राकृतिक आपदा में एक खाद्य व्यवसायी और एक लड़की घायल हो गए हैं जबकि कई घरों की छतें उड़ गईं. कई जगहों पर बड़े-बड़े पेड़ गिरने से मुख्य सड़कों पर यातायात ठप हो गया है.




शहर में बैनर लगाकर जीविकोपार्जन करने वाले शिव सिंह नेगी तूफान में उड़ गए और उसकी चपेट में आने से उनका कान कट गया। वहीं भटौरा क्षेत्र में नवीन उपाध्याय और भुवन चंद्र उपाध्याय के मकान की छतें हवा के तेज झोंकों से उड़ गईं। शहर के पिंडारी रोड पर अस्पताल पुल के पास एक मकान के ऊपर लगा टीन शेड उखड़कर सीधे सड़क पर जा गिरा। इससे एक लड़की घायल हो गई और सड़क पर खड़ी गाड़ियों को भी काफी नुकसान हुआ. पेड़ गिरने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है. कई स्थानों पर बड़े-बड़े पेड़ गिरने से कांडा मार्ग अवरुद्ध हो गया है। पिंडारी रोड पर इनडोर स्टेडियम के पास सड़क पर भारी पेड़ गिरने से लंबा जाम लग गया है. आपदा की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और राजस्व विभाग की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुट गईं। पेड़ों को काटकर सड़कें साफ करने का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है ताकि यातायात को फिर से सुचारू किया जा सके.

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84 कोसी परिक्रमा मार्ग में बड़ा घोटाला? कागजों में पेड़, जमीन से गायब, ठेकेदार ने उठाए सवाल

अयोध्या में 84 कोसी परिक्रमा मार्ग के निर्माण को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन और संबंधित विभागों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. करोड़ों रुपये के इस प्रोजेक्ट में पेड़ों की कटाई को लेकर गंभीर अनियमितता के आरोप लगे हैं. बताया जा रहा है कि कागजों में दर्ज पेड़ जमीन पर नजर नहीं आ रहे हैं. इस मामले में वन निगम और कार्यदायी संस्था की मिलीभगत के भी आरोप लग रहे हैं। शिकायतों के बावजूद अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े कर रहा है। इस पूरे मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है.

हजारों पेड़ों की कटाई में अनियमितता का आरोप
84 कोसी परिक्रमा मार्ग पांच जिलों के कई वन क्षेत्रों से होकर गुजरता है. इस सड़क के निर्माण के लिए हजारों पेड़ों को काटना पड़ा। लेकिन अब आरोप है कि पेड़ों की कटाई में नियमों का पालन नहीं किया गया. खासकर अयोध्या के कुमारगंज वन रेंज में 1609 पेड़ों के कटान का टेंडर करीब 26 लाख रुपये में हुआ था. संबंधित संस्था ने यह रकम वन निगम को अदा कर दी, लेकिन इसके बावजूद प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

बिना वर्क ऑर्डर के गायब हो रहे पेड़
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि अभी तक ठेकेदार को वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया गया है. ठेकेदार का कहना है कि बिना वर्क ऑर्डर के वह कानूनी तौर पर पेड़ नहीं काट सकता। इसके बावजूद आरोप है कि आधे से ज्यादा पेड़ रातों-रात गायब हो गए हैं. इससे सवाल उठता है कि इन पेड़ों को किसने और कैसे हटाया। इस स्थिति ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है.

ठेकेदार की शिकायत, कार्रवाई का इंतजार
पीड़ित ठेकेदार लगातार अधिकारियों से शिकायत कर न्याय की मांग कर रहा है. उनका कहना है कि उन्होंने पूरी प्रक्रिया का भुगतान कर दिया है, लेकिन उन्हें काम शुरू करने का मौका नहीं दिया गया. वहीं दूसरी ओर पेड़ों के गायब होने से भी इसे नुकसान हो रहा है. फिलहाल इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं. अगर जल्द ही इसकी निष्पक्ष जांच नहीं की गई तो आने वाले समय में यह मामला बड़ा रूप ले सकता है।

(रिपोर्ट:अनूप कुमार अयोध्या)

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बद्रीनाथ हाईवे: तोताघाटी के पास खाई में गिरी दिल्ली के श्रद्धालुओं की कार, केदारनाथ के दर्शन कर लौट रहे थे – केदारनाथ धाम से दर्शन कर लौट रहे यात्रियों की कार बद्रीनाथ हाईवे के पास दुर्घटनाग्रस्त, मौत, घायल लापता

केदारनाथ धाम के दर्शन कर दिल्ली लौट रहे श्रद्धालुओं की कार ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर तोताघाटी के पास अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई। हादसे की सूचना मिलते ही देवप्रयाग पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें तुरंत मौके के लिए रवाना हो गईं।

मामले की जानकारी देते हुए थाना कोतवाल प्रशांत बहुगुणा ने बताया कि तोताघाटी के सामने कार गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस बल रेस्क्यू के लिए मौके पर पहुंच गया था. गहरी खाई और दुर्गम रास्तों के बीच राहत कार्य करते हुए टीम ने एक घायल व्यक्ति को सुरक्षित बचाया है, जिसे राफ्ट के जरिए नदी से निकालने की प्रक्रिया जारी है.

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वहीं, कार में सवार महिला का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है. पुलिस के मुताबिक जिस तरह से कार क्षतिग्रस्त हुई है, उससे आशंका है कि महिला को कहीं गहरी खाई में फेंक दिया गया है। फिलहाल राहत एवं बचाव दल द्वारा लापता महिला की सघन तलाश की जा रही है और रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है.

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कौशांबी हत्याकांड पर हंगामा: 24 घंटे बाद भी नहीं हुआ अंतिम संस्कार, आरोपियों की गिरफ्तारी पर अड़े परिजन

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में भरत यादव हत्याकांड से पूरे इलाके का माहौल तनावपूर्ण हो गया है. घटना के 24 घंटे बाद भी मृतक का अंतिम संस्कार नहीं किया गया है. परिजन आरोपियों की गिरफ्तारी और आर्थिक सहायता की मांग पर अड़े हुए हैं. पुलिस लगातार समझाने की कोशिश कर रही है, लेकिन परिवार अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं है. किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में डर और गुस्से का माहौल है.

प्रेम विवाह के विवाद में हत्या की आशंका
यह घटना रविवार की रात करारी थाना क्षेत्र के अधहरा गांव की है, जहां भरत यादव की बेरहमी से हत्या कर दी गई. शुरुआती जांच में पता चला है कि हत्या के पीछे प्रेम विवाह का विरोध वजह हो सकता है. हालांकि पुलिस इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है. घटना के बाद गांव में तनाव है और लोग काफी गुस्से में हैं.

परिजनों की मांग के चलते अंतिम संस्कार रोक दिया गया
मृतक के परिजनों ने साफ कर दिया है कि जब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती और प्रशासन की ओर से आर्थिक सहायता का आश्वासन नहीं मिल जाता, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा. पुलिस ने शव का अंतिम संस्कार कराने का प्रयास किया, लेकिन परिजन अपनी मांगों पर अड़े रहे। इससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है.

एक आरोपी गिरफ्तार, दो अभी भी फरार
पुलिस ने मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दो अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं. पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण ने फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पांच-पांच हजार रुपये का इनाम घोषित किया है. इन्हें पकड़ने के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं.

गांव में भारी पुलिस बल, कार्रवाई का आश्वासन
घटना के बाद गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके. पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण ने परिवार को आश्वासन दिया है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाएगा. फिलहाल पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है.

(रिपोर्ट: राम किशन, कौशांबी)

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