kanpur News: फर्जी आर्मी अफसर बनकर स्पोर्ट्स कोटे से नौकरी दिलाने का झांसा देकर करते थे ठगी. अमर उजाला
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अमेठी के कोतवाली क्षेत्र से एक युवक के अचानक गायब होने का मामला सामने आया है, जिससे इलाके में चिंता और उथल-पुथल का माहौल है. 21 वर्षीय युवक 13 अप्रैल की शाम को घर से निकला था, लेकिन उसके बाद वापस नहीं लौटा. परिजनों ने पहले अपने स्तर पर उसकी तलाश की, लेकिन जब कोई जानकारी नहीं मिली तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और युवक की तलाश के लिए टीमें सक्रिय कर दी गई हैं।
युवक घर से निकला और वापस नहीं लौटा।
जानकारी के अनुसार, रेभा गांव निवासी रवींद्र गुप्ता का पुत्र गोल्डी गुप्ता 13 अप्रैल की शाम करीब पांच बजे घर से निकला था. परिवार को उम्मीद थी कि वह जल्द लौट आयेगा, लेकिन जब देर रात तक वह घर नहीं पहुंचा, तो परिजन चिंतित हो गये. इसके बाद परिवार ने आसपास के इलाकों में उसकी तलाश शुरू कर दी.
परिजनों ने हर जगह तलाश की, कोई सुराग नहीं मिला
परिवार ने गोल्डी की तलाश में रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों से संपर्क किया। आसपास के गांवों व संभावित स्थानों पर भी तलाश की गई, लेकिन कहीं कोई जानकारी नहीं मिली। लगातार खोजबीन के बाद भी कोई सुराग नहीं मिलने पर परिवार बेहद चिंतित हो गया और उन्होंने पुलिस से मदद लेने का फैसला किया।
पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज, जांच शुरू
गोल्डी के पिता रवीन्द्र गुप्ता ने अमेठी थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। कोतवाली प्रभारी रवि सिंह ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और युवक की तलाश में पुलिस टीमें लगा दी गई हैं। पुलिस हर संभव प्रयास कर रही है ताकि युवक का जल्द पता लगाया जा सके.
सीसीटीवी और तकनीकी जांच पर जोर
पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि युवक की आखिरी लोकेशन का पता चल सके। साथ ही तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर भी जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है. स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा रही है और संभावित स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है.
जल्द खुलासा होने की उम्मीद है
पुलिस का कहना है कि जांच तेजी से की जा रही है और जल्द ही युवक के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है. परिवार लगातार अपने बेटे की सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना कर रहा है और प्रशासन से मदद की उम्मीद कर रहा है.
(रिपोर्ट:बृजेश मिश्र,अमेठी)
मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने नागरिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके त्वरित समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये. तहसील सदर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में फरियादी अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे, जहां संबंधित विभाग के अधिकारियों ने कई मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया.
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक शहर अमृत जैन ने जनसमस्याओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।
शिकायतों के मौके पर ही समाधान पर विशेष जोर दिया गया
सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिये गये कि वे प्राप्त शिकायतों की केवल औपचारिक सुनवाई तक ही सीमित न रहकर मौके पर जाकर उनकी वास्तविक स्थिति की जांच करें। साथ ही यह भी कहा कि सभी मुद्दों का समाधान निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए.
अधिकारियों से अपेक्षा की गई कि शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक विलम्ब न हो तथा निर्धारित समय सीमा के अन्दर परिणाम सामने आ जायें।
महिला अपराध से संबंधित शिकायतों को प्राथमिकता देने के निर्देश
कार्यक्रम के दौरान महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को विशेष प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया. अधिकारियों को महिला अपराध से संबंधित शिकायतों की संवेदनशीलता एवं तत्परता से जांच करने के निर्देश दिये गये।
ऐसे मामलों में पीड़ित पक्ष को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया.
साइबर अपराध और धोखाधड़ी से बचाव के लिए जागरुकता बढ़ाई गई
समाधान दिवस के दौरान उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं शिकायतकर्ताओं को साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बारे में भी जागरूक किया गया। नागरिकों को बताया गया कि अज्ञात कॉल, संदिग्ध लिंक और ओटीपी साझा करने जैसी गलतियों से बचना जरूरी है।
लोगों को डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित रूप से उपयोग करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को रिपोर्ट करने की सलाह दी गई।
अधिकारियों की संयुक्त उपस्थिति में हुआ जनसुनवाई कार्यक्रम
कार्यक्रम में क्षेत्राधिकारी सदर डॉ. रविशंकर समेत कई पुलिस व प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। सभी विभागों के प्रतिनिधियों ने मिलकर शिकायतें सुनीं और संबंधित मामलों में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
ऐसे समाधान दिवस कार्यक्रमों को नागरिकों और प्रशासन के बीच संवाद का एक प्रभावी माध्यम माना जा रहा है।
समाधान दिवस कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाना
संपूर्ण समाधान दिवस जैसे कार्यक्रमों से नागरिकों को अपनी समस्याओं को सीधे अधिकारियों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है। इससे प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत होती है और स्थानीय स्तर पर समस्याओं का त्वरित गति से समाधान संभव हो पाता है।
स्थानीय नागरिकों ने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार की पहल से विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली और अधिक प्रभावी बनेगी.
तहसील सदर में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान जनसमस्याओं को सुनने और उनका मौके पर ही निस्तारण करने के निर्देश ने प्रशासनिक सक्रियता को साफ रेखांकित कर दिया। महिला सुरक्षा और साइबर अपराध जैसे संवेदनशील विषयों पर विशेष जोर देने से नागरिकों में यह विश्वास बढ़ा है कि उनकी शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर प्रभावी ढंग से समाधान किया जाएगा।
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अमेठी जिले में बिना मान्यता के चल रहे स्कूलों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। गौरीगंज क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित एसपी पब्लिक स्कूल पर कार्रवाई करते हुए उसे बंद करा दिया गया है। शिकायत मिलने के बाद जांच में स्कूल के नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर यह कदम उठाया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई से क्षेत्र के अन्य अवैध स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है. अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि बिना मान्यता के किसी भी स्कूल को संचालित नहीं होने दिया जाएगा।
शिकायत के बाद जांच कराई गई
यह पूरा मामला जिला अध्यक्ष पवन कुमार मौर्य की शिकायत से शुरू हुआ. उनका आरोप था कि गौरीगंज क्षेत्र में एसपी पब्लिक स्कूल बिना मान्यता के चलाया जा रहा है। शिकायत मिलने के बाद खंड शिक्षा अधिकारी ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल जांच के आदेश दिए.
स्कूल बिना मान्यता के चल रहा था
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि एसपी पब्लिक स्कूल के पास संचालन के लिए जरूरी मान्यता नहीं थी। नियमों के मुताबिक बिना मान्यता के कोई भी शिक्षण संस्थान चलाना गैरकानूनी माना जाता है. इसके बावजूद विद्यालय का संचालन किया जा रहा था, जो शिक्षा विभाग के नियमों का उल्लंघन है.
बीईओ ने जारी किया नोटिस, स्कूल में जड़ा ताला
खंड शिक्षा अधिकारी अर्जुन सिंह ने जांच रिपोर्ट के आधार पर स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी किया। इसके बाद स्कूल को तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश दिए गए. प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और स्कूल में ताला जड़ दिया गया, जिससे वहां गतिविधियां पूरी तरह से ठप हो गयीं.
इससे अन्य स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया
इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में बिना मान्यता के चल रहे अन्य स्कूलों के संचालकों में भय का माहौल बन गया है. प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे स्कूलों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाएगा, ताकि शिक्षा व्यवस्था को सही दिशा में रखा जा सके.
प्रशासन की सख्त चेतावनी
अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले किसी भी स्कूल को बख्शा नहीं जाएगा. शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता बनाये रखने के लिए यह कदम आवश्यक है। प्रशासन ने लोगों से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों का दाखिला मान्यता प्राप्त स्कूलों में ही कराएं.
खतौली गंगधाड़ी में क्षेत्र के गांव आगे आए। खतौली में आत्मदाह के प्रयास का मामला इलाके में सनसनी मच गई. कथित जाति आधारित अपमान और मारपीट से आहत एक युवक ने खुद पर डीजल डालकर आग लगा ली। गंभीर रूप से झुलसे युवक को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है.
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तुरंत अस्पताल भेजा गया. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारी भी सक्रिय हो गये.
परिवार में हड़कंप मच गया, पुलिस तुरंत पहुंची और उसे अस्पताल में भर्ती कराया।
घटना 17 अप्रैल की बताई जा रही है, जब थाना खतौली पुलिस को सूचना मिली कि गांव गंगधाड़ी में एक युवक ने अपने ऊपर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा ली है. सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए खतौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया.
स्थानीय लोगों के मुताबिक घटना के बाद परिवार में अफरा-तफरी मच गई और आसपास के ग्रामीण भी मौके पर जुट गए.
जाति आधारित टिप्पणी और थप्पड़ मारने का आरोप, विवाद के बाद हुई कार्रवाई
पुलिस जांच में पता चला कि घायल युवक हिमांशु पुत्र बेदू उमर को उसी गांव के टिंकू उर्फ गौरव पुत्र राकेश ने कथित तौर पर गाड़ी में फूल भरने के लिए कहा था। मना करने पर दोनों के बीच विवाद हो गया।
आरोप है कि इस दौरान टिंकू उर्फ गौरव ने जातिसूचक शब्द कहे और हिमांशु को थप्पड़ मार दिया। इस घटना से आहत होकर युवक को गहरा पश्चाताप हुआ और उसने आत्मघाती कदम उठा लिया।
एसपी सिटी अमृत जैन अस्पताल पहुंचे, परिजनों से बात की
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक नगर अमित जैन उन्होंने खुद अस्पताल पहुंचकर घायल युवक का हाल जाना। उन्होंने परिजनों से भी बातचीत कर पूरी घटना की जानकारी ली और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया.
इसके अलावा अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर संबंधित पुलिस टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिये.
एससी-एसटी एक्ट समेत गंभीर धाराओं में केस दर्ज
पीड़िता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 108 और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(v) के तहत मामला दर्ज किया है.
मामले में नामजद अभियुक्त टिंकू उर्फ गौरव को गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्रवाई की गयी है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच की जा रही है.
पुलिस ने घटना स्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए
घटना के बाद नगर पुलिस अधीक्षक स्वयं गांव पहुंचे और घटना स्थल का निरीक्षण किया तथा स्थानीय लोगों से जानकारी जुटायी. जांच टीम ने पूरी घटना से जुड़े तथ्यों को संकलित कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है.
पुलिस का कहना है कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी.
ग्रामीणों के बीच चर्चा, सामाजिक संवेदनशीलता को लेकर चिंता
इस घटना के बाद गांव और आसपास के इलाके में चर्चा का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से सामाजिक सौहार्द प्रभावित होता है और संवेदनशील मामलों को समय रहते सुलझाना जरूरी है.
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपेक्षा जतायी है.
पुलिस ने निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया
पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन भी घायल युवक के इलाज की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है.
परिजनों को आश्वासन दिया गया है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी और किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही नहीं होगी।
गंगधाड़ी गांव में घटी यह घटना एक बार फिर सामाजिक संवेदनशीलता और आपसी सम्मान के महत्व को सामने लाती है. प्रशासन की सक्रियता और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब स्थानीय लोगों की नजर आगे की जांच और घायल युवक के स्वास्थ्य पर टिकी है, ताकि मामले में न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ सके.
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अमेठी जिले के भेटुआ विकास खंड में मध्याह्न भोजन योजना को लेकर गंभीर समस्या सामने आई है। यहां के दो प्राइमरी स्कूलों में गैस सिलेंडर न होने के कारण बच्चों का खाना चूल्हे पर पकाया जा रहा है. इससे न सिर्फ खाना बनाने में अधिक समय लग रहा है, बल्कि रसोइयों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है. स्कूल प्रशासन से कई बार शिकायत करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका है, जिससे व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
गैस सिलेंडर न मिलने से बढ़ी दिक्कतें
भेटुआ ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर और प्राथमिक विद्यालय डलाव में गैस सिलेंडर की कमी के कारण मध्याह्न भोजन चूल्हे पर बनाया जा रहा है. लकड़ी और गोबर के उपलों से खाना पकाने के कारण रसोई में धुआं भर जाता है, जिससे वहां काम करने वाले रसोइयों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
रसोइयों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर
चूल्हे से उठने वाला धुआं लगातार रसोइयों के संपर्क में आ रहा है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो रहा है. इसके अलावा इस तरह से भोजन तैयार करने में अधिक समय लगता है, जिससे बच्चों को समय पर भोजन नहीं मिल पाता है और वितरण प्रणाली भी प्रभावित होती है.
प्रधानाध्यापकों ने नाराजगी जताई
विद्यालय डलाव के प्रधानाध्यापक राजकुमार व भगवानपुर के प्रधानाध्यापक जय प्रकाश कश्यप ने बताया कि गैस सिलेंडर की आपूर्ति के लिए संबंधित एजेंसी को कई बार सूचित कर चुके हैं. इसके बावजूद समय पर सिलेंडर नहीं मिल पाता है। मजबूरी में उन्हें चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे स्वच्छता व सुरक्षा मानक भी प्रभावित हो रहे हैं।
एजेंसी पर अनियमित आपूर्ति का आरोप लगाया
दोनों विद्यालयों में नौगिरवा स्थित साईं राम भारत गैस ग्रामीण वितरक एजेंसी से गैस कनेक्शन है। स्कूल प्रशासन का कहना है कि एजेंसी द्वारा नियमित रूप से सिलेंडर की आपूर्ति नहीं की जा रही है, जिसके कारण यह समस्या बनी हुई है.
प्रशासन ने समाधान का आश्वासन दिया
खंड शिक्षा अधिकारी भेटुआ डॉ. संतोष कुमार यादव ने बताया कि एजेंसी से संपर्क कर शीघ्र आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। हालांकि आश्वासन के बावजूद अभी तक सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया गया है। उन्होंने कहा कि इस समस्या से उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है और जल्द ही इसका समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि मध्याह्न भोजन योजना सही ढंग से चल सके.
(रिपोर्ट:बृजेश मिश्र,अमेठी)
मुजफ्फरनगर जिले में अपराध नियंत्रण को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में दर्ज हिस्ट्रीशीटरों के खिलाफ विशेष सत्यापन अभियान शुरू किया है. इस अभियान के तहत विभिन्न थानों में सूचीबद्ध हिस्ट्रीशीटरों को तलब किया गया और उनकी वर्तमान गतिविधियों, निवास और आपराधिक पृष्ठभूमि की गहन समीक्षा की गई।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा यह अभियान पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के निर्देश पर चलाया जा रहा है अक्षय संजय महाडिक के नेतृत्व में व्यापक स्तर पर लागू किया गया।
पुलिस थानों में बुलाकर गतिविधियों एवं व्यवहार की विस्तृत जांच की गई
अभियान के दौरान हिस्ट्रीशीटरों को उनके संबंधित थाने पर बुलाया गया और उनकी वर्तमान गतिविधियों का सत्यापन किया गया। पुलिस अधिकारियों ने उनके निवास, संपर्क विवरण और हाल के व्यवहार के बारे में जानकारी एकत्र की।
साथ ही यह भी देखा गया कि वे वर्तमान में किसी संदिग्ध गतिविधि से जुड़े हैं या नहीं. अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य सबसे पहले संभावित आपराधिक घटनाओं को रोकना है।
दोबारा अपराध में शामिल होने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी
सत्यापन के दौरान हिस्ट्रीशीटरों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई कि यदि वे भविष्य में किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल पाए गए तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों ने उन्हें कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने और सामाजिक गतिविधियों में सकारात्मक भूमिका निभाने की भी सलाह दी।
फ़ील्ड इंटेलिजेंस के आधार पर बढ़ी हुई निगरानी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह ऑपरेशन महज एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि फील्ड इंटेलिजेंस के आधार पर संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है. ग्रामीण इलाकों में सक्रिय अपराधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है.
इसके जरिए पुलिस संभावित घटनाओं की आशंका को पहले ही नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है.
थाना प्रभारियों एवं क्षेत्राधिकारियों की सक्रिय भागीदारी
अभियान को सफल बनाने के लिए थाना प्रभारी, क्षेत्राधिकारी एवं स्थानीय पुलिस बल ने समन्वित तरीके से कार्य किया। विभिन्न क्षेत्रों से एकत्रित जानकारी के आधार पर सूचीबद्ध व्यक्तियों की गतिविधियों का विश्लेषण किया गया।
पुलिस प्रशासन का मानना है कि इस तरह की लगातार कार्रवाई से अपराधियों में कानून का भय बना रहता है और क्षेत्र में शांति व्यवस्था मजबूत होती है.
ग्रामीण क्षेत्रों में अपराध की सम्भावना को पहले से ही नियंत्रित करने की रणनीति
इस विशेष सत्यापन अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में अपराध की संभावनाओं को प्रारंभिक स्तर पर ही नियंत्रित करना है. पुलिस का मानना है कि नियमित निगरानी और समय-समय पर सत्यापन से अपराधियों की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है.
ऐसे प्रयासों से स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा की भावना भी मजबूत होती है।
ऐसे विशेष अभियान भविष्य में भी जारी रहेंगे
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने और अपराधियों में कानून का भय पैदा करने के लिए भविष्य में भी इस तरह के सत्यापन अभियान लगातार चलाए जाएंगे.
प्रशासन का कहना है कि शांति व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे.
ग्रामीण इलाकों में हिस्ट्रीशीटरों के सत्यापन के इस अभियान को पुलिस की सक्रिय रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके जरिए संभावित अपराधों पर पहले से ही नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है. अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के नियमित अभियान कानून-व्यवस्था के प्रभाव को मजबूत करते हैं और क्षेत्र में शांति बनाए रखने में मदद करते हैं।
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के नये भर्ती कैलेंडर से युवाओं को निराशा हाथ लगी। इस कैलेंडर में 22 भर्तियां बताई गई हैं, जिनमें से 16 लेक्चरर परीक्षाएं हैं। इस कैलेंडर में आयोग की पीसीएस, लोअर पीसीएस, समीक्षा अधिकारी, सहायक समीक्षा अधिकारी, एई, जेई जैसी भर्तियों का कोई अता-पता नहीं है। हां, इतना जरूर है कि आयोग ने दो रविवार आरक्षित रखे हैं।
आयोग ने कैलेंडर में इस साल 21 अप्रैल से 6 दिसंबर तक की भर्तियों का जिक्र किया है. आयोग का मुख्य कार्य राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रवक्ताओं की भर्ती करना प्रतीत होता है। पीसीएस-जे मुख्य परीक्षा 21 से 24 अप्रैल, पीसीएस मुख्य परीक्षा 27 से 30 अप्रैल तक आयोजित की गई है। इस कैलेंडर में न्यू पीसीएस, लोअर पीसीएस, पीसीएस-जे का कोई जिक्र नहीं है।
इसी तरह समीक्षा अधिकारी, सहायक समीक्षा अधिकारी, एई भर्ती, जेई भर्ती समेत जिन भर्तियों का युवा इंतजार कर रहे हैं, उनके बारे में भी कोई जानकारी नहीं है। आयोग एक वर्ष में प्रवक्ताओं के लिए 16 मुख्य परीक्षाएं आयोजित करेगा। इसमें 9 मई को भौतिकी, 10 मई को नागरिक शास्त्र, 30 मई को हिंदी, 31 मई को इतिहास, 11 जून को कृषि, 5 जुलाई को गणित, 12 जुलाई को जीव विज्ञान, 26 जुलाई को अंग्रेजी, 23 अगस्त को रसायन विज्ञान, 20 सितंबर को वाणिज्य, 27 सितंबर को भूगोल, 11 अक्टूबर को अर्थशास्त्र, 18 अक्टूबर को समाजशास्त्र, 23 को संस्कृत शामिल है। अक्टूबर, 29 नवंबर को गृह विज्ञान। वहीं आर्ट्स की मुख्य परीक्षा 6 दिसंबर को शामिल है.
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इस बीच, केवल समीक्षा अधिकारी ऑडिट परीक्षा-2024 19 मई को आयोजित की जाएगी, उच्च न्यायालय समीक्षा अधिकारी टाइपिस्ट, लाइब्रेरियन की स्क्रीनिंग परीक्षा 19 जुलाई को होगी। आयोग ने 6 सितंबर और 4 अक्टूबर के दिन आरक्षित रखे हैं, जिन पर परीक्षा बाद में तय की जाएगी. इस बात को लेकर युवा चिंतित हैं.