अयोध्या में ‘श्री राम पर्व’ शुरू, अवधी शैली में नौ दिवसीय सुंदरकांड पाठ शुरू

रामनवमी के पावन अवसर पर अयोध्या में भव्य धार्मिक आयोजन शुरू हो गया है. मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव को विशेष बनाने के लिए “श्री राम पर्व” के अंतर्गत नौ दिवसीय सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं और पूरे इलाके में भक्ति का माहौल है. यह कार्यक्रम वशिष्ठ फाउंडेशन, श्री अयोध्या फाउंडेशन और पंडित ज्वाला प्रसाद संगीत शोध संस्थान के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया जा रहा है।

अवधी शैली में सुंदरकांड पाठ होगा
इस आयोजन की खास बात यह है कि सुंदरकांड का पाठ अवधी शैली में किया जा रहा है. यह कार्यक्रम उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आयोजित किया गया है जिसमें अयोध्या के प्रसिद्ध श्री कनक भवन में सुंदरकांड का पाठ किया जाता है. इससे श्रद्धालुओं को भक्ति और संगीत का अनोखा अनुभव मिल रहा है.

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारम्भ हुआ
इस नौ दिवसीय आयोजन की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन हुई थी। 14 कोसी परिक्रमा मार्ग स्थित मंत्रेश्वर महादेव मंदिर, गिरिजा कुंड और जनौरा क्षेत्र में पहला सुंदरकांड पाठ हुआ। यहां श्रद्धालुओं ने पवित्र एवं भक्ति भाव से परिपूर्ण वातावरण में सुंदरकांड का पाठ किया। पूरे कार्यक्रम में संगीत और भक्ति का खूबसूरत संगम देखने को मिला.

कई गणमान्य लोग मौजूद थे
इस कार्यक्रम में कई प्रमुख लोगों ने हिस्सा लिया. इनमें महंत श्री गिरीश पति त्रिपाठी (मेयर अयोध्या), ई. रवि तिवारी, श्रीनिवास शास्त्री, डॉ. सत्य प्रकाश मिश्र, गौरव सिंह, डॉ. शिव शंकर सिंह, त्रिलोकीनाथ दुबे, कृष्ण कुमार तिवारी, कपिल देव शुक्ल, ब्रिजेश सिंह समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गयी।

धार्मिक कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे
आयोजकों ने बताया कि आने वाले दिनों में ”श्री राम पर्व” के तहत अयोध्या में विभिन्न स्थानों पर सुंदरकांड पाठ और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा. इसका उद्देश्य लोगों के बीच धर्म, संस्कृति और भक्ति का प्रसार करना है, ताकि नई पीढ़ी भी इन परंपराओं से जुड़ी रहे।

(रिपोर्ट:अनूप कुमार)

Source link

जानसठ में शांतिपूर्वक संपन्न हुई अलविदा जुमे की नमाज: चौराहों और मस्जिदों पर कड़ी सुरक्षा, प्रशासन रहा अलर्ट मुजफ्फरनगर

जानसठ अलविदा जुम्मा इस मौके पर मुजफ्फरनगर जिले के जानसठ कस्बे और आसपास के इलाकों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था देखने को मिली. रमजान माह के आखिरी जुमे की नमाज को लेकर पुलिस व प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा, जिससे पूरे इलाके में शांति व सौहार्द का माहौल कायम रहा.


धार्मिक स्थलों और चौराहों पर कड़ी सुरक्षा

जानसठ अलविदा जुम्मा इसे देखते हुए शहर और ग्रामीण इलाकों में धार्मिक स्थलों के बाहर और प्रमुख चौराहों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

सुरक्षा व्यवस्था के तहत-
👉मस्जिदों के बाहर पुलिस की निगरानी रही
👉 मुख्य चौराहों पर जवान तैनात रहे
👉संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरती गई


अधिकारी क्षेत्र में भ्रमण करते रहे

थाना प्रभारी विनोद कुमार सिंह और सिखेड़ा थाना प्रभारी योगेन्द्र शर्मा पुलिस टीम के साथ क्षेत्र में लगातार भ्रमण करते रहे।

उन्होंने गांव-गांव जाकर यह सुनिश्चित किया कि नमाज शांतिपूर्वक पढ़ी जाए और कहीं कोई अव्यवस्था न हो.


इन गांवों में विशेष निगरानी

जानसठ अलविदा जुम्मा इस दौरान चित्तौरा, कवाल, तिसंग, तालड़ा, सलारपुर, मेहलकी, गढ़ी सिखेड़ा, नंगला कबीर, निराना, भंडूरा और खेड़ी वीरान समेत कई गांवों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई।

इन सभी क्षेत्रों में पुलिस की सक्रिय उपस्थिति ने शांति व्यवस्था बनाये रखने में अहम भूमिका निभायी.


कस्बे में भी पुलिस तैनात रही

जानसठ कस्बे में चौकी प्रभारी मो विशाल राठी धार्मिक स्थलों पर पुलिस बल के साथ तैनात रहे। उन्होंने स्थानीय लोगों से भी बातचीत की और सहयोग की अपील की.


एसडीएम ने शांति बनाए रखने की अपील की

जानसठ अलविदा जुम्मा इस अवसर पर एस.डी.एम राजकुमार भारती क्षेत्र में भी सक्रिय रहे। उन्होंने लोगों से अपील की कि-

👉 आपसी भाईचारे के साथ त्योहार मनाएं
👉किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें
👉 शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें


शांतिपूर्ण माहौल में नमाज अदा की गई

सभी गांवों व कस्बों में अलविदा जुमे की नमाज पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में हुई। कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है.


सद्भावना की मिसाल पेश करें

जानसठ अलविदा जुम्मा इस दौरान इलाके में आपसी सौहार्द और भाईचारा का माहौल देखने को मिला. प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए लोगों ने शांतिपूर्वक त्योहार मनाया.


जानसठ क्षेत्र में अलविदा जुमे की नमाज शांतिपूर्वक संपन्न होना प्रशासन की सतर्कता और आमजन के सहयोग का नतीजा है। सुरक्षा व्यवस्था के बीच जिस तरह से भाईचारे और शांति का संदेश सामने आया, वह आने वाले त्योहारों के लिए भी सकारात्मक संकेत देता है।

Source link

देहरादून: 23 साल पुराने लोन घोटाले में सीबीआई कोर्ट का फैसला, सहायक ट्रेजरी अधिकारी समेत आठ को सजा

हरिद्वार में लोक निर्माण विभाग में 23 साल पहले हुए घोटाले में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश मदन राम की अदालत ने सहायक कोषाधिकारी समेत आठ लोगों को सजा सुनाई है। विभिन्न धाराओं के तहत अधिकतम सज़ा दो साल सश्रम कारावास है।

कोर्ट ने सहायक कोषाधिकारी पर 40 रुपये और बाकी पर 35-35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. इस मामले में कुल 20 सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था. इनमें से चार की मौत हो चुकी है. जबकि सात लोगों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था और उन्हें पहले ही दोषी ठहराया जा चुका था. सीबीआई के अधिवक्ता अभिषेक अरोड़ा ने बताया कि घोटाले के संबंध में वर्ष 2002 में हरिद्वार की रानीपुर कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में एक याचिका पर हाईकोर्ट ने सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था, जिसके बाद सीबीआई ने 9 अगस्त 2003 को मामला दर्ज किया और जांच शुरू की.

जांच में पता चला कि वर्ष 2001-02 के दौरान कोषागार अधिकारियों और लोक निर्माण विभाग, हरिद्वार और रूड़की के अधिकारियों ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर साजिश रची थी. इस साजिश के तहत बकाया वेतन, एडवांस जीपीएफ, मेडिकल बिल और स्टेशनरी से जुड़े फर्जी बिल बनाए गए. इन फर्जी बिलों के आधार पर कोषागार से चेक जारी किये गये और फर्जी तरीके से भुना लिये गये. इसमें कुल 55 लाख रुपये से अधिक की अवैध निकासी की गयी. इस मामले में सीबीआई ने कोषागार अधिकारियों और लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों समेत कुल 20 लोगों को आरोपी बनाया था.

उत्तराखंड: अब श्रमिकों को मिल सकेगा सिर्फ दस घंटे काम, न्यूनतम वेतन में बच्चों की पढ़ाई के खर्च का भी प्रावधान

आरोपियों ने कुल 32 लाख रुपये लौटा भी दिए थे लेकिन बाकी रकम अभी तक बरामद नहीं हुई है. 15 जून 2005 को सीबीआई ने सभी 20 आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और जालसाजी के आरोप में आरोप पत्र दायर किया। वहीं सरकारी कर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गईं। मुकदमे के दौरान अकाउंटेंट रवींद्र श्रीवास्तव समेत चार लोगों की मौत हो चुकी है।

इस मामले में सीबीआई ने 56 गवाहों की गवाही करायी. जबकि बचाव पक्ष मात्र तीन लोगों को ही अपने पक्ष में पेश कर सका. सजा पाए सभी आठ लोग सरकारी अधिकारी और कर्मचारी हैं। वहीं, प्राइवेट पर्सन प्रदीप कुमार वर्मा को बरी कर दिया गया है.

Source link

रुदौली में कामाख्या धाम महोत्सव 2.0 का भव्य शुभारंभ, 1100 कन्याओं का पूजन एवं 238 जोड़ों का सामूहिक विवाह।

रुदौली में शुक्रवार को कामाख्या धाम महोत्सव 2.0 का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर 1100 कन्याओं का पूजन कर कार्यक्रम की शुरुआत की गयी. पूरे आयोजन में आस्था, भक्ति और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला. बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौके पर पहुंचे और पूरा वातावरण मां कामाख्या के जयकारों से गूंज उठा। कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक रामचन्द्र यादव एवं महोत्सव ट्रस्ट के अध्यक्ष रविकांत तिवारी ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

शुरुआत 1100 कन्या पूजन से हुई
महोत्सव की शुरुआत कन्या पूजन से हुई, जिसमें 1100 कन्याओं को सम्मानित किया गया. पूरे परिसर में भक्तिमय माहौल रहा. कार्यक्रम का समापन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुआ, जिसमें स्थानीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिली. आयोजकों ने बताया कि आने वाले दिनों में धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों की शृंखला आयोजित की जाएगी।

238 जोड़ों का हुआ सामूहिक विवाह, दिखा सामाजिक सौहार्द
महोत्सव के पहले दिन समाज कल्याण विभाग की ओर से मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 238 जोड़ों का विवाह कराया गया। हिंदू जोड़ों का निकाह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ, जबकि मुस्लिम जोड़े का निकाह काजी ने कराया, जो सामाजिक एकता की मिसाल बन गया. शहनाई की गूंज और पारंपरिक गीतों से पूरा माहौल उत्सवी हो गया और घराती खुशी से झूम उठे। शादी के बाद सभी नवविवाहितों को उपहार दिए गए और उनके बैंक खातों में 60 हजार रुपये की सहायता राशि भी भेजी गई.

जन प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की उपस्थिति
इस कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष राधेश्याम त्यागी, जिला कल्याण पदाधिकारी रणविजय सिंह, नेता खुन्नू पांडे, बीडीओ अमित त्रिपाठी, भावना यादव समेत कई अधिकारी व जनप्रतिनिधि मौजूद थे. सभी ने मिलकर मेहमानों के लिए भोजन और जलपान की व्यवस्था की।

विधायक ने गिनाये विकास कार्य
विधायक रामचन्द्र यादव ने भी क्षेत्र में किये गये विकास कार्यों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उनके प्रयास से स्कूल, आईटीआई, इंटर कॉलेज और आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई है. साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पीएचसी और सीएचसी केंद्रों का विस्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि नगर पंचायत बनने के बाद 100 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य हुए हैं और मुख्यमंत्री योजना के तहत गरीब बेटियों की शादी की जिम्मेदारी सरकार उठा रही है.

इलाके में भीड़ जमा हो गई
इस पूरे आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे. श्रद्धालुओं की भीड़ और भक्ति के माहौल ने इस पर्व को खास बना दिया.

(रिपोर्ट:अनूप कुमार)

Source link

मुजफ्फरनगर में गोहत्या का सनसनीखेज खुलासा: चोरी के बाद काटा बछड़ा, एक गिरफ्तार, दो फरार

मुजफ्फरनगर गोहत्या का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां खतौली इलाके में गायों को चोरी कर अवैध रूप से काटने की घटना से स्थानीय लोगों में गुस्सा है. पुलिस ने इस गंभीर मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, जबकि उसके दो साथी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं. यह मामला न सिर्फ कानून व्यवस्था बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता से भी जुड़ा है, जिसे देखते हुए प्रशासन पूरी गंभीरता से जांच कर रहा है.


खतौली पुलिस की सख्ती: आरोपी अमीश गिरफ्तार

मुजफ्फरनगर गोकशी मामले में थाना खतौली पुलिस को उस समय बड़ी सफलता मिली जब फरार चल रहे आरोपी अमीश (24) पुत्र शकील निवासी मोहल्ला देवीदास, खतौली को गिरफ्तार कर लिया गया. 19 मार्च 2026 की रात करीब 9:05 बजे पुलिस ने छापा मारकर उसे दूधली कट इलाके से पकड़ लिया.

थाना प्रभारी निरीक्षक दिनेश चंद्र बघेल के नेतृत्व में चलाए गए इस ऑपरेशन में पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्य और मुखबिर की सूचना के आधार पर कार्रवाई की. गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की गई, जिसमें उसने कई अहम खुलासे किए.


चोरी से लेकर कटान तक: पूरी साजिश का खुलासा!

मुजफ्फरनगर गोहत्या मामले की शुरुआत 15 मार्च 2026 को हुई, जब खेड़ी रांगधन निवासी प्रवेश कुमार ने थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उनके घर से एक बछड़ा चोरी हो गया है. इस शिकायत पर तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई.

जांच के दौरान पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और अन्य साक्ष्य जुटाए. इन सबके आधार पर तीन आरोपियों अमीश, उसके पिता शकील और भाई आजम की पहचान की गई.

पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपी अमीश ने स्वीकार किया कि उसके पिता और भाई ने मिलकर बछड़ा चुराया और बाद में उसका अवैध रूप से वध कर मांस बेच दिया. घटना के बाद सबूत मिटाने के लिए जानवर के अवशेषों को नहर में फेंक दिया गया.


बरामदगी से केस मजबूत हुआ

मुजफ्फरनगर गोहत्या मामले में पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर सठेड़ी नहर के पास झाड़ियों से कई अहम सबूत बरामद किए हैं. इनमें जानवरों को बांधने वाली रस्सियां, एक मुखपत्र, रस्सी के टुकड़े, एक खूँटा, एक चाकू और गोवंश के अवशेष शामिल हैं।

इन बरामदगी से न केवल आरोपियों के बयान की पुष्टि हुई बल्कि पुलिस केस को मजबूत आधार भी मिला। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई आगे की जांच में अहम भूमिका निभाएगी.


गोवध अधिनियम के तहत धाराएं बढ़ाई गईं

मुजफ्फरनगर गोहत्या मामले में गिरफ्तारी और बरामदगी के बाद पुलिस ने मामले में गोवध अधिनियम समेत अन्य सख्त धाराएं जोड़ दी हैं. इससे आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और सख्त हो गई है.

गिरफ्तार आरोपी अमीश को न्यायालय में पेश कर जिला जेल भेज दिया गया है. पुलिस फरार आरोपी शकील और आजम की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है.


फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की छापेमारी जारी है

मुजफ्फरनगर गोहत्या मामले में पुलिस अब फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी कर रही है. संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है और आसपास के जिलों में भी सूचना भेज दी गयी है.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा.


स्थानीय लोगों में आक्रोश, प्रशासन अलर्ट

मुजफ्फरनगर में गौहत्या का यह मामला सामने आने के बाद इलाके के लोगों में गुस्सा देखा जा रहा है. स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

प्रशासन ने भी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं.


गौहत्या के मामलों पर बढ़ती सख्ती: प्रशासन का स्पष्ट संदेश

मुजफ्फरनगर गोहत्या मामले से पता चलता है कि प्रशासन अब ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त रुख अपना रहा है. पुलिस और प्रशासन की ओर से साफ संदेश है कि गोवंश से जुड़े अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे.

विशेष अभियान चलाकर ऐसे मामलों पर नजर रखी जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है.


मुजफ्फरनगर गोहत्या मामला कानून-व्यवस्था और सामाजिक संवेदनशीलता दोनों का मामला है. प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से साफ है कि ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं. आने वाले समय में भी पुलिस ऐसे मामलों पर कड़ी नजर रखेगी, ताकि समाज में शांति और विश्वास कायम रह सके.

Source link

उत्तराखंड: अब श्रमिक केवल दस घंटे ही काम कर सकेंगे, बच्चों की शिक्षा का खर्च भी न्यूनतम वेतन में शामिल – अब श्रमिक केवल दस घंटे ही काम कर सकेंगे बच्चों की शिक्षा का खर्च भी न्यूनतम वेतन में शामिल – उत्तराखंड

आने वाले समय में उत्तराखंड में श्रमिकों से सिर्फ 10 घंटे ही काम लिया जा सकेगा। इसके बाद ओवरटाइम का पैसा अलग से देना होगा. वहीं, सरकार ने पहली बार न्यूनतम मजदूरी दर का वैज्ञानिक फॉर्मूला तय करने के साथ-साथ श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य खर्च को भी इसमें शामिल करने का फैसला किया है। इसके लिए श्रम विभाग ने उत्तराखंड वेतन संहिता नियमावली 2026 का ड्राफ्ट जारी कर एक माह के भीतर सुझाव मांगे हैं।

नए नियमों के तहत कार्यस्थल पर काम के घंटों से लेकर न्यूनतम वेतन तक के मानकों में बड़े बदलाव किए गए हैं। किसी भी श्रमिक को एक दिन में 10 घंटे और एक सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। साथ ही लगातार छह घंटे काम करने के बाद कम से कम आधे घंटे का आराम देना अनिवार्य होगा।

यदि कोई कर्मचारी अतिरिक्त समय (ओवरटाइम) काम करता है तो उसे सामान्य वेतन से दोगुना भुगतान करना होगा। सरकार ने इस नियमावली पर आम जनता से सुझाव मांगे हैं. अगर किसी को इन नियमों पर कोई आपत्ति है तो वह अधिसूचना जारी होने के 30 दिन के भीतर सचिव, श्रम विभाग या श्रम आयुक्त को ई-मेल भेज सकता है. सचिवोंwpl25@gmail.com, lckhld@gmail.com आप अपनी राय भेज सकते हैं.

ये होंगे न्यूनतम वेतन के मानक

अब न्यूनतम वेतन सिर्फ अनुमान पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक मानकों पर तय होगा। इसके तहत प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2700 कैलोरी की खपत, प्रति परिवार प्रति वर्ष 66 मीटर कपड़ा, भोजन और कपड़ों पर कुल खर्च का 10 प्रतिशत मकान किराया माना जाएगा। इसके अलावा श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा उपचार और मनोरंजन के लिए कुल वेतन का 25 प्रतिशत अलग से जोड़ा जाएगा।

महिला मजदूर के सास-ससुर भी परिवार में हैं

नए नियमों में परिवार का दायरा बढ़ाते हुए इसे स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. इसमें पति-पत्नी, 21 साल तक के आश्रित बेटे, अविवाहित बेटियां, शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम बच्चे और आश्रित माता-पिता (महिला कर्मचारियों के मामले में सास-ससुर सहित) शामिल हैं। इसका लाभ यह होगा कि श्रम संबंधी योजनाओं का लाभ पूरे परिवार तक पहुंचेगा।



ये भी पढ़ें…चारधाम यात्रा 2026: केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में विशेष पूजा हुई महंगी, ये होंगी शुल्क की नई दरें

अब वहां उच्च कुशल श्रमिक भी होंगे

कौशल के आधार पर अब तक श्रमिकों की तीन श्रेणियां थीं- अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल। श्रम विभाग ने अब चौथी उच्च कुशल श्रेणी जोड़ दी है। इस चतुर्थ श्रेणी में वे कर्मचारी माने जायेंगे जिनमें विशिष्ट उत्कृष्टता एवं निर्णय लेने की क्षमता होगी। उसी के अनुरूप उन्हें मानदेय, वेतन या अन्य लाभ मिलेंगे।

Source link

श्रावस्ती में शिया समुदाय का बड़ा फैसला, इस बार सादगी से मनाई जाएगी ईद-उल-फितर

श्रावस्ती जिले के नासिरगंज इलाके से एक अहम और भावनात्मक खबर सामने आई है। यहां के शिया समुदाय ने इस साल पारंपरिक रूप से ईद-उल-फितर नहीं मनाने का फैसला किया है। समाज के लोगों ने ऐलान किया है कि इस बार न तो कोई जश्न मनाया जाएगा और न ही कोई खुशी. इसके बजाय लोग सादगी से नमाज अदा करेंगे और हाथों पर काली पट्टी बांधकर अपनी संवेदना व्यक्त करेंगे.

अलविदा जुमे की नमाज में हुआ फैसला
इस फैसले की घोषणा अलविदा जुमे की नमाज के दौरान की गई. नमाज में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और सभी ने एकजुट होकर यह फैसला लिया. समुदाय के लोगों का कहना है कि मौजूदा हालात और उनके धार्मिक नेता के निधन के कारण इस बार जश्न मनाना उचित नहीं है.

रहबर की मौत से लोग गहरे शोक में हैं
शिया समुदाय के मुताबिक, उनके सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली सिस्तानी के निधन के बाद दुनिया का पूरा शिया समाज शोक में है। इसी वजह से श्रावस्ती के लोगों ने भी ईद को सादगी और गम के साथ मनाने का फैसला किया है.

इमाम मौलाना तुफैल अब्बास का बयान
नासिरगंज के शिया जामा मस्जिद के इमाम मौलाना तुफैल अब्बास ने कहा कि अयातुल्ला अली सिस्तानी सिर्फ एक नेता नहीं थे, बल्कि पूरे समुदाय के नेता और मार्गदर्शक थे। उन्होंने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि ऐसे समय में जश्न मनाना उचित नहीं है.

अन्य लोगों ने भी दुख व्यक्त किया
नाजिम हैदर ने कहा कि जिस तरह हिंदू धर्म में शंकराचार्य और ईसाई धर्म में पोप का महत्व है, उसी तरह शिया समुदाय के लिए रहबर का बड़ा स्थान है. उनके निधन से हर कोई आहत है. वकार हैदर ने कहा कि जब दुनिया में मासूमों की जान जा रही हो और हमारे अपने हमारे बीच नहीं रहे तो जश्न मनाना संभव नहीं है.

सादगी के साथ ईद की नमाज अदा की जाएगी
समुदाय के लोगों ने साफ किया है कि इस साल ईद-उल-फितर की नमाज पूरी सादगी के साथ पढ़ी जाएगी. किसी भी प्रकार का कोई उत्सव, मिठाई वितरण या उत्सव नहीं होगा। लोग काली पट्टी बांधकर अपनी संवेदना व्यक्त करेंगे और अपने धार्मिक कर्तव्य निभाएंगे।

Source link

मुजफ्फरनगर में अलविदा जुम्मा, ईद और नवरात्रि से पहले फ्लैग मार्च: सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, सौहार्द बनाए रखने की अपील

मुजफ्फरनगर फ्लैग मार्च इसके तहत आने वाले अलविदा जुम्मा, ईद-उल-फितर और नवरात्रि के त्योहारों को शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में सुनिश्चित कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है. शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने संयुक्त रूप से विशाल फ्लैग मार्च निकाला और आम जनता को सुरक्षा का भरोसा दिलाया.

इस फ्लैग मार्च का नेतृत्व करें पुलिस अधीक्षक नगर सत्यनारायण प्रजापत और अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) संजय कुमार सिंह इसे करें। उनके साथ पुलिस और प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे.


त्योहारों से पहले प्रशासन की सक्रियता

जिले में एक साथ कई बड़े धार्मिक उत्सव-अलविदा जुम्मा, ईद-उल-फितर और चैत्र नवरात्रिइसके चलते प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा तैयारियां तेज कर दी हैं.

मुजफ्फरनगर फ्लैग मार्च इसका उद्देश्य न केवल सुरक्षा व्यवस्था को प्रदर्शित करना था, बल्कि जनता के बीच यह विश्वास पैदा करना भी था कि त्योहारों के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


आम जनता से शांति एवं सौहार्द बनाये रखने की अपील

फ्लैग मार्च के दौरान अधिकारियों ने नागरिकों से सभी त्योहार मनाने की अपील की. आपसी प्रेम, सौहार्द एवं भाईचारे के साथ मनायें.

साथ ही लोगों को चेतावनी भी दी गई कि

  • सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक या भड़काऊ खबरें शेयर न करें

  • अफवाहों पर ध्यान न दें

  • किसी भी संदिग्ध सूचना की पुष्टि पुलिस या प्रशासन से करें


ईदगाह का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया

मुजफ्फरनगर फ्लैग मार्च अधिकारियों के बाद शामली स्टैंड स्थित ईदगाह निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान वहां की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया गया.

ईद की नमाज को लेकर विशेष इंतजाम किये गये तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये. ईदगाह परिसर की साफ-सफाई, सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष निर्देश जारी किये गये.


धर्मगुरुओं से संवाद, भाईचारे पर जोर

निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने शहर के प्रमुख धर्मगुरुओं से भी मुलाकात की. इस दौरान शहर काजी तनवीर आलम, मुफ्ती जुल्फिकार और गौहर सिद्दीकी बातचीत के जरिए शांति और सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया गया.

धर्मगुरुओं ने भी प्रशासन को सहयोग का आश्वासन दिया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की.


जिले को 9 जोन और 21 सेक्टर में बांटा गया था।

त्योहारों के दौरान पूरे जिले में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 09 जोन एवं 21 सेक्टर में विभाजित किया गया है.

हर जोन और सेक्टर में

तैनात कर दिया गया है. इसके अलावा संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पर्याप्त पुलिस बल एवं पीएसी की नियुक्ति भी कर दी गयी है.


पुलिस को सख्त निर्देश, अलर्ट रहने के आदेश

मुजफ्फरनगर फ्लैग मार्च इस दौरान एसपी सिटी ने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों को सख्त निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्र में लगातार भ्रमणशील रहें।

उन्हें यह भी बताया गया कि:

  • संदिग्ध व्यक्तियों एवं वस्तुओं पर नजर रखें

  • किसी भी गड़बड़ी की आशंका होने पर तत्काल कार्रवाई करें

  • माहौल खराब करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें


नमाज को लेकर गाइडलाइन जारी

ईद की नमाज को लेकर प्रशासन ने भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

  • नमाज़ केवल निर्दिष्ट स्थानों-ईदगाह और मस्जिद में ही पढ़ी जानी चाहिए।

  • सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ी जानी चाहिए

  • सभी को प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए


नगर पालिका को दिए निर्देश

निरीक्षण के दौरान नगर पालिका आवश्यक निर्देश भी दिये गये. ईओ प्रज्ञा सिंह सड़कों पर गड्ढों पर पैचवर्क और साफ-सफाई सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए, ताकि त्योहारों के दौरान लोगों को कोई असुविधा न हो।


समस्याओं का तत्काल समाधान

ईदगाह कमेटी के सदस्यों ने प्रशासन को कुछ स्थानीय समस्याओं से अवगत कराया, जिसका अधिकारियों ने मौके पर ही संज्ञान लिया.

इससे पता चलता है कि प्रशासन न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान दे रहा है बल्कि नागरिक सुविधाओं को भी प्राथमिकता दे रहा है.


अधिकारी और पुलिस बल मौजूद रहे

इस दौरान सीओ सिटी सिद्धार्थ कुमार मिश्र मौके पर दोनों थाने की पुलिस समेत कई बल मौजूद थे. सभी अधिकारियों ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि त्योहारों के दौरान कोई समस्या उत्पन्न न हो।


सुरक्षा और शांति का संतुलन

मुजफ्फरनगर फ्लैग मार्च इससे साफ संदेश गया है कि प्रशासन सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द को भी बराबर महत्व दे रहा है. त्योहारों के इस मौसम में जहां एक तरफ सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, वहीं दूसरी तरफ भाईचारे और एकता का संदेश भी दिया जा रहा है.


मुजफ्फरनगर में अलविदा जुम्मा, ईद-उल-फितर और नवरात्रि को देखते हुए प्रशासन की तैयारियां पूरी तरह से सख्त और व्यवस्थित नजर आ रही हैं. फ्लैग मार्च और अवलोकन के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि शांति, सुरक्षा और भाईचारे के साथ त्योहार मनाना प्राथमिकता है। प्रशासन और जनता के सहयोग से इस बार भी उम्मीद है कि सभी त्योहार सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाये जायेंगे.

Source link

बर्फबारी: बद्रीनाथ धाम में दो फीट तक बर्फ जमा, लगातार बर्फबारी, जानें 25 मार्च तक मौसम का पूर्वानुमान – बद्रीनाथ धाम में दो फीट तक बर्फ जमा, लगातार बर्फबारी जारी, उत्तराखंड मौसम समाचार

उत्तराखंड में मौसम का मिजाज बिगड़ गया है. बद्रीनाथ धाम में दो फीट तक बर्फ जमा है. लगातार बर्फबारी जारी है. मौसम विभाग ने शुक्रवार को राज्य के पहाड़ी इलाकों के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और बर्फबारी की चेतावनी जारी की है. जबकि 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का भी अनुमान है.

मैदानी इलाकों में भारी बारिश और तूफान के आसार हैं. मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के मुताबिक, देहरादून समेत उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और बर्फबारी के अलावा तूफान का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

ये भी पढ़ें…उत्तराखंड: अब श्रमिकों को मिल सकेगा सिर्फ दस घंटे काम, न्यूनतम वेतन में बच्चों की पढ़ाई के खर्च का भी प्रावधान

वहीं अन्य जिलों में भी भारी बारिश और तूफान का येलो अलर्ट जारी किया गया है. आने वाले दिनों की बात करें तो 25 मार्च तक प्रदेश भर में मौसम का मिजाज ऐसा ही बने रहने की संभावना है.

Source link

संग्रामपुर में ग्राम चौपाल कार्यक्रम बनकर रह गया औपचारिकता, अधिकारियों की अनुपस्थिति से ग्रामीण परेशान

अमेठी जिले के संग्रामपुर विकासखंड में ग्राम चौपाल कार्यक्रम को लेकर लापरवाही सामने आई है। सरकारी योजना के तहत प्रत्येक शुक्रवार को दो पंचायत भवनों में ग्राम चौपाल का आयोजन किया जाता है, ताकि ग्रामीणों की समस्याओं को सुना जा सके और समाधान किया जा सके. लेकिन यहां अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण यह कार्यक्रम महज औपचारिकता बनकर रह गया है. शुक्रवार को पुन्नापुर और धौरहरा पंचायत भवन पर चौपाल का आयोजन किया गया, लेकिन कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

चौपाल की जिम्मेदारी पंचायत सहायकों को सौंपी गई
इस दौरान ग्राम चौपाल की अध्यक्षता पंचायत सहायकों को करायी गयी. जबकि इस कार्यक्रम में प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों की उपस्थिति आवश्यक है, ताकि समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा सके. अधिकारी नहीं होने के कारण सारी जिम्मेदारी पंचायत सहायकों को उठानी पड़ती है, लेकिन अधिकार सीमित होने के कारण कई समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं।

ग्रामीणों को समाधान नहीं मिल रहा है
ग्राम चौपाल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान करना और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान करना है। लेकिन संग्रामपुर क्षेत्र में यह उद्देश्य पूरा होता नहीं दिख रहा है. अधिकारियों के मौके पर न पहुंचने से ग्रामीणों की समस्या जस की तस बनी रहती है। इससे लोगों में आक्रोश भी बढ़ रहा है.

किसान सम्मान निधि को लेकर महिला ने बताई समस्या
पुन्नापुर पंचायत भवन में धरौली गांव से आयी धर्मा देवी ने बताया कि उन्हें किसान सम्मान निधि की राशि नहीं मिल रही है. वह अपनी समस्या लेकर चौपाल में आई थीं, ताकि अधिकारियों से सीधे बात कर सकें. लेकिन किसी अधिकारी के न आने से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। उनका कहना है कि अधिकारी नहीं आएंगे तो समस्याओं का समाधान कैसे होगा।

कार्यक्रम की गंभीरता पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद ग्राम चौपाल कार्यक्रम की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं. एक ओर जहां सरकार ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए ऐसे कार्यक्रम चला रही है, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों की उदासीनता के कारण इसका उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अब यह कार्यक्रम ‘राम भरोसे’ होता नजर आ रहा है.

(रिपोर्ट:बृजेश मिश्र,अमेठी)

Source link