आईपीएल से पहले लखनऊ सुपर जाइंट्स ने अयोध्या में किए रामलला के दर्शन, मांगा जीत का आशीर्वाद.

इंडियन प्रीमियर लीग से पहले आस्था और खेल का अनोखा संगम देखने को मिला. इंडियन प्रीमियर लीग के शुरू होने से पहले लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम अयोध्या पहुंची, जहां खिलाड़ियों ने भगवान श्री राम का आशीर्वाद लिया. इस दौरान टीम के खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ में खास उत्साह देखने को मिला. सभी ने आगामी सीजन में अच्छे प्रदर्शन की कामना की.

20 सदस्यीय टीम ने किया दौरा
टीम के कुल 20 सदस्य अयोध्या पहुंचे थे. सभी ने रामनगरी स्थित राम मंदिर जाकर भगवान श्री राम के दर्शन किये. खिलाड़ियों ने पूरे विधि-विधान से पूजा की और सिर झुकाकर अपनी सफलता के लिए प्रार्थना की. ये पल खिलाड़ियों के लिए खास और यादगार था.

टीम मालिक भी मौजूद थे
इस दौरान खिलाड़ियों के साथ टीम के मालिक संजीव गोयनका भी मौजूद थे. उन्होंने भगवान श्रीराम के दरबार में भी पहुंचकर पूजा-अर्चना की और टीम के बेहतर प्रदर्शन की कामना की. टीम के साथ फ्रेंचाइजी के अन्य सदस्य और सहयोगी स्टाफ भी मौजूद थे.

अयोध्या में उत्साह का माहौल देखा गया
टीम के अयोध्या पहुंचने की खबर मिलते ही वहां उत्साह का माहौल हो गया. खिलाड़ियों को देखने के लिए स्थानीय लोगों व श्रद्धालुओं में उत्सुकता रही. खिलाड़ियों का रामनगरी में श्रद्धा और सम्मान के साथ स्वागत किया गया।

आध्यात्मिक ऊर्जा से आत्मविश्वास बढ़ेगा
आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट से पहले इस तरह की धार्मिक यात्रा को टीम के लिए सकारात्मक माना जा रहा है. माना जा रहा है कि आध्यात्मिक ऊर्जा से खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे मैदान पर बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे.

नए सीज़न के लिए टीम तैयार है
लखनऊ सुपर जाइंट्स की टीम अब आईपीएल के नए सीजन के लिए पूरी तरह से तैयार नजर आ रही है. खिलाड़ियों ने भगवान से जीत का आशीर्वाद लेकर अपनी तैयारियों को और मजबूत कर लिया है. अब फैंस को टीम से शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है.

(रिपोर्ट:अनूप कुमार, अयोध्या)

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उत्तराखंड: पहली बार, चार प्रमुख जिलों में 100% शराब की दुकानों का निपटान किया गया है, जो हर साल खाली रहती थीं – उत्तराखंड पहली बार, चार प्रमुख जिलों में 100% शराब की दुकानों का सफलतापूर्वक निपटान किया गया है

राज्य में पहली बार चार बड़े जिलों में शत-प्रतिशत शराब दुकानों की व्यवस्था करने में उत्पाद विभाग ने सफलता हासिल की है. इस बार ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून और नैनीताल के साथ ही तीन पर्वतीय जिलों में भी शत-प्रतिशत दुकानों के लिए बोलियां लगाई गई हैं। इनमें चंपावत, टिहरी और चमोली शामिल हैं। बाकी जिलों में आबकारी विभाग ने दोबारा विज्ञप्ति जारी की है.

गौरतलब है कि पिछले 10 सालों से चार बड़े जिलों में हर साल दुकानें खाली रह जाती थीं. कहीं दुकानों को दूसरी जगह शिफ्ट करने का मसला था तो कहीं कुछ और। इस बार इसके लिए आबकारी विभाग ने पहले ही होमवर्क पूरा कर लिया था। आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल ने बताया कि सभी जिलों में पहले से ही तैयारी की जा रही थी.

हर प्रकार की समस्या का समाधान समयबद्ध तरीके से किया गया। इसी का परिणाम है कि सात जिलों में शत-प्रतिशत दुकानों की व्यवस्था हो गयी है. विभाग ने दुकानों को प्राप्त करने का लक्ष्य भी निर्धारित कर दिया है. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए यह लक्ष्य 2604 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है. वहीं, अगले वित्तीय वर्ष का लक्ष्य 2693 करोड़ रुपये है. चालू वित्तीय वर्ष के लिए कुल राजस्व लक्ष्य 5400 करोड़ रुपये है.


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इसमें से 2604 करोड़ रुपये सिर्फ दुकानों से हासिल करने का लक्ष्य है। कमिश्नर अनुराधा पाल ने कहा कि हर साल कार्रवाई में अनियमितताएं देखने को मिलती थीं, लेकिन अब व्यवस्थित व्यवस्था लागू कर दी गई है। इससे राजस्व लक्ष्य में भी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी.

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लखनऊ के ऐशबाग ईदगाह में भारी भीड़ जुटी, 50 हजार से ज्यादा लोगों ने नमाज अदा की.

लखनऊ में इस बार ईद-उल-फितर का त्योहार शांति और सौहार्द के साथ मनाया गया. शहर के ऐशबाग ईदगाह में सुबह 10 बजे ईद की नमाज शुरू हुई, जिसमें 50 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए. नमाज के दौरान ईदगाह पूरी तरह भर गया और आसपास के गलियारों में भी लोगों की भीड़ देखी गयी. नमाज के बाद लोगों ने एक दूसरे के गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी और भाईचारे का संदेश दिया.

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, प्रशासन हाई अलर्ट पर
ईद के मौके पर शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये थे. पूरे इलाके में पुलिस का सख्त पहरा था और सड़कों पर भी जवान तैनात थे. प्रशासन ने लखनऊ में हाई अलर्ट घोषित कर दिया था, ताकि किसी तरह की कोई अव्यवस्था न हो. नमाज के दौरान और उसके बाद पुलिस पूरी तरह अलर्ट दिखी।

बड़े नेताओं की मौजूदगी रही खास
इस मौके पर कई बड़े नेता भी ऐशबाग ईदगाह पहुंचे. नमाज के दौरान समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव, बीजेपी के राज्यसभा सांसद और पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और वरिष्ठ बीजेपी नेता रीता बहुगुणा जोशी भी मौजूद रहीं. सभी नेताओं ने लोगों को ईद की बधाई दी.

नेताओं ने एकता और शांति का संदेश दिया
अखिलेश यादव ने कहा कि कुछ दिन पहले हमने होली पर गले मिलकर त्योहार मनाया था और अब ईद पर भी हम उसी तरह मिल रहे हैं. उन्होंने कहा कि ये हमारी हिंदुस्तानियत है. उन्होंने दुनिया में शांति और चल रहे युद्ध जैसे हालात के खत्म होने की भी कामना की. वहीं, अजय राय और दिनेश शर्मा ने भी एक-दूसरे का नाम लेकर लोगों को ईद की बधाई दी और भाईचारे का संदेश दिया. दिनेश शर्मा ने ऐशबाग ईदगाह और ऐशबाग रामलीला मैदान के बारे में भी जानकारी साझा की.

नमाज के बाद भाईचारे का संदेश गूंजा
नमाज के बाद ईदगाह में खुशी का माहौल देखा गया. लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाया और मिठाइयां खिलाकर त्योहार की खुशियां बांटीं। पूरे शहर में शांति और प्रेम का संदेश फैलता नजर आया.

प्रशासन की विशेष व्यवस्था सफल
ईद के मौके पर प्रशासन की ओर से किये गये विशेष इंतजाम सफल रहे. भारी भीड़ के बावजूद कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ और लोगों ने मिलकर त्योहार का लुत्फ उठाया.

(रिपोर्ट: संदीप शुक्ला, लखनऊ)

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उत्तराखंड: गैस संकट के बीच फिर सुलगने लगी कोयले और लकड़ी की भट्टियां, लोगों को याद दिला रही हैं पुराने दिन


एलपीजी की कमी का असर अब कोयला और लकड़ी बाजार पर भी साफ दिखने लगा है। गैस की कमी के कारण होटल, ढाबा संचालक और हलवाई फिर से पारंपरिक साधनों की ओर लौट रहे हैं। खाना पकाने के लिए कोयले और लकड़ी के स्टोव (भट्टियों) की मांग तेजी से बढ़ी है।

लकड़ी कारोबारी सरदार गोविंद सिंह ने बताया कि अब उनके स्टॉल पर छोटी-बड़ी सभी प्रकार की लकड़ी तेजी से बिक रही है. स्थिति यह है कि चीरा लगाने के बाद बचे छोटे-छोटे टुकड़े भी नष्ट हो रहे हैं। मध्यम वर्ग के लोग शाम को खाना बनाने के लिए लकड़ी खरीद रहे हैं तो होटल व ढाबा संचालक भट्ठी के लिए लकड़ी का गोला ले जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बढ़ती मांग के बावजूद ग्राहकों को राहत देने के लिए लकड़ी अभी भी पुराने दाम 15 रुपये प्रति किलो पर ही बेची जा रही है. कोयला कारोबारी गौरव अरोड़ा ने बताया कि फिलहाल पुराना स्टॉक पुराने रेट पर ही बिक रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में कीमतें बढ़ना तय है.

जो कोयला पहले 40 रुपये प्रति किलो मिलता था, वह अब 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि बाहरी राज्यों से आने वाले कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण यह बढ़ोतरी करनी पड़ी है. उन्होंने यह भी कहा कि होटलों में तंदूर के लिए उपयोग किया जाने वाला हार्ड कोक कोयला 40 रुपये प्रति किलोग्राम बेचा जा रहा है, जबकि शीघ्र जलने वाला चारकोल कोयला 50 रुपये प्रति किलोग्राम बेचा जा रहा है.




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गैस संकट, उत्तराखंड में खाना पकाने के लिए कोयले और लकड़ी की मांग बढ़ी, ऋषिकेश समाचार

लकड़ी की मांग बढ़ी – फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


रसोई गैस की कमी ने एक बार फिर लोगों को पुराने दिनों की याद दिला दी है. खासकर मध्यमवर्गीय परिवार गैस सिलेंडर की कमी के कारण अब केरोसिन स्टोव और लकड़ी के स्टोव का सहारा लेने को मजबूर हैं।


गैस संकट, उत्तराखंड में खाना पकाने के लिए कोयले और लकड़ी की मांग बढ़ी, ऋषिकेश समाचार

कोयले की मांग बढ़ी – फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


शहर के कई इलाकों में लोग अपने घरों में रखे पुराने चूल्हों को साफ कर दोबारा इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग बाजार कीमत से ज्यादा कीमत चुकाकर नए चूल्हे खरीद रहे हैं. गैस संकट का सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है. हालांकि कुछ इलाकों में गैस सिलेंडर आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन मध्यम वर्ग के लोगों को ऊंचे दामों पर छोटे सिलेंडर भरवाने से काम चलाना पड़ता है।


गैस संकट, उत्तराखंड में खाना पकाने के लिए कोयले और लकड़ी की मांग बढ़ी, ऋषिकेश समाचार

लकड़ी – फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


मजबूरी में कई परिवार केरोसिन स्टोव में डीजल डालकर खाना बनाने जैसे जोखिम भरे तरीके अपना रहे हैं। झंडा चौक मुख्य बाजार के बर्तन व्यवसायी ऋत्विक ने कहा कि पिछले दस वर्षों से गोदाम में पड़े चूल्हे अब बाहर निकाले जा रहे हैं, मरम्मत की जा रही है और बेची जा रही है। इनकी कीमत 600 से 1200 रुपये तक पहुंच गयी है. उन्होंने कहा कि स्टोव और डीजल भट्टियों की मांग बढ़ने के बावजूद आपूर्ति नहीं मिल पा रही है. बाहरी राज्यों के व्यापारियों का भी कहना है कि उनके पास पर्याप्त स्टॉक नहीं है.

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गैस संकट, उत्तराखंड में खाना पकाने के लिए कोयले और लकड़ी की मांग बढ़ी, ऋषिकेश समाचार

गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान – फोटो: iStock


पहले डीजल भट्ठी करीब 7 हजार रुपये में मिलती थी। अब यह 25 हजार रुपये तक पहुंच गया है. होटल व्यवसायी भी इन्हें तीन गुना कीमत देकर खरीदने को मजबूर हैं। एलपीजी की कमी ने लोगों की रसोई और बजट दोनों पर बुरा असर डाला है, जिससे आम लोगों की जिंदगी प्रभावित हो रही है.


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अयोध्या में सौहार्द और शांति के साथ मनाया गया ईद-उल-फितर, कड़ी सुरक्षा के बीच जुटी भीड़

इस बार अयोध्या में ईद-उल-फितर का त्योहार कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाया गया. सुबह से ही शहर के विभिन्न ईदगाहों व मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ देखी गयी. सिविल लाइन ईदगाह में खास तौर पर बड़ी संख्या में लोग नमाज अदा करने आये. मौसम की हल्की खराबी के बावजूद भी लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ और सभी ने मिलकर शांति और भाईचारे के साथ इस पवित्र त्योहार को मनाया.

सिविल लाइन ईदगाह में भारी भीड़ जुटी
सिविल लाइंस स्थित ईदगाह पर सुबह से ही नमाजियों का आना शुरू हो गया था। कुछ ही देर में पूरा मैदान लोगों से भर गया. नमाज में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लेकर एकता और भाईचारे का संदेश दिया. नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे के गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी, जिससे पूरे इलाके में खुशी का माहौल बन गया.

पुलिस और प्रशासन की सख्त व्यवस्था
पुलिस और प्रशासन ने त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये थे. जगह-जगह पुलिस बल तैनात किये गये थे और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी. प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे और पूरी व्यवस्था पर नजर रखते रहे, ताकि कहीं कोई अव्यवस्था न हो.

जनप्रतिनिधियों ने दी ईद की मुबारकबाद
इस मौके पर समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद और पवन पांडे भी ईदगाह पहुंचे. उन्होंने नमाजियों से मुलाकात कर उन्हें ईद की मुबारकबाद दी और आपसी भाईचारे को मजबूत करने की अपील की. उनकी मौजूदगी से लोगों में काफी उत्साह था.

इमाम ने शांति की दुआ की
नमाज के बाद शहर इमाम मौलाना समसुल कादरी ने देश-दुनिया में अमन-चैन की दुआ करायी. उन्होंने कहा कि आज के समय में सभी देशों के बीच शांति और संतुलित नीतियों की जरूरत है, ताकि पूरी दुनिया में भाईचारा बना रहे.

नगर निगम ने व्यवस्था संभाली
ईद के मौके पर नगर निगम ने साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा. ईदगाह एवं आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई, पानी एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करायी गयीं। अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद रहे, जिसके चलते कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ.

(रिपोर्ट:अनूप कुमार, अयोध्या)

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उत्तराखंड: कैबिनेट विस्तार के बाद सीएम धामी के कंधों से बोझ अब होगा कम, फिलहाल उनके पास हैं 35 विभाग

कैबिनेट विस्तार के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कंधों का बोझ भी कम हो जाएगा. फिलहाल सीएम धामी के पास 35 विभाग हैं. पांच नए मंत्रियों के आने के बाद उनके बीच इन विभागों का बंटवारा किया जाएगा. विभागों के बंटवारे से सरकार के कामकाज में भी तेजी आएगी.

जब धामी दूसरी बार मुख्यमंत्री बने तो उनके पास करीब 25 विभाग थे. मंत्री चंदन रामदास के निधन के बाद परिवहन समेत सभी विभाग सीएम के अधीन आ गये. प्रेमचंद अग्रवाल के कैबिनेट से इस्तीफे के बाद वित्त, शहरी विकास, आवास, जनगणना समेत उनके सभी विभाग सीएम के पास आ गए. धीरे-धीरे विभागों की संख्या बढ़कर 35 हो गई है।

अपनी पिछली सरकार में धामी ने तत्कालीन मंत्री हरक सिंह रावत को ऊर्जा दी थी, लेकिन वर्तमान में यह विभाग भी उन्हीं के पास है. अब पांच नए मंत्रियों के बीच काम का बंटवारा होने के बाद कहीं न कहीं सीएम धामी का बोझ कम होगा. नए मंत्री इन विभागों में नई सोच के साथ तेजी से काम करेंगे. सरकार का लक्ष्य है कि इन विभागों की योजनाओं का लाभ जनता तक बेहतर तरीके से पहुंचे.

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नये मंत्रियों के पास एक साल से भी कम समय है

धामी के लिए विभागों का बंटवारा इसलिए भी अहम है क्योंकि अब चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है. ऐसे में विभाग मिलने के बाद नए मंत्रियों के सामने प्रदर्शन के साथ-साथ जनता के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने की चुनौती होगी. माना जा रहा है कि इससे एक तरह से सरकार के काम में तेजी आएगी.

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अलीगढ़ में चौंकाने वाला मामला: दो सिर वाले जुड़वां बच्चों को जन्म, सदमे में मां की मौत

अलीगढ़ जिले से एक बेहद दुर्लभ और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां एक गर्भवती महिला ने ऐसे जुड़वा बच्चों को जन्म दिया जिसे देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गए। इन बच्चों के दो सिर, चार हाथ-पैर और एक ही धड़ है। इस घटना से जहां पूरे अस्पताल में हड़कंप मच गया, वहीं मां की तबीयत अचानक बिगड़ गई और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. इस घटना से परिवार में गहरा दुख है.

जिला अस्पताल में हुआ ऑपरेशन
ये पूरा मामला मोहनलाल गौतम महिला जिला अस्पताल का है. 17 मार्च को सासनी गेट थाना क्षेत्र के बिहारी नगर निवासी आकाश कुमार अपनी पत्नी नीरू को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल ले गए थे। महिला की हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने सिजेरियन ऑपरेशन की सलाह दी। परिवार की सहमति के बाद स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मेघा की देखरेख में ऑपरेशन किया गया।

ऑपरेशन के दौरान दुर्लभ स्थिति का सामना करना पड़ा
ऑपरेशन के दौरान जब बच्चों का जन्म हुआ तो डॉक्टर और स्टाफ हैरान रह गए. दोनों नवजात शिशु एक ही धड़ से जुड़े थे, लेकिन उनके दो अलग-अलग सिर और चार अंग थे। डॉक्टरों के मुताबिक, यह एक बेहद दुर्लभ मेडिकल कंडीशन है। फिलहाल दोनों बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है और वे खतरे से बाहर हैं. डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं.

बच्चों को देखकर मां की हालत खराब हो गई
नवजात बच्चों को देखने के बाद मां नीरू की मानसिक और शारीरिक स्थिति अचानक बिगड़ गई। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें गहरा सदमा लगा है, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई है. प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया, लेकिन परिजन उसे निजी अस्पताल ले गये, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी.

डॉक्टरों ने इसकी वजह मानसिक स्थिति बताई
अस्पताल के सीएमएस डॉ. मो. तैय्यब खान के अनुसार, प्रसव के बाद एक महिला पोस्टपार्टम साइकोसिस नामक दुर्लभ मानसिक स्थिति से पीड़ित हो सकती है। ऐसे में मरीज गहरे सदमे में चला जाता है। डॉक्टरों ने उसे जेएन मेडिकल कॉलेज रेफर करने की सलाह दी थी, लेकिन परिजन उसे निजी अस्पताल ले गए।

परिजनों ने किया अंतिम संस्कार, बच्चों की निगरानी जारी
महिला की मौत के बाद उसके परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया है. वहीं, डॉक्टर नवजात बच्चों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. यह मामला चिकित्सा और समाज दोनों के लिए एक गंभीर और संवेदनशील विषय बन गया है।

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उत्तराखंड: बारिश के बाद दरकने लगे पहाड़, बोल्डर आने से बद्रीनाथ गंगोत्री-यमुनोत्री हाईवे जगह-जगह बंद


चमोली जिले के ज्योर्तिमठ क्षेत्र में भारी बारिश के बाद पहाड़ दरकने लगे हैं। बद्रीनाथ धाम बर्फ की चादर से ढक गया है. तीन दिन बाद जब बारिश और बर्फबारी रुकी तो धाम का अद्भुत नजारा देखने को मिला। उधर, गोविंद घाट के पास पिनोला में बड़े-बड़े पत्थर आने से बद्रीनाथ हाईवे पूरी तरह से बंद है।

उधर, नीती-मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग भी सलधार के पास भूस्खलन के कारण अवरुद्ध हो गया है। उप जिलाधिकारी चन्द्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि बीआरओ को जल्द हाईवे खोलने को कहा गया है। उधर, बर्फबारी के कारण बंद हुए गंगोत्री हाईवे को खोलने के लिए बीआरओ की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं।

यमुनोत्री हाईवे जंगलचट्टी पर बंद है। यहां भी एनएच हाईवे खोलने का प्रयास कर रहा है। दो दिन की बर्फबारी और बारिश के बाद आज जिले में धूप तो निकली है, लेकिन सड़क बंद होने से आवाजाही मुश्किल हो रही है.




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बद्रीनाथ में बर्फबारी, पिनोला में हाईवे बंद, गंगोत्री-यमुनोत्री हाईवे पर बोल्डर दिखे, पढ़ें सभी अपडेट

बदरीनाथ धाम – फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


बारिश और बर्फबारी के कारण दिक्कतें भी बढ़ने लगी हैं. बर्फबारी के कारण बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान का काम दो दिन से रुका हुआ है। दो दिन के मौसम के अलर्ट को देखते हुए मास्टर प्लान के काम में लगे कर्मचारियों को वापस पांडुकेश्वर बुला लिया गया है। लेकिन धाम में ग्लेशियर तेजी से खिसक रहे हैं. वहीं बर्फबारी के कारण बदरीनाथ हाईवे कंचन नाले के पास अवरुद्ध हो गया। ऐसे में हाईवे बंद होने के कारण मजदूर आधे रास्ते से ही बदरीनाथ लौट आए।


बद्रीनाथ में बर्फबारी, पिनोला में हाईवे बंद, गंगोत्री-यमुनोत्री हाईवे पर बोल्डर दिखे, पढ़ें सभी अपडेट

बर्फबारी के बाद बद्रीनाथ धाम – फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


फिलहाल मास्टर प्लान के लिए 100 से ज्यादा कर्मचारी और पीआईयू इंजीनियर बदरीनाथ धाम पहुंच चुके हैं. धाम में लगातार हो रही बर्फबारी और मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए शुक्रवार को प्रशासन ने एहतियात के तौर पर टेंट और टीन शेड में रहने वाले श्रमिकों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने के निर्देश जारी किए।


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सुक्की टॉप क्षेत्र – फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


कार्यदायी संस्था पीआईयू ने कर्मचारियों को पांडुकेश्वर की ओर भेजा लेकिन कंचन नाले के पास हिमखंड आने से हाईवे अवरुद्ध हो गया। इस कारण श्रमिकों को वहां से वापस बद्रीनाथ भेज दिया गया। पीआईयू के कार्यकारी अभियंता योगेश मनराल का कहना है कि मजदूरों के लिए पैदल हाईवे पार करना जोखिम भरा था और लगातार बारिश के कारण हिमस्खलन का भी खतरा हो सकता था.


बद्रीनाथ में बर्फबारी, पिनोला में हाईवे बंद, गंगोत्री-यमुनोत्री हाईवे पर बोल्डर दिखे, पढ़ें सभी अपडेट

सुक्की टॉप क्षेत्र – फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


इसे देखते हुए सभी मजदूरों को वापस सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया है. उधर, एसडीएम ज्योतिर्मठ चन्द्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि हाईवे बंद होने के कारण मजदूर वापस लौट आये हैं। धाम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।


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मथुरा में गौरक्षक फरसा बाबा की मौत के बाद हंगामा, हाईवे जाम, पुलिस पर पथराव

मथुरा में गौरक्षक फरसा बाबा की मौत के बाद माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया. बताया जा रहा है कि किसी वाहन की टक्कर से बाबा की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना की खबर मिलते ही गौरक्षकों और हिंदू संगठनों में भारी गुस्सा फैल गया. मौके पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई.

पशु तस्करों पर आरोप, हाईवे जाम कर दिया
प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि फरसा बाबा को गौ तस्करों ने वाहन से कुचल दिया है. गुस्साए लोगों ने बाबा का शव आगरा-दिल्ली नेशनल हाईवे पर रखकर जाम लगा दिया. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. हाईवे जाम होने से यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया और लंबा जाम लग गया.

पुलिस पर पथराव और तोड़फोड़
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ उग्र हो गयी. गुस्साए लोगों ने पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ शुरू कर दी. कुछ शरारती तत्वों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव भी किया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गये. कुछ पुलिसकर्मियों को जान बचाकर भागना पड़ा.

प्रशासन का बयान और जांच का आश्वासन
घटना के बाद जिलाधिकारी सीपी सिंह ने प्रेस नोट जारी किया. उन्होंने बताया कि कोहरे के कारण ट्रक से टक्कर होने के कारण फरसा बाबा की मौत हो गयी. हालांकि, उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है ताकि सच्चाई सामने आ सके.

पुलिस ने बल प्रयोग कर स्थिति को संभाला
हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का बल प्रयोग किया. इसके बाद भीड़ को हाईवे से हटाया गया और यातायात फिर से सुचारु किया गया. मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है.

उपद्रवियों पर कार्रवाई की जाएगी
इस मामले पर डीआइजी शैलेश पांडे ने कहा कि घटना में शामिल बदमाशों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल इलाके में तनाव है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है.

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रुद्रप्रयाग: मिट्टी, मलबे और चट्टानों में फंसे वाहन रुद्रप्रयाग समेत सिरोहाबगड़ और आसपास के इलाकों में उतर रहे हैं

बारिश के कारण सिरोहबगड़ सहित आसपास के इलाकों में मलबा और पत्थर आने से सड़कें अवरुद्ध हो गईं। कुछ स्थानों पर दलदल के कारण वाहन फंस गए। ड्यूटी पर तैनात पुलिस बल एवं संबंधित कार्यदायी संस्था के संयुक्त प्रयास से दलदल में फंसे वाहनों को निकाला जा सका। कड़ी मशक्कत के बाद यातायात भी सुचारु किया जा सका।

पिछले कुछ दिनों से प्रदेश भर में मौसम बदला हुआ है। उत्तराखंड में पिछले गुरुवार से लगातार बारिश हो रही है. राज्य के कई पहाड़ी और मैदानी जिलों में अगले 24 घंटों के दौरान मौसम में बदलाव की संभावना है. मोबाइल पर प्रसारित राष्ट्रपति के अलर्ट संदेश के मुताबिक, राज्य के ऊंचाई वाले इलाकों (3000 मीटर और उससे ऊपर) में बर्फबारी के साथ ही निचले इलाकों में बारिश और आंधी आ सकती है.

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी का अनुमान

अलर्ट में बताया गया है कि बागेश्वर, चमोली, देहरादून, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, चंपावत और उत्तरकाशी जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है. जबकि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी का अनुमान जताया गया है.

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यह संदेश सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम के जरिए भेजा गया था, जिसे अधिकारियों ने एक परीक्षण संदेश बताया है. इसका उद्देश्य आपदा प्रबंधन और चेतावनी प्रणाली की प्रभावशीलता का परीक्षण करना है, ताकि भविष्य में किसी भी आपातकालीन स्थिति में समय पर सूचना आम जनता तक पहुंचाई जा सके। विशेषज्ञों ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, ऊंचाई वाले इलाकों में सावधानी बरतने और बिजली गिरने के दौरान खुली जगहों से दूर रहने की अपील की है.

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