घर में नमाज पढ़ने के मामले में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पुलिस चालान वापस लेने का आदेश, लेकिन भीड़ इकट्ठा करने पर सख्त चेतावनी.

इलाहाबाद उच्च न्यायालय: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नमाज से जुड़े एक अहम मामले में बुधवार को फैसला सुनाते हुए बरेली निवासी की याचिका खारिज कर दी. याचिकाकर्ता ने अपने घर पर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं मिलने के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि नमाज के नाम पर लोगों की बड़ी भीड़ इकट्ठा करना उचित नहीं है. हालांकि याचिकाकर्ता ने कोर्ट को ये भी आश्वासन दिया कि भविष्य में विवादित स्थल पर भीड़ इकट्ठा नहीं की जाएगी. इसके साथ ही कोर्ट ने कुछ अहम निर्देश भी जारी किये.
पुलिस चालान वापस लेने का आदेश
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिकारियों को 16 जनवरी, 2026 को जारी पुलिस चालान को तुरंत वापस लेने का निर्देश दिया। यह चालान तारिक खान और अन्य के खिलाफ जारी किया गया था। जानकारी के मुताबिक, तारिक के रिश्तेदार हसन खान की संपत्ति पर नमाज पढ़ी जा रही थी, जिस पर पुलिस ने कार्रवाई की. कोर्ट के इस आदेश से याचिकाकर्ता को राहत मिली है.
कोर्ट ने दी सख्त चेतावनी
न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने अपने 25 मार्च के आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि यदि याचिकाकर्ता अपने वादे का उल्लंघन करता है और बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा करता है, जिससे क्षेत्र की शांति और व्यवस्था प्रभावित होती है, तो प्रशासन कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा। कोर्ट ने इस मामले में अनुशासन और कानून व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया.
सुरक्षा के दुरुपयोग का आरोप
सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कोर्ट को बताया कि हसन खान को दी गई सुरक्षा का दुरुपयोग किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि संपत्ति पर प्रतिदिन 50 से 60 लोग नमाज अदा करने आते हैं। उन्होंने इसके समर्थन में तस्वीरें और शपथ पत्र भी पेश किये. उन्होंने यह भी कहा कि अगर यही सिलसिला जारी रहा तो इलाके में शांति बिगड़ सकती है.
सुरक्षा वापस लेने और रद्द करने का नोटिस
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दी गई सुरक्षा वापस लेने का निर्देश दिया. साथ ही बरेली के जिलाधिकारी और एसएसपी को जारी अवमानना नोटिस भी रद्द कर दिया गया. अधिकारी पहले ही अदालत में उपस्थित होकर अपने शपथ पत्र दाखिल कर चुके हैं। अंत में कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और उम्मीद जताई कि याचिकाकर्ता अपना वादा निभाएगा.






