बीजेपी प्रशिक्षण कार्यक्रम में झड़प: शिवाकांत ओझा और धीरज ओझा के समर्थकों के बीच झड़प, बढ़ी सियासी हलचल

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के दिलीपपुर इलाके में बीजेपी के मंडल प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उस वक्त माहौल गरमा गया जब पूर्व मंत्री शिवाकांत ओझा और पूर्व विधायक धीरज ओझा के समर्थक आपस में भिड़ गए. इस घटना ने पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को उजागर कर दिया है. कार्यक्रम के दौरान हुए इस विवाद के बाद दोनों नेताओं ने अपना-अपना पक्ष रखा और एक दूसरे पर अलग-अलग आरोप लगाए. घटना के बाद बीजेपी संगठन में हलचल तेज हो गई है और अब सबकी निगाहें पार्टी नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं.
कार्यक्रम में कैसे हुआ विवाद?
दिलीपपुर में आयोजित मंडल प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच अचानक झड़प हो गयी. यह कार्यक्रम बीजेपी के क्षेत्रीय अभियान के तहत आयोजित किया गया था, जिसमें कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा था. इसी बीच समर्थकों के बीच तकरार बढ़ गई और मामला विवाद में बदल गया, जिससे कार्यक्रम का माहौल तनावपूर्ण हो गया.
शिवाकांत ओझा ने विचार व्यक्त किये
पूर्व मंत्री शिवाकांत ओझा ने इस पूरे मामले से पार्टी नेतृत्व को अवगत करा दिया है. अपने बेटे और पूर्व ब्लॉक प्रमुख प्रांशु ओझा के साथ मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे “सुसंस्कृत और स्वच्छ पैमाने” पर राजनीति करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों नेता एक ही पार्टी से जुड़े हैं, इसलिए सभी को पार्टी हित को ध्यान में रखकर काम करना चाहिए. उन्होंने सोशल मीडिया पर धीरज ओझा को अपना “छोटा भाई” कहकर आपसी सौहार्द का संदेश देने की भी कोशिश की.
धीरज ओझा का जवाब और आरोप
वहीं, पूर्व विधायक धीरज ओझा ने कहा कि पार्टी के निर्देश पर उन्हें मंडल प्रशिक्षण कार्यक्रम की जिम्मेदारी दी गयी है. उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की सूची में शिवाकांत ओझा का नाम शामिल नहीं था और कार्यक्रम पृथ्वीगंज मंडल में आयोजित किया गया था, जहां उनकी उपस्थिति जरूरी थी. धीरज ओझा ने जिले के एक अधिकारी पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब से वे राजनीति में आए हैं तब से शिवाकांत ओझा उन्हें लगातार परेशान कर रहे हैं. उन्होंने रानीगंज में दर्ज एक मामले को फर्जी बताया और कहा कि पुलिस जांच में उन्हें पहले ही क्लीन चिट मिल चुकी है.
पार्टी में हंगामा बढ़ गया
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बीजेपी के अंदर सियासी घमासान तेज हो गया है. इस विवाद को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के बीच चर्चा चल रही है. अब सबकी निगाहें पार्टी नेतृत्व पर है कि वह इस मामले में क्या कदम उठाती है और स्थिति को कैसे संभालती है.
